18 सितंबर 2026
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निश्चल नाथ पांडे होंगे भारत में नेपाल के अगले राजदूत, PM बालेंद्र शाह की कैबिनेट ने की सिफारिश

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निश्चल नाथ पांडे होंगे भारत में नेपाल के अगले राजदूत, PM बालेंद्र शाह की कैबिनेट ने की सिफारिश

सारांश

नेपाल सरकार ने भारत के लिए राजनीतिक नियुक्ति की परंपरा तोड़ते हुए विदेश नीति विशेषज्ञ निश्चल नाथ पांडे को राजदूत पद के लिए चुना है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब नई दिल्ली-काठमांडू संबंधों में नई गतिशीलता की दरकार है।

मुख्य बातें

नेपाल की PM बालेंद्र शाह की कैबिनेट ने 18 सितंबर 2026 को निश्चल नाथ पांडे को भारत में अगले राजदूत के लिए अनुशंसित किया।
पांडे वर्तमान में सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज (CSAS) के निदेशक हैं और नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री रमेश नाथ पांडे के पुत्र हैं।
नियुक्ति से पहले उन्हें संवैधानिक प्रावधानों के तहत संसदीय सुनवाई से गुजरना होगा।
भारत के अलावा चीन, अमेरिका समेत 12 अन्य देशों में भी राजदूत पदों के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश की गई।
नेपाल ने पारंपरिक राजनीतिक नियुक्तियों के स्थान पर प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया अपनाई है।
शंकर प्रसाद शर्मा को अप्रैल में वापस बुलाए जाने के बाद से नई दिल्ली में पद रिक्त था।

नेपाल सरकार ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में अपने अगले राजदूत के रूप में著名 विदेश नीति विशेषज्ञ निश्चल नाथ पांडे के नाम की सिफारिश की है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। भारत के अलावा चीन, अमेरिका समेत 12 अन्य देशों में राजदूत पदों के लिए भी उम्मीदवारों की सिफारिश की गई है।

नियुक्ति प्रक्रिया का अगला चरण

नेपाल के संविधान के अनुसार राजदूत पद के लिए नामित व्यक्ति को पहले संसदीय सुनवाई प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य है। यह सुनवाई पूरी होने के पश्चात सरकार संबंधित देशों से औपचारिक सहमति (एग्रीमाँ) माँगेगी। सहमति प्राप्त होने पर राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों को राजदूत के पद पर नियुक्त करेंगे।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में इस प्रक्रिया की पुष्टि की और स्पष्ट किया कि सभी नियुक्तियाँ संवैधानिक मानकों के अनुरूप की जाएँगी।

कौन हैं निश्चल नाथ पांडे

पांडे वर्तमान में सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज (CSAS) के निदेशक हैं। उनके पास त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल से राजनीति विज्ञान में पीएचडी और कानून में स्नातक की डिग्री है। वे बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज में मानद एडजंक्ट प्रोफेसर हैं और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज में नॉन-रेजिडेंट सीनियर फेलो हैं।

उन्होंने 1998 से 2006 तक नेपाल के विदेश मंत्रालय के अंतर्गत इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेन अफेयर्स के कार्यकारी निदेशक के रूप में सेवाएँ दीं। 1996-97 में वे राष्ट्रीय योजना आयोग में पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन सलाहकार रहे। 2016 में वे नेपाल के ट्रुथ एंड रिकंसिलिएशन कमीशन में विशेषज्ञ सदस्य थे और 2017 में विदेश नीति पर सरकार की उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स के सदस्य रहे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने जर्मनी के स्टिफ्टंग विसेनशाफ्ट अंड पोलिटिक (SWP) और यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी ऑफ हल में विजिटिंग फेलोशिप भी की है। 2011 से 2019 तक वे कोलंबो स्थित रीजनल सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज के बोर्ड सदस्य रहे। गौरतलब है कि पांडे, नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री रमेश नाथ पांडे के पुत्र हैं।

