नेपाल बाढ़: राजदूत नवीन श्रीवास्तव पहुंचे चिलिमे, टनल में 100 मीटर तक सर्च; 1,252 की मौत, 4,216 लापता
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने 3 सितंबर को चिलिमे के पास स्याब्रुबेसी में तैनात भारत की तकनीकी टीम का दौरा किया, जहाँ भारत-नेपाल की संयुक्त टीम चिलिमे पावर हाउस टनल में खोज अभियान जारी रखे हुए है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के आँकड़ों के अनुसार, गुरुवार दोपहर तक नेपाल बाढ़ त्रासदी में मरने वालों की संख्या 1,252 हो चुकी है, जबकि 4,216 लोग अब भी लापता हैं।
टनल में खोज अभियान का ताज़ा हाल
राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए जानकारी दी कि नेपाली सेना के साथ काम कर रही भारतीय तकनीकी टीम विशेष उपकरणों की मदद से टनल के अंदर 100 मीटर तक खोजबीन कर चुकी है। उन्होंने बताया कि टीम अब टनल में और गहराई तक पहुँचने के लिए भारी उपकरण लाने की योजना बना रही है।
राजदूत ने कहा कि उन्होंने स्वयं उस दलदली और दुर्गम इलाके को देखा जिसमें दोनों देशों की टीमें काम कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विषम परिस्थितियों के बावजूद भारत और नेपाल की टीमें बिना रुके अभियान जारी रखे हुए हैं।
मौतों का ज़िलेवार ब्यौरा
रिपोर्टों के अनुसार, सबसे अधिक 355 मौतें चितवन में दर्ज की गई हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 218, नवलपरासी वेस्ट में 208 और नुवाकोट में 177 मौतें हुई हैं। इस आपदा का केंद्र रहे रसुवा ज़िले में 127 मौतें दर्ज की गई हैं। गोरखा, धाडिंग और तनाहुन ज़िलों में भी शव बरामद किए गए हैं।
अब तक मिले शवों में से केवल 95 लोगों की पहचान हो पाई है, जिनके पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान जारी है।
लापता लोगों में पनबिजली कर्मचारी सबसे अधिक
अधिकारियों के अनुसार, 4,216 लापता लोगों में विदेशी नागरिक, पनबिजली परियोजनाओं के कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। अकेले पनबिजली परियोजनाओं के लगभग 900 कर्मचारी अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों से जानकारी मिलेगी और रिपोर्टों का सत्यापन होगा, लापता लोगों की संख्या में बदलाव संभव है।
आगे क्या
भारतीय तकनीकी टीम टनल में भारी उपकरण लाकर खोज का दायरा और बढ़ाने की तैयारी में है। NDRRMA लगातार अपडेट जारी कर रहा है और राहत-बचाव अभियान पूरी क्षमता से जारी है। यह त्रासदी नेपाल में हाल के दशकों की सबसे भीषण बाढ़ आपदाओं में से एक बनती जा रही है।