भारत-जापान शिखर सम्मेलन: रक्षा तकनीक हस्तांतरण और UNICORN परियोजना पर सहमति, टोक्यो में होगी 2+2 बैठक
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने 2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद रक्षा साझेदारी को नई ऊँचाई देने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने रक्षा उपकरण एवं तकनीक हस्तांतरण से जुड़े जापान के तीन सिद्धांतों की समीक्षा का स्वागत किया और द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।
शिखर सम्मेलन के प्रमुख निर्णय
दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपने रक्षा और विदेश मंत्रियों को इस वर्ष के अंत तक टोक्यो में 2+2 मंत्रिस्तरीय बैठक का चौथा दौर आयोजित करने का निर्देश दिया। यह बैठक दोनों देशों के बीच सामरिक संवाद की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।
संयुक्त बयान में यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना (UNICORN) परियोजना के शेष तकनीकी मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति बनने की जानकारी दी गई। दोनों नेताओं ने उम्मीद जताई कि इस परियोजना को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा और रक्षा उपकरण एवं तकनीक के क्षेत्र में अन्य परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के नए रास्ते तलाशे जाएंगे।
समुद्री सुरक्षा और सैन्य अभ्यास
दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को व्यापक बनाने पर सहमति जताई। इसके अंतर्गत संयुक्त सैन्य अभ्यास, उपग्रह-आधारित समुद्री निगरानी, नौसैनिक जहाजों की मरम्मत एवं रखरखाव (MRO), तथा 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा उत्पादन सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।
गौरतलब है कि नौसैनिक अभ्यास JIMEX-25 का सफल आयोजन हो चुका है, जिसमें जापान की दोनों सेवाओं ने संयुक्त रूप से भाग लिया। भारत ने 2026 में विशाखापट्टनम में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में जापान की भागीदारी का भी स्वागत किया।
क्वाड सहयोग को नई प्रतिबद्धता
दोनों नेताओं ने क्वाड के तहत हो रही प्रगति का स्वागत किया और व्यावहारिक सहयोग को और सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त बयान के अनुसार, उन्होंने क्वाड सहयोग के चार स्तंभों — समुद्री एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा; आर्थिक समृद्धि एवं सुरक्षा (जिसमें ज़रूरी खनिज शामिल हैं); महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकी; तथा मानवीय सहायता एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया — के महत्व को रेखांकित किया।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने अगला क्वाड नेताओं का शिखर सम्मेलन शीघ्र आयोजित कराने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
पिछले सम्मेलन से जुड़ाव
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-जापान संबंध रणनीतिक रूप से तेज़ी से प्रगाढ़ हो रहे हैं। दोनों नेताओं ने पिछले वार्षिक शिखर सम्मेलन में अपनाई गई सुरक्षा सहयोग संयुक्त घोषणा के आधार पर इस साझेदारी को और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा उपकरण हस्तांतरण के तीन सिद्धांतों की समीक्षा को विशेषज्ञ एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम मानते हैं, जो भविष्य में संयुक्त उत्पादन के द्वार खोल सकता है।
आगे की दिशा इस वर्ष टोक्यो में होने वाली 2+2 बैठक और UNICORN परियोजना के अंतिम रूप लेने पर निर्भर करेगी।