महाराष्ट्र में रिकॉर्ड बारिश: तीन मौसम प्रणालियों के टकराव से 500 मिमी तक वर्षा, अब राहत के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में पिछले एक सप्ताह से जारी भारी बारिश के कारणों पर प्रकाश डालते हुए मौसम विशेषज्ञ अंकुर पुराणिक ने 6 जुलाई को बताया कि एक साथ सक्रिय हुई तीन प्रमुख मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव ने इस असाधारण वर्षा को जन्म दिया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सोमवार रात से बारिश की तीव्रता घटने लगेगी और बुधवार तक मौसम अपेक्षाकृत सामान्य हो सकता है।
तीन मौसम प्रणालियों का संयुक्त प्रहार
पुराणिक के अनुसार इस बार की असाधारण वर्षा किसी एक कारण का परिणाम नहीं थी। उन्होंने बताया, 'भारी बारिश केवल एक कारण से नहीं हुई, बल्कि तीन प्रमुख मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने से स्थिति बनी।' इनमें सोमाली जेट से आने वाली समुद्री नमी, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र और मध्य प्रदेश के ऊपर ऊपरी हवा का सर्कुलेशन शामिल था। इन तीनों के एकसाथ सक्रिय होने से मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़ और घाट क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई।
मानसून की देरी और अल नीनो का असर
पुराणिक ने बताया कि इस वर्ष मानसून की शुरुआत सामान्य से कुछ देर से हुई, जिसके पीछे अल नीनो सहित कई मौसम संबंधी कारक जिम्मेदार रहे। उन्होंने कहा, 'जून के मध्य तक मानसून के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ नहीं थीं, लेकिन जून के अंत तक वातावरण में बदलाव आने लगा और समुद्री नमी तेज़ी से बढ़ी, जिससे महाराष्ट्र में व्यापक बारिश का दौर शुरू हुआ।' यह देरी और उसके बाद एकाएक आई तीव्र वर्षा — दोनों मिलकर इस मौसम को असामान्य बनाते हैं।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र और वर्षा के आँकड़े
पुराणिक के अनुसार लोनावला और घाट क्षेत्रों में 24 घंटे के भीतर 300 से 500 मिलीमीटर तक बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि कई अन्य स्थानों पर वर्षा का आँकड़ा 200 मिलीमीटर से अधिक रहा। विरार, वसई, पालघर, भिवंडी, भयंदर और ठाणे जैसे उपनगर सबसे अधिक प्रभावित रहे, जहाँ जलभराव, यातायात बाधित होने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएँ सामने आईं। कई स्थानों पर हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक दर्ज की गई, जिससे कमज़ोर पेड़ और अस्थायी ढाँचे गिरने की घटनाएँ हुईं।
अलर्ट प्रणाली और डॉप्लर रडार की भूमिका
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा ऑरेंज अलर्ट को रेड अलर्ट में बदले जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर पुराणिक ने स्पष्ट किया कि मौसम पूर्वानुमान (फोरकास्ट) और नाउकास्ट दो अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। फोरकास्ट कई दिन पहले की संभावित स्थिति बताता है, जबकि नाउकास्ट अगले एक-दो घंटों में होने वाले बदलावों का आकलन करता है। उन्होंने कहा कि डॉप्लर रडार के ज़रिए बादलों की ऊँचाई, घनत्व, दिशा और हवा की गति का लगातार अध्ययन किया जाता है और परिस्थितियाँ तेज़ी से बदलने पर अलर्ट स्तर में बदलाव करना एक सामान्य वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
आगे का मौसम और सावधानी की अपील
पुराणिक ने अगले सप्ताह के पूर्वानुमान में कहा, 'सोमवार रात से बारिश में कमी आने लगेगी। मंगलवार को हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है, लेकिन बुधवार से मौसम काफी हद तक शुष्क रहने की संभावना है।' उन्होंने यह भी बताया कि अगले 10 से 15 दिनों के दौरान बीच-बीच में सामान्य बारिश होती रहेगी, लेकिन फिलहाल मौसम मॉडल में अत्यधिक या विनाशकारी वर्षा जैसी स्थिति दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि खराब मौसम के दौरान कमज़ोर संरचनाओं, पेड़ों और भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। भविष्य में महाराष्ट्र में अधिक डॉप्लर रडार स्थापित होने से माइक्रो-लेवल फोरकास्टिंग और भी सटीक होगी।