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मेजर केपी सिंह को यूएन मेडल: साइप्रस में भारतीय हाई कमिश्नर ने UNFICYP सेवा पर जताया गर्व

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मेजर केपी सिंह को यूएन मेडल: साइप्रस में भारतीय हाई कमिश्नर ने UNFICYP सेवा पर जताया गर्व

सारांश

साइप्रस और कांगो — एक ही सप्ताह में दो महाद्वीपों पर भारतीय सैनिकों को यूएन मेडल। मेजर केपी सिंह का सम्मान उस मिशन में हुआ जहाँ भारत तीन फोर्स कमांडर दे चुका है। यह महज़ एक पुरस्कार नहीं — वैश्विक शांति में भारत की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

मुख्य बातें

मेजर केपी सिंह को 6 जुलाई 2025 को निकोसिया में यूएनएफआईसीवाईपी मेडल परेड में संयुक्त राष्ट्र मेडल से सम्मानित किया गया।
समारोह में हाई कमिश्नर मनीष ने व्यक्तिगत रूप से भाग लेकर बधाई दी।
यूएनएफआईसीवाईपी में भारत के तीन फोर्स कमांडर — लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम सिंह ग्यानी , जनरल केएस थिमैया और लेफ्टिनेंट जनरल देवान प्रेम चंद — सेवाएँ दे चुके हैं।
3 जुलाई को डीआरसी (कांगो) में मोनुस्को मिशन के तहत 651 भारतीय जवानों को भी यूएन मेडल प्रदान किया गया।
भारत अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र के सबसे सक्रिय योगदानकर्ता देशों में से एक बना हुआ है।

साइप्रस की राजधानी निकोसिया में भारत के हाई कमिश्नर मनीष ने सोमवार, 6 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र साइप्रस शांति मिशन (यूएनएफआईसीवाईपी) में स्टाफ ऑफिसर के रूप में सेवारत मेजर केपी सिंह को संयुक्त राष्ट्र मेडल प्रदान किए जाने पर बधाई और सराहना दी। यह सम्मान भारत की संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में दशकों पुरानी और गौरवशाली भागीदारी की एक और कड़ी है।

मेडल परेड समारोह: मुख्य घटनाक्रम

हाई कमिश्नर मनीष ने यूएन साइप्रस मुख्यालय में आयोजित यूएनएफआईसीवाईपी मेडल परेड में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। इस समारोह की अध्यक्षता यूएन साइप्रस के फोर्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद असदुल्लाह मिन्हाजुल आलम ने की। कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि (एसआरएसजी) और मिशन प्रमुख खासिम डायग्ने, सैनिक भेजने वाले देशों के राजनयिक, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी और सैनिकों के परिजन भी उपस्थित रहे।

भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि हाई कमिश्नर ने मेजर केपी सिंह को यूएनएफआईसीवाईपी में उनकी सेवा और मिशन में दिए गए अहम योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र मेडल मिलने पर बधाई दी।

UNFICYP से भारत का ऐतिहासिक जुड़ाव

भारतीय उच्चायोग के अनुसार, यूएनएफआईसीवाईपी के साथ भारत का संबंध विशेष रूप से गहरा रहा है। इस मिशन में भारत के तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारी — लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम सिंह ग्यानी, जनरल केएस थिमैया और लेफ्टिनेंट जनरल देवान प्रेम चंद — फोर्स कमांडर के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। यह तथ्य इस मिशन में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करता है।

गौरतलब है कि भारत का दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है, और देश आज भी अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कांगो में भी भारतीय जवानों को यूएन सम्मान

यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब पिछले ही सप्ताह कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में संयुक्त राष्ट्र मिशन (मोनुस्को) के तहत तैनात भारतीय सेना के 651 जवानों को भी संयुक्त राष्ट्र मेडल से नवाज़ा गया। यह समारोह 3 जुलाई को परमानेंट ऑपरेटिंग बेस साके में आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में मोनुस्को के वरिष्ठ अधिकारी, फोर्स मुख्यालय के प्रतिनिधि, सैन्य कमांडर और अन्य गणमान्य अतिथि शामिल हुए। समारोह में भारतीय दल की पेशेवर कार्यशैली, उत्कृष्ट प्रदर्शन और समर्पित सेवा की मुक्त कंठ से सराहना की गई।

वैश्विक शांति में भारत की भूमिका

एक ही सप्ताह में साइप्रस और कांगो — दो अलग-अलग महाद्वीपों में भारतीय सैन्यकर्मियों को संयुक्त राष्ट्र सम्मान मिलना, यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक शांति स्थापना में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है। आने वाले समय में भारत की इस प्रतिबद्धता के और मज़बूत होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत लगातार सैनिक भेज रहा है — यूएनएफआईसीवाईपी में तीन फोर्स कमांडर देना इसका सबसे ठोस प्रमाण है। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि इन बलिदानों और योगदानों को घरेलू मीडिया में वह प्रमुखता नहीं मिलती जिसके वे हकदार हैं। भारत की शांति-स्थापना विरासत को राष्ट्रीय विमर्श में अधिक केंद्रीय स्थान मिलना चाहिए।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेजर केपी सिंह को यूएन मेडल क्यों दिया गया?
मेजर केपी सिंह को संयुक्त राष्ट्र साइप्रस शांति मिशन (यूएनएफआईसीवाईपी) में स्टाफ ऑफिसर के रूप में उनकी सेवा और मिशन में दिए गए अहम योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया। यह मेडल 6 जुलाई 2025 को निकोसिया में आयोजित मेडल परेड में प्रदान किया गया।
यूएनएफआईसीवाईपी क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?
यूएनएफआईसीवाईपी (United Nations Peacekeeping Force in Cyprus) साइप्रस में संयुक्त राष्ट्र का शांति मिशन है। भारत का इस मिशन से गहरा ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है — लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम सिंह ग्यानी, जनरल केएस थिमैया और लेफ्टिनेंट जनरल देवान प्रेम चंद इस मिशन में फोर्स कमांडर रह चुके हैं।
डीआरसी (कांगो) में भारतीय जवानों को यूएन मेडल कब और कहाँ मिला?
3 जुलाई 2025 को परमानेंट ऑपरेटिंग बेस साके में आयोजित समारोह में मोनुस्को मिशन के तहत तैनात भारतीय सेना के 651 जवानों को संयुक्त राष्ट्र मेडल से सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में मोनुस्को के वरिष्ठ अधिकारी और सैन्य कमांडर उपस्थित थे।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारत का योगदान कितना महत्वपूर्ण है?
भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सैनिक भेजने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है और उसका इस क्षेत्र में दशकों पुराना इतिहास है। भारत अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सक्रिय रूप से बनाए रखे हुए है।
साइप्रस में भारतीय हाई कमिश्नर मनीष ने मेडल परेड में क्या भूमिका निभाई?
हाई कमिश्नर मनीष ने यूएन साइप्रस मुख्यालय में आयोजित यूएनएफआईसीवाईपी मेडल परेड में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया और मेजर केपी सिंह को उनकी सेवा के लिए बधाई दी। इस कार्यक्रम में एसआरएसजी खासिम डायग्ने और कई देशों के राजनयिक भी उपस्थित थे।
राष्ट्र प्रेस
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