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राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा का संत समाज और सूफी संगठनों ने किया स्वागत

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राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा का संत समाज और सूफी संगठनों ने किया स्वागत

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की CEO नियुक्ति पर संत समाज और सूफी संगठन एक सुर में खड़े हैं — यह दुर्लभ सांझी प्रसन्नता इस नियुक्ति को धार्मिक सीमाओं से परे व्यापक स्वीकृति दिलाती है।

मुख्य बातें

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया CEO नियुक्त किया गया है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने नियुक्ति को 'गोल्डन चांस' बताते हुए स्वागत किया।
स्वामी गोविंददेव गिरि को महंती की जिम्मेदारी और नए ट्रस्टियों को भी शामिल किया गया।
ट्रस्ट में पहली बार एक महिला को ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया — शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी हैं।
इंडियन सूफी फाउंडेशन के अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने ऑपरेशन सिंदूर में मिश्रा की भूमिका का उल्लेख करते हुए नियुक्ति को सकारात्मक बताया।
समाजवादी पार्टी की आलोचना को सूफी संगठन ने 'वोट की राजनीति' करार दिया।

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए हालिया बदलावों के तहत पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। 3 सितंबर को इस नियुक्ति पर देशभर के संत समाज और सूफी संगठनों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी से लेकर इंडियन सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी तक — सभी ने इस कदम को सकारात्मक बताया।

महंत रवींद्र पुरी ने दी बधाई

हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने जितेंद्र मिश्रा को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रकार उन्होंने भारतीय वायुसेना में देश की सेवा की, उसी निष्ठा के साथ अब वह मंदिर की व्यवस्था संभालेंगे। महंत पुरी ने इस अवसर को मिश्रा के लिए 'गोल्डन चांस' की संज्ञा दी और उम्मीद जताई कि वह इस दायित्व को पूरी कुशलता के साथ निभाएंगे।

ट्रस्ट में किए गए अन्य बदलावों का स्वागत करते हुए महंत पुरी ने कहा कि संत समाज के प्रतिनिधित्व को महत्व दिया जाना गौरव की बात है। उन्होंने स्वामी गोविंददेव गिरि को महंती की जिम्मेदारी मिलने और नए ट्रस्टियों को शामिल किए जाने का भी स्वागत किया।

पहली बार महिला ट्रस्टी — एक ऐतिहासिक कदम

महंत रवींद्र पुरी ने विशेष रूप से इस तथ्य को रेखांकित किया कि ट्रस्ट में पहली बार एक महिला को शामिल किया गया है। उनके अनुसार, संबंधित महिला शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी रही हैं और उनका अनुभव ट्रस्ट के कामकाज को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि नई कार्यकारिणी को अयोध्या की वैष्णव और रामानंदी परंपरा से जुड़े वरिष्ठ संतों का मार्गदर्शन लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

सूफी संगठन ने भी जताई प्रसन्नता

मुरादाबाद में इंडियन सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने भी जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एक सैन्य अधिकारी के रूप में मिश्रा ने जो अनुशासन और जिम्मेदारी का भाव अपनाया, वही गुण अब राम मंदिर जैसी महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर की व्यवस्था में काम आएंगे। कशिश वारसी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश सेवा का उनका यह अनुभव इस नई जिम्मेदारी में भी प्रासंगिक है।

राजनीतिक आलोचना पर सूफी संगठन की प्रतिक्रिया

सूफी कशिश वारसी ने स्पष्ट किया कि यदि समाजवादी पार्टी या कोई अन्य राजनीतिक दल इस नियुक्ति पर सवाल उठा रहा है, तो यह महज वोट की राजनीति से प्रेरित है। उनके अनुसार, देश की सेवा कर चुके एक अनुभवी व्यक्ति को सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी सौंपना एक सकारात्मक और सराहनीय निर्णय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मिश्रा अपने कार्यकाल में मंदिर ट्रस्ट की प्रतिष्ठा और संचालन को नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगे।

आगे की राह

गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट में यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब अयोध्या तीर्थ के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से विकसित हो रही है। संत समाज और सूफी संगठनों की सांझी प्रसन्नता इस नियुक्ति को व्यापक सामाजिक स्वीकृति का संकेत देती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि जितेंद्र मिश्रा ट्रस्ट की प्रशासनिक और धार्मिक व्यवस्थाओं को किस दिशा में ले जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या सैन्य अनुशासन की पृष्ठभूमि किसी जटिल धार्मिक-सांस्कृतिक संस्था के संचालन के लिए पर्याप्त है। संत समाज और सूफी संगठनों की एकजुट प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है — यह दर्शाती है कि नियुक्ति को सांप्रदायिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सेवा के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि, समाजवादी पार्टी जैसे दलों की आपत्तियाँ यह भी संकेत देती हैं कि अयोध्या का प्रशासनिक ढाँचा राजनीतिक बहस से परे नहीं है। असली कसौटी यह होगी कि नई कार्यकारिणी तीर्थ-प्रबंधन, श्रद्धालु-सुविधा और संत समाज के मार्गदर्शन के बीच संतुलन कैसे बनाती है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO कौन हैं?
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। वह भारतीय वायुसेना में अपनी सेवा और 'ऑपरेशन सिंदूर' में भूमिका के लिए जाने जाते हैं।
संत समाज ने इस नियुक्ति पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने नियुक्ति का स्वागत करते हुए इसे जितेंद्र मिश्रा के लिए 'गोल्डन चांस' बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मिश्रा वैष्णव और रामानंदी परंपरा के संतों के मार्गदर्शन में मंदिर की व्यवस्थाएँ सुचारु रूप से संचालित करेंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट में और क्या बदलाव हुए हैं?
ट्रस्ट में स्वामी गोविंददेव गिरि को महंती की जिम्मेदारी दी गई है और नए ट्रस्टी शामिल किए गए हैं। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि पहली बार एक महिला को ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है, जो शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हैं।
सूफी संगठन ने इस नियुक्ति का स्वागत क्यों किया?
इंडियन सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी कशिश वारसी ने कहा कि जितेंद्र मिश्रा का सैन्य अनुशासन और देश सेवा का अनुभव उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' में मिश्रा की भूमिका का विशेष उल्लेख किया।
समाजवादी पार्टी की आलोचना पर क्या कहा गया?
सूफी कशिश वारसी ने समाजवादी पार्टी और अन्य दलों की आलोचना को 'वोट की राजनीति' करार दिया। उनके अनुसार, देश की सेवा कर चुके व्यक्ति को सांस्कृतिक धरोहर की जिम्मेदारी देना पूरी तरह सकारात्मक कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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