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2030 तक भारतीय यात्रा और होटलों पर करेंगे सबसे ज़्यादा खर्च, सामानों से आगे निकलेगा अनुभव-खर्च: CBRE रिपोर्ट

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2030 तक भारतीय यात्रा और होटलों पर करेंगे सबसे ज़्यादा खर्च, सामानों से आगे निकलेगा अनुभव-खर्च: CBRE रिपोर्ट

सारांश

CBRE रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि 2025–2030 के बीच भारतीय परिवार सामानों की बजाय यात्रा, होटल और अनुभवों पर ज़्यादा खर्च करेंगे। होटल खर्च 10.6% सीएजीआर से बढ़ेगा और लाइफस्टाइल होटलों की माँग समग्र बाज़ार से पाँच गुना तेज़ रफ्तार से बढ़ने का अनुमान है।

मुख्य बातें

CBRE रिसर्च की 22 जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2025–2030 के बीच भारतीयों का अनुभव-खर्च 10.3% सीएजीआर से बढ़ेगा।
होटलों पर खर्च की वृद्धि दर 10.6% सीएजीआर रहने का अनुमान — वास्तविक सामानों पर खर्च ( 9.1% सीएजीआर ) से अधिक।
2015–2025 के बीच एशिया-पैसिफिक में लाइफस्टाइल होटलों की आपूर्ति 19% सीएजीआर से बढ़ी, जबकि कुल होटल आपूर्ति केवल 5% सीएजीआर से बढ़ी।
2030 तक लाइफस्टाइल होटल आपूर्ति 10% सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान — समग्र बाज़ार की 2% वृद्धि दर से पाँच गुना अधिक।
भारत में लाइफस्टाइल होटलों की कमी डेवलपर्स और निवेशकों के लिए बड़ा अवसर है।
जेनरेशन ज़ी इस बदलाव की प्रमुख चालक — एशिया-पैसिफिक का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय समूह।

CBRE रिसर्च की 22 जून 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय परिवार 2025 से 2030 के बीच वास्तविक सामानों की तुलना में यात्रा, होटल और सांस्कृतिक अनुभवों पर कहीं अधिक खर्च करेंगे। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अनुभव-आधारित खर्च 10.3% सीएजीआर की दर से बढ़ेगा, जबकि वास्तविक सामानों पर खर्च केवल 9.1% सीएजीआर से बढ़ने की संभावना है।

मुख्य आँकड़े और रुझान

रियल एस्टेट सेवा और निवेश फर्म CBRE रिसर्च की इस रिपोर्ट के अनुसार, होटलों में ठहरने पर होने वाला खर्च सबसे तेज़ गति से — 10.6% सीएजीआर — बढ़ने का अनुमान है। यह आँकड़ा इस बात का संकेत है कि भारतीय उपभोक्ता अब 'चीज़ें खरीदने' से 'अनुभव जीने' की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि 2015 से 2025 के बीच एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में कुल होटल आपूर्ति 5% सीएजीआर से बढ़ी, परंतु इसी अवधि में लाइफस्टाइल होटलों की संख्या में 19% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

लाइफस्टाइल होटल: उभरती श्रेणी और निवेश अवसर

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी लाइफस्टाइल होटलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, जिससे डेवलपर्स और निवेशकों के लिए यहाँ बड़ी संभावनाएँ मौजूद हैं। अनुमान है कि 2030 तक लाइफस्टाइल होटलों की आपूर्ति 10% सीएजीआर से बढ़ेगी — जो समग्र होटल बाज़ार की अनुमानित 2% वृद्धि दर से पाँच गुना अधिक है।

यह नई श्रेणी एक स्वतंत्र होटल के स्थानीय डिज़ाइन और विशिष्टता को किसी संस्थागत ब्रांड के परिचालन पैमाने, वितरण नेटवर्क और लॉयल्टी प्रोग्राम के साथ जोड़ती है।

जेन-ज़ी यात्री: बदलती प्राथमिकताएँ

रिपोर्ट में 'जेनरेशन ज़ी' को इस बदलाव का प्रमुख चालक बताया गया है। एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में यह अभी सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय समूह है और आँकड़ों के अनुसार इनका खर्च किसी भी अन्य मौजूदा पीढ़ी की तुलना में तेज़ी से बढ़ेगा।

