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महाराष्ट्र पर गंभीर सूखे का खतरा: मानसून गायब, बांधों में सिर्फ 25% पानी — शिवसेना (यूबीटी)

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महाराष्ट्र पर गंभीर सूखे का खतरा: मानसून गायब, बांधों में सिर्फ 25% पानी — शिवसेना (यूबीटी)

सारांश

महाराष्ट्र में 15 जून तक मानसून नहीं पहुँचा, 3,028 बांधों में जलस्तर 25% तक गिरा और मुंबई के जलाशयों में मात्र 12.48% पानी बचा है। शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' संपादकीय में अल-नीनो को 150 साल का सबसे प्रबल बताते हुए तत्काल संकट-तैयारी की माँग की।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 15 जून को 'सामना' संपादकीय में महाराष्ट्र पर गंभीर सूखे की चेतावनी दी।
मानसून की पारंपरिक आगमन तिथि 7 जून बीत चुकी है; 6 जून के बाद मानसून महाराष्ट्र-गोवा सीमा पर रुक गया।
राज्य के 3,028 बांधों में जलस्तर 25% तक गिरा; मुंबई के 7 प्रमुख जलाशयों में मात्र 12.48% जल शेष।
जल संसाधन विभाग ने कृषि जलापूर्ति बंद की; शेष जल केवल पेयजल के लिए सुरक्षित।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पिछले 150 वर्षों का सबसे प्रबल अल-नीनो प्रभाव हो सकता है।
पूरे महाराष्ट्र में बुवाई ठप; राज्य 40-50 वर्षों की सबसे भीषण गर्मी झेल रहा है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सोमवार, 15 जून को चेतावनी दी कि भीषण गर्मी और मानसून की अनुपस्थिति के बीच महाराष्ट्र अब गंभीर सूखे की कगार पर खड़ा है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि मानसून की पारंपरिक आगमन तिथि 7 जून बीत चुकी है और राज्य के 3,028 बांधों में जलस्तर खतरनाक रूप से 25 प्रतिशत तक गिर चुका है।

मानसून की स्थिति और अल-नीनो का खतरा

संपादकीय के अनुसार, जून के पहले सप्ताह में उम्मीद जगी थी जब मानसून समय पर अंडमान द्वीप समूह पहुँचा और केरल से कर्नाटक की ओर सामान्य रूप से आगे बढ़ा। लेकिन 6 जून के बाद मौसम का पैटर्न अचानक पलट गया — मानसून की रफ्तार थम गई और यह महाराष्ट्र-गोवा सीमा पर ही रुक गया।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने पहले ही खतरनाक अल-नीनो मौसम पैटर्न के सक्रिय होने की चेतावनी जारी की थी। विशेषज्ञों के अनुसार यह पिछले 150 वर्षों में देखा गया सबसे प्रबल अल-नीनो प्रभाव हो सकता है। प्रशांत महासागर में बढ़ते तापमान के साथ-साथ अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में वर्षा के लिए आवश्यक कारक न्यूट्रल बने हुए हैं, जिससे स्थिति और विकट होती जा रही है।

बांध और जलाशयों की चिंताजनक स्थिति

ठाकरे गुट ने संपादकीय में बताया कि महाराष्ट्र के 3,028 छोटे-बड़े बांधों में जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे आ गया है। मुंबई को पेयजल आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का मात्र 12.48 प्रतिशत पानी शेष है। इसके चलते महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग ने कृषि के लिए जलापूर्ति पूरी तरह बंद कर दी है और शेष जल को केवल पेयजल के लिए सुरक्षित रखा गया है।

कृषि पर असर: बुवाई ठप, किसान चिंतित

संपादकीय के अनुसार, इस वर्ष मानसून की वर्षा न होने के कारण पूरे महाराष्ट्र में बुवाई का कार्य पूरी तरह रुका हुआ है। राज्य पिछले 40 से 50 वर्षों की सबसे भीषण गर्मियों में से एक से गुजर रहा है। भीषण हीटवेव ने खेती की जमीन को झुलसा दिया है, कुएँ सूख गए हैं और अनगिनत झीलें रिक्त हो चुकी हैं।

सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे छिटपुट बारिश के आधार पर जल्दबाजी में बुवाई न करें, बल्कि मिट्टी में पर्याप्त और लगातार नमी आने तक प्रतीक्षा करें। ठाकरे गुट ने कहा, 'बुवाई तो दूर की बात है, ग्रामीण इलाकों में मानसून से पहले की सामान्य कृषि तैयारियाँ भी नहीं दिख रहीं।' अनुभवी किसान आमतौर पर दो से चार बार भारी वर्षा होने के बाद ही बुवाई करते हैं, ताकि दोबारा बुवाई के आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

शिवसेना (यूबीटी) की माँग

ठाकरे गुट ने किसानों, नागरिकों और सरकार से इस आसन्न संकट से निपटने के लिए तत्काल तैयारी करने का आह्वान किया है। संपादकीय में कहा गया कि WMO का दीर्घकालिक देरी और कम वर्षा का अनुमान अब एक कठोर वास्तविकता में बदलता दिख रहा है, और इसे नजरअंदाज करना राज्य के लिए घातक साबित हो सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे सूखा-प्रवण क्षेत्र पहले से ही जल संकट की मार झेल रहे हैं। यदि मानसून और विलंबित रहा, तो राज्य में खाद्य उत्पादन, ग्रामीण रोजगार और पेयजल आपूर्ति — तीनों मोर्चों पर संकट गहरा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और 12.48% जलाशय स्तर के साथ मुंबई जैसे महानगर की आपूर्ति भी खतरे में है। बांधों में 25% जल और बुवाई पूरी तरह ठप — यह संयोजन खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार दोनों के लिए दोहरी मार है, जिसे महज मौसम की अनिश्चितता कहकर नहीं टाला जा सकता।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में सूखे का खतरा क्यों मंडरा रहा है?
15 जून तक महाराष्ट्र में मानसून नहीं पहुँचा है और राज्य के 3,028 बांधों में जलस्तर 25% तक गिर चुका है। भीषण हीटवेव, कुओं का सूखना और झीलों का खाली होना स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।
अल-नीनो का महाराष्ट्र के मानसून पर क्या असर है?
विशेषज्ञों के अनुसार यह पिछले 150 वर्षों का सबसे प्रबल अल-नीनो प्रभाव हो सकता है। प्रशांत महासागर में बढ़ते तापमान और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी में न्यूट्रल मौसम-कारकों ने मानसून की गति को 6 जून के बाद अचानक धीमा कर दिया।
मुंबई के जलाशयों में कितना पानी बचा है?
मुंबई को पेयजल आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का मात्र 12.48% पानी शेष है। इसके चलते जल संसाधन विभाग ने कृषि जलापूर्ति बंद कर दी है और बचा पानी केवल पीने के लिए सुरक्षित रखा गया है।
महाराष्ट्र के किसानों पर इस सूखे का क्या प्रभाव पड़ेगा?
मानसून न आने से पूरे महाराष्ट्र में बुवाई ठप है और ग्रामीण इलाकों में कामकाज बंद पड़ा है। सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे छिटपुट बारिश पर निर्भर होकर जल्दबाजी में बुवाई न करें, बल्कि मिट्टी में पर्याप्त नमी आने तक प्रतीक्षा करें।
शिवसेना (यूबीटी) ने इस संकट पर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में किसानों, नागरिकों और सरकार से तत्काल तैयारी करने का आह्वान किया। पार्टी ने कहा कि WMO की पूर्व-चेतावनियाँ सटीक साबित हो रही हैं और इस संकट को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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