जापानी PM ताकाइची का भारत दौरा: 'भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक ज़रूरी'
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने 1 जुलाई 2026 को टोक्यो में भारत रवाना होने से पूर्व आयोजित प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत के साथ सहयोग का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। जापानी कैबिनेट के जनसंपर्क कार्यालय ने आधिकारिक एक्स अकाउंट के माध्यम से उनके वक्तव्य को साझा किया।
ताकाइची के मुख्य बयान
प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्थिति में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच, भारत के साथ सहयोग का महत्व पहले से कहीं अधिक हो गया है। भारत और जापान मौलिक मूल्यों तथा रणनीतिक हितों को साझा करते हैं और यही हमारी साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।" उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने पर विशेष बल दिया जाएगा।
व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी
इस यात्रा में जापान के कारोबारी जगत के 150 से अधिक प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। इसका उद्देश्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से भारत-जापान संबंधों का दायरा व्यापक बनाना है। ताकाइची ने कहा कि निवेश, व्यापार, बुनियादी ढाँचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और मज़बूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएँगे।
16वाँ भारत-जापान शिखर सम्मेलन
जापानी प्रधानमंत्री बुधवार को तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुँच रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। इस दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता करेंगी और दोनों नेता 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा
शिखर सम्मेलन के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्य उपस्थिति के मद्देनज़र अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर सहमत हैं।
आगे की राह
ताकाइची ने विश्वास जताया कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी और एक मज़बूत व टिकाऊ आर्थिक साझेदारी का निर्माण होगा। यह दौरा भारत-जापान संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।