भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल की विदाई मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों की हुई सराहना
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को काठमांडू स्थित विदेश मंत्रालय में नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से विदाई मुलाकात की और उनके कार्यकाल के सफलतापूर्वक पूरा होने पर बधाई दी। नेपाल के विदेश मंत्रालय (एमओएफए) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बैठक की पुष्टि की।
बैठक का घटनाक्रम
बैठक के दौरान विदेश मंत्री खनल ने नेपाल-भारत संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने में राजदूत श्रीवास्तव की भूमिका की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों में उनके सक्रिय योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में द्विपक्षीय रिश्ते नई ऊँचाइयों को छू सके।
एमओएफए ने अपने बयान में उल्लेख किया कि ऊर्जा सहयोग, व्यापार, बुनियादी ढाँचे की कनेक्टिविटी और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्र में राजदूत के कार्यकाल के दौरान उल्लेखनीय प्रगति हुई।
भोटेकोशी बाढ़ और भारत की आपदा राहत
विदेश मंत्री खनल ने भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल के प्रति भारत द्वारा दिखाई गई एकजुटता और तत्काल आपदा राहत सहायता के लिए गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'संकट की इस घड़ी में भारत की सहायता दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग और मित्रता को दर्शाती है।' यह टिप्पणी इस बात की पुष्टि करती है कि आपदा-राहत कूटनीति भारत-नेपाल संबंधों का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है।
राजदूत श्रीवास्तव की प्रतिक्रिया
राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने अपने कार्यकाल के दौरान नेपाल सरकार की ओर से मिले सहयोग और समर्थन के लिए आभार जताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में नेपाल और भारत के द्विपक्षीय संबंध निरंतर और सुदृढ़ होते रहेंगे। विदेश मंत्री ने राजदूत को उनके भावी प्रयासों के लिए शुभकामनाएँ देते हुए आशा जताई कि वह आगे भी नेपाल के शुभचिंतक बने रहेंगे।
राजदूत श्रीवास्तव का कार्यकाल
राजदूत श्रीवास्तव ने 25 जून 2022 को काठमांडू में भारत के राजदूत का पदभार संभाला था और उनका कार्यकाल अब अपने अंतिम चरण में है। नेपाल में नियुक्ति से पूर्व वह भारत के विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में पूर्वी एशिया डिवीजन का नेतृत्व कर चुके हैं। इस भूमिका में उन्होंने चीन, जापान और कोरिया के मामलों का प्रबंधन किया था और भारत-चीन सीमा वार्ता का नेतृत्व भी किया था।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है और नेपाल के साथ बहुक्षेत्रीय सहयोग गहरा होता जा रहा है। नए राजदूत की नियुक्ति के बाद यह देखना रोचक होगा कि द्विपक्षीय एजेंडा किस दिशा में आगे बढ़ता है।