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महाराष्ट्र में खरीफ बुआई 59% तक पहुँची, पर पिछले साल के 82% से काफी पीछे

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महाराष्ट्र में खरीफ बुआई 59% तक पहुँची, पर पिछले साल के 82% से काफी पीछे

सारांश

जून में अल नीनो की मार और कमज़ोर मानसून के बाद जुलाई की बारिश ने महाराष्ट्र के किसानों को राहत दी, पर बुआई अभी भी पिछले साल से 23 फीसद पीछे है। विदर्भ आगे, कोंकण और पुणे पिछड़े — और सरकार सूखे की तैयारी में जुट गई है।

मुख्य बातें

12 जुलाई 2026 तक महाराष्ट्र में 84.61 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुआई, औसत रकबे का 59% ।
पिछले वर्ष इसी समय तक 1.18 करोड़ हेक्टेयर यानी 82% बुआई हो चुकी थी — इस साल 23 प्रतिशत का अंतर।
बुआई में पिछड़ने की प्रमुख वजह अल नीनो का प्रभाव और जून में अपर्याप्त वर्षा।
अमरावती मंडल ( 81% ) सबसे आगे; कोंकण , पुणे और कोल्हापुर अभी पीछे।
कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने किसानों को जल्दबाज़ी में बुआई न करने की सलाह दी; फार्म पॉन्ड के लिए सहायता बढ़ाने का निर्देश।
फसल नुकसान का पंचनामा तेज़ी से जारी; प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता की योजना अंतिम चरण में।

महाराष्ट्र में 12 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की बुआई 84.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पूरी हो चुकी है, जो राज्य के औसत खरीफ रकबे का 59 प्रतिशत है। जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून के पुनः सक्रिय होने से बुआई की रफ्तार में तेज़ी आई, लेकिन पिछले वर्ष इसी अवधि तक 1.18 करोड़ हेक्टेयर यानी 82 प्रतिशत रकबे में बुआई हो चुकी थी — यह अंतर राज्य के कृषि विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

बुआई में देरी की वजह

कृषि विभाग के अनुसार, जून 2026 में पर्याप्त वर्षा न होने के कारण जुलाई की शुरुआत तक राज्य में केवल 28 प्रतिशत बुआई ही संभव हो पाई थी। विभाग का कहना है कि इस साल बुआई में पिछड़ने की प्रमुख वजह अल नीनो का प्रभाव है, जिसने मानसून की समयबद्धता और वितरण दोनों को प्रभावित किया।

जुलाई के पहले हफ्ते में मानसून की वापसी के बाद किसानों ने तेज़ी से खेतों में उतरना शुरू किया, जिससे बुआई का प्रतिशत 28 से बढ़कर 59 तक पहुँचा। हालाँकि, यह उछाल भी पिछले साल के आँकड़ों की बराबरी करने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।

मंडलवार स्थिति

कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, विदर्भ का अमरावती मंडल खरीफ बुआई में राज्य में सबसे आगे है, जहाँ औसत रकबे के 81 प्रतिशत हिस्से में बुआई पूरी हो चुकी है। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर (65%), लातूर (63%), नासिक (56%) और नागपुर (53%) का स्थान है।

वहीं, कोंकण, पुणे और कोल्हापुर मंडल अभी भी पीछे हैं। कोंकण में मानसून की शुरुआत में अनियमित वर्षा के कारण धान की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हुई — जून के पहले सप्ताह में बोई गई धान की पौध बारिश की कमी से सूख गई और किसानों को जुलाई में नर्सरी में दोबारा बुआई करनी पड़ी।

सरकार और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

कृषि विभाग के निदेशक रफीक नाइकवाड़ी ने बताया कि कोंकण में बुआई का प्रतिशत तब तक कम दिखाई देगा, जब तक नए धान के पौधे बड़े होकर रोपाई के लिए तैयार नहीं हो जाते। उन्होंने कहा कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में तटीय इलाकों में बुआई और रोपाई का काम तेज़ होने की उम्मीद है।

कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने किसानों से अपील की कि वे जल्दबाज़ी में बुआई न करें और अच्छी तथा लगातार बारिश का इंतज़ार करें। उन्होंने चेतावनी दी कि छिटपुट बारिश के बाद जल्दी बुआई करने से, यदि बाद में लंबे समय तक वर्षा न हो, तो फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। विभाग किसानों को कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली और सूखा-प्रतिरोधी फसलें उगाने की सलाह दे रहा है।

राहत और तैयारी के उपाय

बारिश के दो दौरों के बीच लंबे अंतराल से हुए नुकसान को देखते हुए कृषि मंत्री भरणे ने खेत तालाबों (फार्म पॉन्ड) के लिए सहायता बढ़ाने पर ज़ोर दिया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को वर्षा जल संचयन के लिए ज़रूरी सामग्री — विशेषकर प्लास्टिक लाइनिंग शीट — जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए।

मंत्री ने बताया कि प्रशासन संभावित लंबे सूखे से निपटने की तैयारी में जुटा है, जिसमें संसाधनों का सही वितरण, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है। फसल नुकसान के आकलन (पंचनामा) का काम भी तेज़ी से चलाया जा रहा है और प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है — खासकर वर्षा पर निर्भर उन किसानों के लिए जो आर्थिक तंगी और कर्ज़ की समस्या से जूझ रहे हैं।

कृषि विभाग ने सभी जिला और स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बुआई के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनते ही किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक की कमी न हो। यह पहल उन किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो देर से बुआई की स्थिति में हैं और मौसम की अनिश्चितता के बीच हर दिन का हिसाब रख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और जब जून सूखा जाता है तो किसान कर्ज़ के दुष्चक्र में फँस जाते हैं — यह 2018 और 2023 में भी देखा जा चुका है। सरकार का फार्म पॉन्ड और बीज-उर्वरक आपूर्ति पर ज़ोर सही दिशा में है, लेकिन असली सवाल यह है कि पंचनामा और मुआवज़ा कितनी जल्दी ज़मीन तक पहुँचता है — जहाँ अक्सर देरी ही किसान की सबसे बड़ी दुश्मन बनती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में 2026 में खरीफ बुआई की ताज़ा स्थिति क्या है?
12 जुलाई 2026 तक महाराष्ट्र में 84.61 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुआई हो चुकी है, जो औसत रकबे का 59 प्रतिशत है। पिछले साल इसी समय तक 1.18 करोड़ हेक्टेयर यानी 82 प्रतिशत बुआई पूरी हो चुकी थी।
इस साल खरीफ बुआई में देरी क्यों हुई?
कृषि विभाग के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव और जून 2026 में पर्याप्त वर्षा न होने के कारण बुआई पिछड़ी। जुलाई की शुरुआत तक केवल 28 प्रतिशत बुआई हो पाई थी, जो जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून सक्रिय होने के बाद 59 प्रतिशत तक पहुँची।
महाराष्ट्र के किस मंडल में खरीफ बुआई सबसे अच्छी है?
विदर्भ का अमरावती मंडल 81 प्रतिशत बुआई के साथ राज्य में सबसे आगे है। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर (65%), लातूर (63%), नासिक (56%) और नागपुर (53%) का स्थान है, जबकि कोंकण, पुणे और कोल्हापुर अभी पीछे हैं।
कोंकण में धान की बुआई क्यों प्रभावित हुई?
कोंकण में मानसून की शुरुआत में बारिश अनियमित रही, जिससे जून में बोई गई धान की पौध सूख गई। किसानों को जुलाई में नर्सरी में दोबारा बुआई करनी पड़ी, इसलिए कृषि निदेशक रफीक नाइकवाड़ी के अनुसार जुलाई के दूसरे पखवाड़े तक वहाँ बुआई का प्रतिशत कम दिखाई देगा।
प्रभावित किसानों के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने फार्म पॉन्ड के लिए सहायता बढ़ाने और प्लास्टिक लाइनिंग शीट जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। फसल नुकसान का पंचनामा तेज़ी से किया जा रहा है और प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने की योजना अंतिम रूप ले रही है।
राष्ट्र प्रेस
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