प्रतिस्पर्धी नियुक्ति प्रक्रिया की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब मार्च के अंत में वर्तमान सरकार के गठन के बाद अप्रैल में कई राजनीतिक रूप से नियुक्त राजदूतों को वापस बुला लिया गया था। भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा को भी उसी समय वापस बुलाया गया था।

इसके बाद नेपाल सरकार ने राजदूत पदों के लिए प्रतिस्पर्धी नियुक्ति प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया और योग्य व्यक्तियों से आवेदन आमंत्रित किए। यह बदलाव परंपरागत राजनीतिक नियुक्तियों से हटकर विशेषज्ञता-आधारित कूटनीति की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विदेश मंत्री का बयान

नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनल ने कहा कि सरकार ने राजदूत पदों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता और अनुभव रखने वाले अत्यंत योग्य व्यक्तियों की सिफारिश की है। उन्होंने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्यता-आधारित बताया।

भारत-नेपाल के द्विपक्षीय संबंधों के दृष्टिकोण से पांडे की संभावित नियुक्ति महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि वे दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय राजनीति के गहरे जानकार हैं। संसदीय सुनवाई और आगे की प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद नई दिल्ली में उनकी औपचारिक तैनाती की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या पांडे जैसे अकादमिक विशेषज्ञ काठमांडू की परंपरागत कूटनीतिक जड़ता को तोड़ पाएँगे। भारत-नेपाल संबंध हाल के वर्षों में सीमा विवादों, व्यापार असंतुलन और चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण जटिल हुए हैं। एक विद्वान राजदूत की नियुक्ति तब तक प्रभावशाली नहीं होगी जब तक उन्हें नई दिल्ली में वार्ता की पर्याप्त राजनीतिक पूँजी और काठमांडू से स्पष्ट जनादेश न मिले। संसदीय सुनवाई प्रक्रिया यह भी बताएगी कि विपक्षी दल इस नई नियुक्ति पद्धति को किस हद तक स्वीकार करते हैं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निश्चल नाथ पांडे को भारत में नेपाल के राजदूत के लिए क्यों चुना गया?
नेपाल सरकार ने प्रतिस्पर्धी नियुक्ति प्रक्रिया के तहत विशेषज्ञता और अनुभव के आधार पर पांडे का चयन किया। वे दक्षिण एशियाई अध्ययन के विशेषज्ञ हैं और CSAS के निदेशक के रूप में विदेश नीति में व्यापक अनुभव रखते हैं।
निश्चल नाथ पांडे की नियुक्ति कब तक औपचारिक होगी?
संसदीय सुनवाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार भारत से औपचारिक सहमति माँगेगी। सहमति मिलने पर राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल उन्हें आधिकारिक रूप से नियुक्त करेंगे; इसमें कुछ सप्ताह से महीने लग सकते हैं।
नेपाल ने राजदूत नियुक्ति की प्रक्रिया क्यों बदली?
मार्च 2026 में नई सरकार बनने के बाद अप्रैल में राजनीतिक आधार पर नियुक्त राजदूतों को वापस बुला लिया गया। इसके बाद सरकार ने योग्यता और विशेषज्ञता को प्राथमिकता देते हुए प्रतिस्पर्धी आवेदन प्रक्रिया अपनाई।
भारत के अलावा किन देशों के लिए नेपाल ने राजदूत नामित किए हैं?
शुक्रवार की कैबिनेट बैठक में भारत के साथ-साथ चीन, अमेरिका और 10 अन्य देशों में कुल 13 राजदूत पदों के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश की गई।
भारत में नेपाल के पिछले राजदूत कौन थे और उन्हें क्यों वापस बुलाया गया?
भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा थे, जिन्हें अप्रैल 2026 में नई सरकार के गठन के बाद वापस बुलाया गया। उनकी वापसी राजनीतिक नियुक्तियों की समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी।
राष्ट्र प्रेस
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