17 अगस्त 2026
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अर्बन नक्सल पर PM मोदी सही: पूर्व डीजीपी बृजलाल बोले, अब 'दिमागी नक्सलियों' पर नज़र ज़रूरी

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अर्बन नक्सल पर PM मोदी सही: पूर्व डीजीपी बृजलाल बोले, अब 'दिमागी नक्सलियों' पर नज़र ज़रूरी

सारांश

सशस्त्र नक्सलवाद के अंत के बाद अब 'दिमागी नक्सलियों' की बारी — पूर्व DGP बृजलाल का यह बयान PM मोदी के 'अर्बन नक्सल' वाले संदेश को राजनीतिक धार देता है और कांग्रेस, सपा पर एक साथ निशाना साधता है।

मुख्य बातें

पूर्व DGP व BJP राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने 16 अगस्त 2026 को PM मोदी के 'अर्बन नक्सल' बयान का पूर्ण समर्थन किया।
उनके अनुसार, 143 जिलों के 'रेड कॉरिडोर' का सपना टूट चुका है और सशस्त्र नक्सलवाद लगभग समाप्त हो गया है।
बृजलाल ने कहा कि अब विश्वविद्यालयों, NGO और सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय 'दिमागी नक्सली' बड़ी चुनौती हैं।
चिदंबरम के 'गर्व से अर्बन नक्सल' वाले कथित बयान को बृजलाल ने 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया।
अखिलेश यादव पर आरोप — अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण को 'नैरेटिव सेट करने की कोशिश' बताया।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का विरोध करने वालों को बृजलाल ने 'विकास-विरोधी' ताकत बताया।

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने 16 अगस्त 2026 को लखनऊ में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'अर्बन नक्सल' पर दिया गया बयान पूरी तरह सही है। उनके अनुसार, देश में सशस्त्र नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में सक्रिय तथाकथित 'दिमागी नक्सलियों' पर निगरानी रखना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पूर्व IPS अधिकारी बृजलाल ने इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम और समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तीखे निशाने साधे।

नक्सलवाद की समाप्ति और नई चुनौती

बृजलाल ने कहा कि एक समय नक्सलवादियों का देश के 20 प्रतिशत क्षेत्र पर प्रभाव था और करीब 143 जिलों को 'रेड कॉरिडोर' बनाने की योजना थी। उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों में न सड़कें बनने दी गईं, न सरकारी योजनाएँ पहुँच सकीं और न ही स्कूल खुल सके। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में और गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिबद्धता के साथ यह चुनौती समाप्त की गई। बृजलाल ने याद दिलाया कि शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था, और उनके अनुसार वह लक्ष्य हासिल कर लिया गया।

'दिमागी नक्सली' कौन हैं

बृजलाल ने कहा कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सली तो समाप्त हो गए, लेकिन एक और वर्ग अब भी सक्रिय है जिसे उन्होंने 'दिमागी नक्सली' कहा। उनके अनुसार ये लोग विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक, कवि, लेखक, समाजसेवी और NGO संचालक के रूप में काम करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग संवैधानिक संस्थाओं, न्यायालयों और सुरक्षा बलों के विरुद्ध अविश्वास फैलाने का प्रयास करते हैं, और पहले सशस्त्र नक्सलियों की फंडिंग में भी इनकी भूमिका रही। बृजलाल ने कहा कि रेड कॉरिडोर का सपना टूटने से ये तथाकथित 'दिमागी नक्सली' बौखलाए हुए हैं।

चिदंबरम के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के 'गर्व से अर्बन नक्सल हैं' वाले कथित बयान पर बृजलाल ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि चिदंबरम देश के गृह मंत्री रह चुके हैं और उन्होंने नक्सलवाद व आतंकवाद को करीब से देखा है। बृजलाल के अनुसार, ऐसे व्यक्ति का स्वयं को 'अर्बन नक्सल' कहना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कांग्रेस पर भी आरोप लगाया कि वह वही काम कर रही है जो 'अर्बन नक्सली' करते हैं।

अखिलेश यादव और ग्रेट निकोबार पर निशाना

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बृजलाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके लोधी समाज को भ्रमित करने का प्रयास किया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर वे श्रद्धांजलि देने नहीं गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि उसी स्थल के निकट पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा होने के बावजूद अखिलेश वहाँ नहीं रुके। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के संदर्भ में बृजलाल ने कहा कि यह परियोजना देश की अर्थव्यवस्था और नौसेना को मज़बूत करेगी, और मलक्का स्ट्रेट की निकटता इसे रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का इस परियोजना का विरोध करना चिंताजनक है।

आगे क्या

बृजलाल ने चेतावनी दी कि 'दिमागी नक्सली' किसी भी जन-आंदोलन में प्रवेश करके उसे हिंसक रूप देने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे देश की आर्थिक प्रगति बाधित हो। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस ख़तरे को पहचानकर जो संदेश दिया है, उसे जन-जन तक पहुँचाना ज़रूरी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार नक्सलवाद की समाप्ति को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सत्तारूढ़ दल के राज्यसभा सदस्य का राजनीतिक संदेश है — और यह अंतर महत्वपूर्ण है। 'दिमागी नक्सली' जैसी अपरिभाषित श्रेणी बनाना, जिसमें प्राध्यापक, लेखक और NGO कर्मी शामिल हों, असहमति की वैध आवाज़ों को राष्ट्र-विरोधी ठहराने का जोखिम उठाती है। नक्सलवाद की समाप्ति एक वास्तविक उपलब्धि हो सकती है, लेकिन उसकी आड़ में नागरिक समाज पर निगरानी को वैधता देने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है। मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को केवल BJP बनाम विपक्ष की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है, जबकि असली सवाल यह है कि 'दिमागी नक्सली' की परिभाषा कौन तय करेगा और उसकी जवाबदेही किसके प्रति होगी।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृजलाल ने 'दिमागी नक्सली' किसे कहा है?
बृजलाल के अनुसार 'दिमागी नक्सली' वे लोग हैं जो जंगलों में हथियार नहीं उठाते, बल्कि शहरों में प्राध्यापक, लेखक, कवि, समाजसेवी या NGO संचालक के रूप में काम करते हुए संवैधानिक संस्थाओं और सुरक्षा बलों के प्रति अविश्वास फैलाते हैं। उनका आरोप है कि ये लोग पहले सशस्त्र नक्सलियों की फंडिंग में भी शामिल थे।
क्या भारत में नक्सलवाद वाकई समाप्त हो गया है?
बृजलाल के अनुसार सशस्त्र नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और गृह मंत्री अमित शाह का 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य पूरा हो गया। हालाँकि, यह सरकार समर्थक पक्ष का दृष्टिकोण है; स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
पी. चिदंबरम के किस बयान पर विवाद हुआ?
वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कथित तौर पर कहा था कि वे 'गर्व से अर्बन नक्सल हैं।' बृजलाल ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि देश के पूर्व गृह मंत्री का ऐसा बयान देना उचित नहीं है।
अखिलेश यादव पर बृजलाल ने क्या आरोप लगाए?
बृजलाल ने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके लोधी समाज को भ्रमित करने की कोशिश की, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर वे श्रद्धांजलि देने नहीं गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि उसी स्थल के निकट पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा होने के बावजूद अखिलेश वहाँ नहीं रुके।
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का इस विवाद से क्या संबंध है?
बृजलाल ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना देश की अर्थव्यवस्था और नौसेना को मज़बूत करेगी। उन्होंने राहुल गांधी के इस परियोजना के विरोध को 'विकास-विरोधी' और 'चीन-समर्थक' रवैये से जोड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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