टोक्यो में 8वीं भारत-जापान रक्षा नीति वार्ता, हिंद-प्रशांत में नियम-आधारित व्यवस्था की प्रतिबद्धता दोहराई
सारांश
मुख्य बातें
भारत और जापान के बीच 13 जुलाई 2025 को टोक्यो में 8वीं भारत-जापान रक्षा नीति वार्ता संपन्न हुई, जिसमें दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता एक बार फिर स्पष्ट रूप से दोहराई। इस वार्ता की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और जापान के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप रक्षा मंत्री कानो कोजी ने की।
वार्ता के प्रमुख बिंदु
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों पक्षों ने पिछली रक्षा नीति वार्ता के बाद द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की। भारत-जापान विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता भी इस अवसर पर दोहराई गई। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान पर आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था को शांति, सुरक्षा और स्थिरता की नींव बताया।
सहयोग के नए क्षेत्र
बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त मुख्यालयों के बीच सहयोग, समुद्री सुरक्षा, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग तथा संस्थागत संपर्कों को गहरा करने पर भी चर्चा हुई।
उच्च स्तरीय द्विपक्षीय संवाद
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने टोक्यो में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी से भी भेंट की। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से शुभकामनाएँ प्रेषित कीं और जापानी रक्षा मंत्री को शीघ्र भारत आने का निमंत्रण दिया। बैठक में इस वर्ष प्रस्तावित मंत्रिस्तरीय यात्राओं तथा भारत-जापान '2 प्लस 2' वार्ता से संभावित परिणामों पर भी विचार किया गया।
प्रधानमंत्री ताकाइची की यात्रा के निर्णयों को आगे बढ़ाना
यह ऐसे समय में आया है जब हाल ही में जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की भारत यात्रा के दौरान लिए गए निर्णयों को ज़मीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज़ हो रही है। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और रक्षा औद्योगिक साझेदारी पर व्यापक और सार्थक विचार-विमर्श किया। गौरतलब है कि यह भारत-जापान रक्षा नीति वार्ता की 8वीं कड़ी है, जो दोनों देशों के बीच संस्थागत रक्षा संवाद की निरंतरता को दर्शाती है।
श्रद्धांजलि और सामरिक संदेश
अपने दौरे की शुरुआत में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने टोक्यो स्थित आत्मरक्षा बल स्मारक शिला पर पुष्पचक्र अर्पित कर जापानी रक्षा बल के उन सैनिकों और अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत-जापान का बढ़ता रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत में सामरिक संतुलन को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दोनों देशों ने रक्षा संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की साझा इच्छाशक्ति के साथ इस वार्ता का समापन किया।