पीएम मोदी और जापानी पीएम ताकाइची की द्विपक्षीय वार्ता, भारत-जापान स्पेशल स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप के नए अध्याय की शुरुआत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने 3 जुलाई 2025 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के तहत द्विपक्षीय वार्ता की और एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। मोदी ने ताकाइची को 'छोटी बहन' कहकर संबोधित करते हुए इस यात्रा को दोनों देशों की स्पेशल स्ट्रेटजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप के नए अध्याय की शुरुआत बताया।
शिखर सम्मेलन का मुख्य घटनाक्रम
बैठक से पहले राष्ट्रपति भवन में ताकाइची का औपचारिक स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यह जापानी प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी भारत की पहली यात्रा है। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री भी हैं।
दोनों नेताओं के बीच निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय-वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और दोनों देश अपनी आर्थिक व सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहते हैं।
एआई और तकनीकी साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रेस वार्ता में कहा, 'प्रधानमंत्री ताकाइची और मेरा विश्वास है कि टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप हमारे सहयोग का सबसे मजबूत स्तंभ बनेगी। इसी विजन को साकार करने के लिए, आज एआई के क्षेत्र में हमने एक ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया है।'
मोदी ने आगे कहा, 'जापान की प्रीसिजन टेक्नोलॉजी और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता का संगम वैश्विक एआई विकास को नई गति और शक्ति देगा।' दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में पहले को-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर भी समझौता किया गया।
निवेश और आर्थिक सहयोग
मोदी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में करीब 120 नए व्यावसायिक समझौते हुए हैं, जिनसे भारत में 10 बिलियन डॉलर से अधिक जापानी निवेश आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ऑटोमोटिव से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक जापान दशकों से भारत की विकास यात्रा का अहम साझीदार रहा है।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और जापान विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और एक स्वतंत्र, समृद्ध तथा नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक दोनों की साझा प्राथमिकता है।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ
मोदी ने उल्लेख किया कि ताकाइची नारा प्रीफेक्चर से आती हैं, जो साझा बौद्ध विरासत का केंद्र है। उन्होंने कहा कि जी7 में उन्होंने इस साझेदारी को उथल-पुथल के माहौल में एक वैश्विक स्ट्रेटजिक एसेट बताया था और भारत-जापान की साझेदारी इस कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है।
आगे की योजना
अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान ताकाइची इंडिया-जापान बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगी, जहाँ दोनों देशों के बीच निवेश और आर्थिक सहयोग को और विस्तार देने पर केंद्रित चर्चा होगी। यह शिखर सम्मेलन भारत-जापान संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाने का अवसर माना जा रहा है।