राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा फेरबदल: एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने सीईओ, गोविंददेव गिरि को महामंत्री की जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 2 सितंबर 2026 को अयोध्या में हुई अहम बैठक में मंदिर प्रशासन की कमान संभालने के लिए भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त उपाध्यक्ष एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया। साथ ही स्वामी गोविंददेव गिरि को महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई और तीन नए न्यासियों को ट्रस्ट में शामिल किया गया।
नई नियुक्तियाँ और बदली जिम्मेदारियाँ
ट्रस्ट में रिक्त तीन न्यासी पदों पर महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नियुक्त किया गया है। महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष का दायित्व भी सौंपा गया है। पिछले दो महीनों की कठिन अवधि में महामंत्री पद संभालने वाले कृष्ण मोहन जी की न्यासियों ने सराहना की और उनके प्रति आभार जताया।
सीईओ चयन समिति ने करीब साढ़े पाँच हजार आवेदनों की जाँच की और सैकड़ों आवेदकों का साक्षात्कार लेने के बाद एयर मार्शल मिश्रा की अनुशंसा की। समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी, सुरेश हावडे और सचिव समीर पंडा शामिल थे।
एयर मार्शल मिश्रा का अनुभव और चुनौतियाँ
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्ष तक विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। ट्रस्ट के अनुसार, उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है और 'ऑपरेशन सिंदूर' का संचालन भी उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में हुआ बताया गया है।
राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच नए सीईओ के सामने मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा, कर्मचारी व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और विभिन्न विभागों व एजेंसियों के बीच समन्वय की बड़ी जिम्मेदारी होगी। उम्मीद जताई गई है कि वे शीघ्र ही कार्यभार संभालेंगे।
वित्तीय पारदर्शिता और एसआईटी जाँच
बैठक में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में विशेष जाँच दल (एसआईटी) की प्रगति और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की भी समीक्षा की गई। ट्रस्ट ने उस आदेश का स्वागत किया जिसके तहत जाँच का दायरा कालखंड और विषय, दोनों स्तर पर विस्तृत किया गया है। ट्रस्ट ने कहा कि विस्तृत जाँच से वास्तविक तथ्य सामने आएँगे और जनमानस में पैदा हुआ कोई भी भ्रम दूर होगा।
चढ़ावे की नकद राशि की गणना में मानवीय हस्तक्षेप कम करने के लिए तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया। इस संबंध में दो बैंकों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनका मूल्यांकन किया जा रहा है।
ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति
वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक लेखे बैठक में प्रस्तुत किए गए और न्यासी मंडल ने उनका अनुमोदन किया। ट्रस्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में कुल आय ₹237 करोड़ रही, जबकि कुल व्यय ₹91 करोड़ रहा। निर्माण कार्यों पर ₹425 करोड़ का पूंजीगत व्यय किया गया। 31 मार्च 2026 को वित्त वर्ष की समाप्ति पर ट्रस्ट के पास कुल उपलब्ध राशि ₹1,882 करोड़ थी।
नए न्यासियों का परिचय
महेश भागचंदका 68 वर्षीय व्यवसायी और समाजसेवी हैं, जो नई दिल्ली में रहते हैं। वह 'हिन्दुत्व के पुरोधा' पुस्तक के लेखक हैं और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भूमि-पूजन तथा प्राण-प्रतिष्ठा में यजमान के रूप में सहभागी रहे हैं। वह वर्ल्ड हिंदू इकनॉमिक फोरम की कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं।
मदन मोहन पांडे 74 वर्षीय विधि स्नातक और अधिवक्ता हैं, जो अयोध्या छावनी में रहते हैं। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मामले में 1990 से 2019 तक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी की और उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता का दायित्व छह वर्ष तक संभाला।
डॉ. निर्मला यादव 66 वर्षीय शिक्षाविद हैं, जिन्होंने हिंदी और संस्कृत में परास्नातक तथा पीएचडी की है। वे 19 वर्ष तक महाविद्यालय की प्राचार्य रहीं और 15 वर्ष तक विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की सदस्य भी रहीं।
यह फेरबदल ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर प्रशासन पर एसआईटी जाँच और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी के कारण पारदर्शिता की माँग तेज हो गई है। नई टीम के सामने संस्थागत विश्वसनीयता बहाल करना और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ कदम मिलाना, दोनों एक साथ करने की चुनौती होगी।