राम मंदिर ट्रस्ट: चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, कृष्ण मोहन बने नए महासचिव
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में 6 जुलाई 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने घोषणा की कि महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। मंदिर परिसर में चोरी का मामला सामने आने के बाद दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जाँच पूरी होने तक पद से अलग रहने का निर्णय लिया था।
नई जिम्मेदारियाँ और ट्रस्ट का ढाँचा
ट्रस्ट ने चंपत राय की समस्त जिम्मेदारियाँ कृष्ण मोहन को सौंपने का फैसला किया है। कृष्ण मोहन अब अपनी टीम के साथ मंदिर ट्रस्ट के दैनिक कार्यों का संचालन करेंगे। गोविंद देव गिरी ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी सदस्य द्वारा इस्तीफा देने पर वह स्वतः स्वीकृत माना जाता है, इसलिए दोनों के इस्तीफे तत्काल प्रभाव से लागू हो गए।
चोरी के आरोप और ट्रस्ट का पक्ष
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोविंद देव गिरी ने बताया कि कुछ पक्षों द्वारा यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि केवल दानपात्रों से नहीं, बल्कि कई कीमती वस्तुएँ भी चोरी हुई हैं। इन आरोपों के जवाब में ट्रस्ट ने कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएँ मीडिया के सामने प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के पास 2,800 से अधिक वस्तुओं का विस्तृत रजिस्टर मौजूद है, जिसमें से कुछ को प्रमाण के तौर पर दिखाया गया।
गोविंद देव गिरी ने भरोसा दिलाया कि ट्रस्ट भविष्य में अधिक सतर्कता और पारदर्शिता के साथ कार्य करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी दानकर्ता को लगता है कि उनकी कोई वस्तु गायब है, तो वे ट्रस्ट से समय लेकर आएँ और पूरी जानकारी प्राप्त करें।
एसआईटी जाँच और अगली बैठक
गोविंद देव गिरी ने बताया कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति के लिए एक समिति का गठन किया गया है। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को आयोजित होगी और तब तक विशेष जाँच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट आने की उम्मीद है। एसआईटी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ट्रस्ट उसकी समीक्षा करेगा और कुछ नए न्यासियों की नियुक्ति की घोषणा भी संभव है।
राजनीतिकरण पर ट्रस्ट की चेतावनी
गोविंद देव गिरी ने इस मामले के राजनीतिकरण पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, "आज वे लोग हमें उपदेश दे रहे हैं जिन्होंने कभी कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई थीं। राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले लोग अचानक रामभक्ति की बात कर रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा उद्देश्य समाज को बाँटना है।" उन्होंने समाज से धैर्य और शांति बनाए रखने की अपील की, और आश्वासन दिया कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
आगे की राह
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि जो भी अपराधी हैं उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 22 जुलाई की बैठक में एसआईटी रिपोर्ट की समीक्षा के साथ-साथ ट्रस्ट के भावी संचालन का रोडमैप भी तय होने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर के उद्घाटन के डेढ़ वर्ष बाद भी ट्रस्ट का प्रशासनिक ढाँचा जनसामान्य की नज़रों में है।