नेपाल PM बालेंद्र शाह 10 अगस्त को भारत-चीन राजदूतों से करेंगे पहली द्विपक्षीय बैठक
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह 10 अगस्त से काठमांडू में विदेशी राजदूतों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें शुरू करेंगे — यह 27 मार्च को पदभार संभालने के बाद उनकी पहली ऐसी व्यक्तिगत राजनयिक मुलाकातें होंगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शाह सोमवार को पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और फिर चीनी राजदूत झांग माओमिंग से मिलेंगे।
बैठकों का क्रम और एजेंडा
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि 10 अगस्त को सुबह भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ और दोपहर बाद चीनी राजदूत झांग माओमिंग के साथ बैठक निर्धारित है। इसके अगले दिन 11 अगस्त, मंगलवार को अमेरिकी दूतावास के प्रभारी स्कॉट अर्बोम के साथ द्विपक्षीय संवाद होगा। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों और संबंधित देशों के आधिकारिक संदेशों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
स्थगन की वजह और पृष्ठभूमि
ये उच्चस्तरीय शिष्टाचार भेंटें मूल रूप से सुनसरी और आसपास के जिलों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के कारण स्थगित हो गई थीं। गौरतलब है कि बालेंद्र शाह इससे पहले कूटनीतिक बैठकों को लेकर अपने खुद के तय नियमों के कारण चर्चा में रहे थे, और अब इन्हीं नियमों से हटकर वह यह बैठकें कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उनकी सरकार घरेलू मोर्चे पर बढ़ते राजनीतिक दबाव का सामना कर रही है।
घरेलू राजनीतिक दबाव
नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद हुए चुनाव में जनता ने बालेंद्र शाह पर भरोसा जताया था, लेकिन कथित तौर पर उनकी सरकार की कार्यशैली से बड़ी संख्या में नागरिक असंतुष्ट हैं और लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं। पार्टी के भीतर भी दरार के संकेत सामने आए हैं — राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता मनीष झा ने संसद में पीएम शाह की कार्यशैली की सार्वजनिक आलोचना की।
आरएसपी प्रमुख का बचाव
आरएसपी के प्रमुख रबी लामिछाने ने शनिवार शाम काठमांडू में एक कार्यक्रम में जनता से राजनीतिक अस्थिरता की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक उठापटक को 'कुछ समय का शोर' बताया और कहा कि उनकी एकल-पार्टी सरकार देश को आगे ले जाने में पूरी तरह सक्षम है। शासन और विमानन की तुलना करते हुए लामिछाने ने सरकार के भीतर के रोज़ाना के टकरावों की तुलना बादलों के बीच से गुजरते हवाई जहाज से की।
आगे क्या
इन तीन प्रमुख राजनयिक बैठकों के बाद यह देखना अहम होगा कि बालेंद्र शाह भारत, चीन और अमेरिका के साथ नेपाल के संतुलित संबंधों को किस दिशा में ले जाते हैं — खासकर तब, जब देश के भीतर राजनीतिक स्थिरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।