जेन-ज़ी यात्री ऐसे विशिष्ट और सुविचारित डिज़ाइन वाले माहौल को प्राथमिकता देते हैं जो सोशल मीडिया पर आकर्षक पृष्ठभूमि बन सकें। इन्हें कॉर्पोरेट परंपराओं से अलग व्यक्तिगत सेवा और वाइन टेस्टिंग, एकॉस्टिक परफॉर्मेंस तथा स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसे सक्रिय सामुदायिक अनुभव चाहिए।

तकनीक और वेलनेस: नई अपेक्षाएँ

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सेल्फ-चेक-इन से लेकर स्मार्ट-रूम ऑटोमेशन तक, वेलनेस इंटीग्रेशन और निर्बाध तकनीकी सुविधाएँ अब होटलों की विशेषता नहीं, बल्कि यात्रियों की बुनियादी अपेक्षा बन चुकी हैं।

कोविड-19 का दीर्घकालिक प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि कोविड-19 महामारी ने अनुभव-आधारित खर्च की ओर इस बदलाव को गति दी और 2022 से दबी हुई माँग ने इस प्रवृत्ति को बनाए रखा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति लगातार बढ़ रही है और घरेलू पर्यटन नए उच्च स्तर छू रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 'संग्रह' से 'अनुभव' की ओर बढ़ रही है। लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि यह रिपोर्ट एक निवेश फर्म की है, जिसके लिए लाइफस्टाइल होटल सेगमेंट में बढ़ते अवसर सीधे व्यावसायिक हित से जुड़े हैं। असली सवाल यह है कि क्या भारत का होटल बुनियादी ढाँचा — ख़ासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में — इस माँग को वास्तव में समायोजित कर पाएगा, या यह वृद्धि केवल महानगरों तक सीमित रहेगी। जेन-ज़ी की प्राथमिकताएँ असली हैं, पर उनकी क्रय शक्ति और रोज़गार स्थिरता पर निर्भर यह खर्च कितना टिकाऊ होगा, यह अभी देखना बाकी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CBRE रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक भारतीयों का खर्च कहाँ सबसे ज़्यादा बढ़ेगा?
CBRE रिसर्च के अनुसार, 2025–2030 के बीच होटलों पर खर्च 10.6% सीएजीआर और अनुभव-आधारित खर्च 10.3% सीएजीआर से बढ़ेगा, जो वास्तविक सामानों पर खर्च (9.1% सीएजीआर) से अधिक है। यानी भारतीय परिवार चीज़ें खरीदने की बजाय यात्रा और अनुभवों पर अधिक पैसा लगाएंगे।
लाइफस्टाइल होटल क्या होते हैं और ये साधारण होटलों से कैसे अलग हैं?
लाइफस्टाइल होटल एक ऐसी नई श्रेणी है जो स्वतंत्र होटल के स्थानीय डिज़ाइन और विशिष्टता को किसी बड़े ब्रांड के परिचालन पैमाने, वितरण नेटवर्क और लॉयल्टी प्रोग्राम के साथ जोड़ती है। इनमें वाइन टेस्टिंग, एकॉस्टिक परफॉर्मेंस और स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे अनुभव मिलते हैं।
भारत में लाइफस्टाइल होटलों में निवेश का अवसर क्यों है?
CBRE रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी लाइफस्टाइल होटलों की संख्या कम है, जबकि माँग तेज़ी से बढ़ रही है। 2030 तक इस सेगमेंट के 10% सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान है, जो समग्र होटल बाज़ार की 2% वृद्धि दर से पाँच गुना अधिक है।
जेनरेशन ज़ी का इस ट्रेंड में क्या योगदान है?
रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेशन ज़ी एशिया-पैसिफिक का सबसे बड़ा जनसांख्यिकीय समूह है और इनका खर्च किसी भी अन्य पीढ़ी की तुलना में तेज़ी से बढ़ने का अनुमान है। ये यात्री व्यक्तिगत सेवा, सोशल मीडिया-फ्रेंडली माहौल और स्थानीय अनुभवों को प्राथमिकता देते हैं।
कोविड-19 का भारतीयों के यात्रा खर्च पर क्या असर पड़ा?
CBRE रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 महामारी ने अनुभव-आधारित खर्च की ओर बदलाव को गति दी। 2022 से दबी हुई माँग ने इस प्रवृत्ति को बनाए रखा है, जो अब 2030 तक की वृद्धि का आधार बन रही है।
राष्ट्र प्रेस
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