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महाराष्ट्र में 15 जून तक व्यापक मानसूनी बारिश की संभावना नहीं, किसान बुवाई में जल्दबाजी न करें

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महाराष्ट्र में 15 जून तक व्यापक मानसूनी बारिश की संभावना नहीं, किसान बुवाई में जल्दबाजी न करें

सारांश

महाराष्ट्र में मानसून अभी सिर्फ दक्षिण कोंकण तक पहुँचा है और 15 जून तक व्यापक वर्षा की उम्मीद नहीं है। विदर्भ में तापमान 40°C के पार जाने का अनुमान है। कृषि विभाग ने किसानों को छिटपुट बारिश देखकर बुवाई न शुरू करने की सख्त हिदायत दी है।

मुख्य बातें

दक्षिण-पश्चिम मानसून सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी तक पहुँचा, 9 जून तक मध्यम से भारी बारिश का अनुमान।
15 जून 2026 तक महाराष्ट्र में व्यापक मानसूनी वर्षा की संभावना नहीं।
विदर्भ और खानदेश में तापमान 40°C से ऊपर, मराठवाड़ा में 35–40°C रहने का अनुमान।
कृषि एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने किसानों को छिटपुट बारिश पर बुवाई न करने की सलाह दी।
बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, ट्रांसफार्मर और खुले तारों से दूर रहने की अपील।

दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के दक्षिण कोंकण क्षेत्र तक पहुँच चुका है, लेकिन मौसम विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार कम से कम 15 जून 2026 तक पूरे राज्य में व्यापक और संतोषजनक मानसूनी वर्षा की संभावना नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए कृषि एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने किसानों को खरीफ बुवाई में जल्दबाजी न करने की स्पष्ट सलाह दी है।

मानसून की मौजूदा स्थिति

मौसम विभाग के अनुसार मानसून अभी सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिलों के कुछ हिस्सों तक सीमित है। 9 जून तक इन क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है। हालाँकि, मानसून की आगे बढ़ने की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी रहने की संभावना है।

विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में क्या होगा

पूर्वानुमान के मुताबिक 15 जून तक विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में दोपहर बाद बादल छाने और गरज-चमक के साथ छिटपुट बारिश हो सकती है। लेकिन यह वर्षा इतनी व्यापक नहीं होगी कि बड़े पैमाने पर खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बन सकें। यह ऐसे समय में आया है जब किसान खरीफ सीज़न की तैयारी में लगे हैं और बुवाई के लिए पर्याप्त नमी का इंतज़ार कर रहे हैं।

गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा

मौसम विभाग ने बताया है कि कम से कम 12 जून तक अधिकतम तापमान सामान्य से ऊँचा रह सकता है। विदर्भ और खानदेश में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने का अनुमान है, जबकि मराठवाड़ा में यह 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में मानसून की देरी के कारण किसानों को बुवाई के समय का सटीक आकलन करने में कठिनाई होती रही है।

किसानों को सलाह

कृषि एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने किसानों से अपील की है कि केवल गरज-चमक या हल्की बारिश के आधार पर बुवाई शुरू न करें। अधिकारियों ने कहा है कि व्यापक मानसूनी वर्षा का इंतज़ार करना ज़रूरी है ताकि बीज और मेहनत दोनों की बर्बादी से बचा जा सके। मौसम की स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है और किसानों को समय-समय पर अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

बिजली कड़कने पर नागरिकों को सावधानी की अपील

अधिकारियों ने नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, टिन शेड, विद्युत ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभों और खुले बिजली के तारों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अपडेट पर नज़र रखना सभी के लिए ज़रूरी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

या इस बार फसल बीमा और वैकल्पिक सिंचाई सहायता की सक्रिय व्यवस्था भी की जाएगी। गर्मी और देरी का यह संयोग उन किसानों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जो पहले से कर्ज़ में हैं। बिना ठोस सहायता तंत्र के, 'इंतज़ार करें' की सलाह अधूरी है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में मानसून कब तक पूरे राज्य में सक्रिय होगा?
मौसम विभाग के अनुसार कम से कम 15 जून 2026 तक राज्य में व्यापक मानसूनी वर्षा की संभावना नहीं है। अभी मानसून केवल सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिलों तक पहुँचा है और आगे बढ़ने की गति धीमी है।
किसानों को खरीफ बुवाई के लिए कब तक इंतज़ार करना चाहिए?
कृषि एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल गरज-चमक या छिटपुट बारिश के आधार पर बुवाई शुरू न करें। व्यापक और संतोषजनक मानसूनी वर्षा का इंतज़ार करना ज़रूरी है ताकि फसल को पर्याप्त नमी मिल सके।
विदर्भ और मराठवाड़ा में तापमान कितना रहेगा?
मौसम विभाग के अनुसार विदर्भ और खानदेश में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है, जबकि मराठवाड़ा में यह 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। यह स्थिति कम से कम 12 जून तक बनी रह सकती है।
बिजली कड़कने के दौरान क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
अधिकारियों ने सलाह दी है कि बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, टिन शेड, विद्युत ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभों और खुले बिजली के तारों के पास खड़े होने से बचें। खुले मैदान में काम कर रहे किसानों और मज़दूरों को विशेष सतर्कता बरतने की ज़रूरत है।
दक्षिण कोंकण में मानसून कब आया और आगे क्या होगा?
दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के दक्षिण कोंकण क्षेत्र में पहुँच चुका है और 9 जून तक सिंधुदुर्ग व रत्नागिरी में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। हालाँकि, राज्य के शेष हिस्सों में मानसून के विस्तार में अभी समय लगेगा।
राष्ट्र प्रेस
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