डूसू चुनाव में एबीवीपी का विरोध प्रदर्शन, एनएसयूआई पर फर्जी मतदान का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 18 सितंबर 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के दौरान नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) पर धांधली और फर्जी मतदान कराने के गंभीर आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। दूसरे चरण के मतदान के दौरान एबीवीपी समर्थक लॉ सेंटर के बाहर पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ गए और एनएसयूआई विरोधी नारे लगाए।
मुख्य घटनाक्रम
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, 'यह प्रदर्शन इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि यहां एनएसयूआई ने चुनाव में धांधली करने की कोशिश की है। उन्हें एहसास हो गया है कि एबीवीपी जीत रही है और उनकी हताशा साफ दिखाई दे रही है।' उन्होंने दावा किया कि एक महिला फर्जी पहचान पत्र के साथ मतदान केंद्र में दाखिल हुई और उसने स्वयं स्वीकार किया कि वह एनएसयूआई से जुड़ी है।
सोलंकी ने आरोप लगाया कि ऐसे 100 से अधिक लोग फर्जी पहचान पत्रों के साथ अंदर भेजे गए। उन्होंने माँग की कि जब तक ऐसे लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध मामला दर्ज नहीं किया जाता, तब तक मतदान दोबारा शुरू नहीं होना चाहिए।
फर्जी वोटिंग स्लिप का आरोप
एबीवीपी ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसी फर्जी वोटिंग स्लिप बाँटी गईं, जिन पर एबीवीपी का नाम और एनएसयूआई का बैलेट नंबर अंकित था — जो कथित तौर पर मतदाताओं को भ्रमित करने की साजिश थी। सोलंकी के अनुसार, ऐसी स्लिप बाँटते हुए एक व्यक्ति को पकड़ा गया जिसने खुद को एनएसयूआई कार्यकर्ता बताया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।
डूसू अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
डूसू अध्यक्ष आर्यन मान ने कहा, 'हार की हताशा में एनएसयूआई अब वोट चोरी का सहारा ले रही है। वह छात्रों के फर्जी पहचान पत्र बनाकर और नकली तस्वीरों के जरिए लोगों को मतदान के लिए अंदर भेज रही है।' मान ने यह भी चेतावनी दी कि जब तक लॉ सेंटर-2 के मतदाताओं को न्याय नहीं मिलता, लॉ सेंटर-1 में मतदान शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश
दिल्ली उच्च न्यायालय ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद उम्मीदवारों, छात्रों, समर्थकों और अन्य लोगों को विजय जुलूस निकालने से प्रतिबंधित कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश का उल्लंघन करने पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है, और इसे अदालत की अवमानना भी माना जाएगा। आर्यन मान ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि एबीवीपी बड़ी जीत के बावजूद विजय जुलूस नहीं निकालेगी।
पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब डूसू चुनाव ऐतिहासिक रूप से छात्र राजनीति में भाजपा-समर्थित एबीवीपी और कांग्रेस-समर्थित एनएसयूआई के बीच प्रमुख प्रतिस्पर्धा का मैदान रहे हैं। गौरतलब है कि डूसू चुनावों में धांधली और मतदान अनियमितताओं के आरोप नए नहीं हैं — दोनों संगठन पिछले कई वर्षों में एक-दूसरे पर इस तरह के आरोप लगाते रहे हैं। इस बार दिल्ली उच्च न्यायालय की सक्रिय भूमिका और विजय जुलूस पर पाबंदी यह संकेत देती है कि चुनावी माहौल को लेकर प्रशासनिक और न्यायिक चिंताएँ गहरी हैं। आने वाले घंटों में परिणाम और उसके बाद की स्थिति पर सबकी नज़र टिकी होगी।