जापान की PM सनाए ताकाइची आज दिल्ली पहुंचीं, 16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में होंगी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची 1 जुलाई 2026 को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचीं। 1 से 3 जुलाई तक चलने वाली इस यात्रा का केंद्रबिंदु 16वाँ भारत-जापान शिखर सम्मेलन है, जिसमें वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यह ताकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
यात्रा की पृष्ठभूमि
ताकाइची प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत निमंत्रण पर भारत आ रही हैं। यह दौरा अगस्त 2025 में आयोजित 15वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन के लिए मोदी की टोक्यो यात्रा के बाद हो रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) के बयान के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों की 'विशेष रणनीतिक व वैश्विक साझेदारी' को और सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
गौरतलब है कि इससे पहले 16 जून को फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और ताकाइची की मुलाकात हो चुकी है। उस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश को प्राथमिकता देते हुए द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने पर सहमति जताई थी।
शिखर सम्मेलन का एजेंडा
MEA के बयान के अनुसार, शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा होगी और उन्हें मज़बूत करने पर वार्ता होगी। इसके अलावा, दोनों पक्ष क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिनमें इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता प्रमुख विषय रहेगा।
मई में जापान के विदेश मंत्री तोशीमित्सु मोतेगी की दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने निवेश, नवाचार, आर्थिक सुरक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क के क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। मोतेगी ने कहा था कि 'अगले 10 वर्षों के जापान-भारत संयुक्त विजन' के आधार पर कई पहल आकार ले रही हैं।
रणनीतिक साझेदारी की ज़मीन
भारत और जापान के बीच 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' का ढाँचा दशकों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव पर टिका है। भारत की एक्ट-ईस्ट पॉलिसी, सागर के सिद्धांत पर आधारित इंडो-पैसिफिक विजन और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव — तीनों जापान की 'स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक' नीति के साथ सहजता से मेल खाते हैं।
जापानी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि दोनों पक्ष एक मज़बूत और समृद्ध इंडो-पैसिफिक के निर्माण में सहयोग करने पर सहमत हैं और आर्थिक विकास के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी मिलकर काम करेंगे।
आगे क्या
तीन दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय समझौतों और संयुक्त घोषणाओं की उम्मीद है। यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन और इंडो-पैसिफिक में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत-जापान साझेदारी की रणनीतिक अहमियत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।