भारत-जापान विशेष साझेदारी को नई दिशा: मोदी-ताकाइची वार्ता में रक्षा, AI और ₹10 ट्रिलियन येन निवेश पर बड़े फैसले
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने 3 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय शिखर वार्ता की, जिसमें रक्षा सह-विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार निवेश समेत कई अहम क्षेत्रों में ऐतिहासिक समझौते किए गए। तीन दिवसीय भारत दौरे पर आईं ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं, और उनकी यह यात्रा दोनों देशों की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम और समझौते
संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "वैश्विक उथल-पुथल के आज के माहौल में आपसी विश्वास हमारा सबसे बड़ा रणनीतिक एसेट है, और भारत-जापान की साझेदारी इस कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है।" उन्होंने ताकाइची को नारा प्रीफेक्चर से आने वाली नेता बताया, जो भारत-जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों ने नेवल रेडियो एंटीना के पहले भारत-जापान सह-विकास परियोजना पर समझौता किया। मोदी के अनुसार यह परियोजना दोनों देशों की रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी में एक नया अध्याय खोलेगी और क्षेत्रीय शांति तथा समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगी।
AI और प्रौद्योगिकी साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि दोनों देशों ने AI के क्षेत्र में एक साझा बयान जारी किया है। भारतीय AI इकोसिस्टम के प्रमुख संस्थानों ने अपने जापानी साझेदारों के साथ समझौते किए हैं। उनके अनुसार, "जापान की प्रिसिजन प्रौद्योगिकी और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता का संगम वैश्विक AI विकास को नई गति और शक्ति देगा।" इसके अतिरिक्त, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैटेरियल्स में सहयोग के लिए आर्थिक सुरक्षा का संयुक्त रोडमैप तैयार किया गया है।
निवेश और आर्थिक सहयोग
मोदी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक नए व्यापारिक समझौते हुए हैं, जिनसे भारत में 10 अरब डॉलर से अधिक जापानी निवेश आने की उम्मीद है। दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश और भारत में जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। वित्तीय सेवा एजेंसियों के बीच हुए समझौते से पूंजी प्रवाह और सुगम होगा।
ऊर्जा सुरक्षा और हरित भविष्य
इंडिया-जापान बायोगैस इनिशिएटिव के तहत भारत में 1,000 बायोगैस और ऑर्गेनिक खाद प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जो सरकार की गोवर्धन पहल को और मजबूत करेंगे। इसके अलावा, बैटरी टेक्नोलॉजी, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा में सहयोग को भी विस्तार दिया जाएगा। फार्मा, मेडिकल उपकरण और बायोटेक क्षेत्र में हुए समझौतों से वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में योगदान का लक्ष्य रखा गया है।
लोगों के बीच संपर्क और भविष्य की राह
दोनों नेताओं ने टैलेंट मोबिलिटी, स्किलिंग और टेक्निकल इंटर्नशिप प्रोग्राम के अवसर बढ़ाने पर सहमति जताई। भारत-जापान नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत ऑटोमोटिव क्षेत्र की सफलता को शिपबिल्डिंग, एविएशन और लॉजिस्टिक्स में दोहराने की योजना है। उल्लेखनीय है कि अगले वर्ष दोनों देश अपने कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे, जिसे पर्यटन और क्रिएटिव इकोनॉमी सहयोग से और प्रगाढ़ बनाया जाएगा।