जापान की PM साने ताकाइची नई दिल्ली पहुंचीं, 16वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में PM मोदी से होगी वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1 जुलाई 2026 को बुधवार की शाम आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचीं। उनके आगमन पर केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है, जो दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दौरे का एजेंडा
ताकाइची का यह तीन दिवसीय दौरा है, जिसके दौरान 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्च स्तरीय वार्ता प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की आधिकारिक यात्रा पर बहुत-बहुत स्वागत है। यह दौरा भारत और जापान के बीच स्पेशल स्ट्रेटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने की दिशा में एक जरूरी कदम है।' गौरतलब है कि भारत और जापान के बीच यह साझेदारी पिछले एक दशक में लगातार गहरी होती रही है।
ताकाइची के प्रस्थान-पूर्व वक्तव्य
भारत रवाना होने से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में साने ताकाइची ने कहा कि 'मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के साथ सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश 'साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक हितों के आधार पर मजबूत साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं।' ताकाइची ने आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विशेष जोर देने की बात कही।
आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
जापानी प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि निवेश, व्यापार, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा से सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की संयुक्त भागीदारी के जरिए एक टिकाऊ आर्थिक साझेदारी का निर्माण होगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को लेकर दोनों देशों के हित तेजी से अभिसरित हो रहे हैं।
आगे क्या
तीन दिवसीय दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों और घोषणाओं की संभावना है। शिखर सम्मेलन के परिणाम भारत-जापान संबंधों की अगली दिशा तय करेंगे — विशेष रूप से सेमीकंडक्टर और हिंद-प्रशांत सुरक्षा ढांचे के संदर्भ में।