दिल्ली-एनसीआर की हवा 5 साल में सबसे साफ, सितंबर 2026 में AQI घटकर 102 पर
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार का सिलसिला सितंबर 2026 में एक महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुँचा — राजधानी ने इस महीने पिछले 5 वर्षों का सबसे कम मासिक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) दर्ज किया है। आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में दिल्ली का मासिक औसत AQI 102 रहा, जो पिछले किसी भी सितंबर की तुलना में सबसे कम है। यह प्रवृत्ति केवल एक महीने तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे वर्ष की वायु गुणवत्ता में व्यापक सुधार को दर्शाती है।
पाँच साल का तुलनात्मक विवरण
सितंबर माह के मासिक औसत AQI के आंकड़े बताते हैं कि 2022 में यह 104, 2023 में 108, 2024 और 2025 दोनों में 105 था। इस वर्ष 2026 में यह घटकर 102 पर आ गया है। यानी पाँच सालों की इस श्रृंखला में सबसे निचला स्तर इस बार दर्ज हुआ है। गौरतलब है कि 2023 सबसे खराब सितंबर था, और उसके बाद से लगातार सुधार देखा जा रहा है।
साफ हवा के दिनों में रिकॉर्ड वृद्धि
जनवरी से 28 सितंबर 2026 के बीच दिल्ली में 194 दिन ऐसे रहे जब दैनिक औसत AQI 200 से कम यानी 'मध्यम' श्रेणी में था — यह पिछले 5 वर्षों में सर्वाधिक है। तुलना के लिए, 2025 में यह संख्या 187 दिन, 2024 में 188 दिन, 2023 में 193 दिन और 2022 में महज 146 दिन थी। 2022 से 2026 के बीच साफ हवा के दिनों में 48 दिनों की वृद्धि उल्लेखनीय प्रगति है।
खराब हवा के दिनों में गिरावट
इसी अवधि में 'खराब से बेहद खराब प्लस' श्रेणी के दिनों की संख्या भी घटी है। जनवरी-सितंबर 2026 में ऐसे दिन केवल 79 रहे, जो पाँच वर्षों में सबसे कम है। 2025 और 2024 में यह आँकड़ा 86-86 दिन, 2023 में 80 दिन और 2022 में 127 दिन था। यह ऐसे समय में आया है जब सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियाँ ज़ोर पकड़ रही हैं।
PM2.5 स्तर में भी सुधार
सूक्ष्म कणों के सूचक PM2.5 के मामले में भी सुधार परिलक्षित हुआ है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच दिल्ली में PM2.5 का औसत 69 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। 2025 में भी यह 69 था, लेकिन 2024 में 81, 2023 में 73 और 2022 में 80 माइक्रोग्राम था। यानी 2022 के बाद से PM2.5 स्तर अपने निम्नतम पर है।
CAQM की प्रतिक्रिया और आगे की योजना
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने कहा है कि वह दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वित रूप से कार्य कर रहा है। आयोग के अनुसार आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयासों को और गति दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर-नवंबर में पराली जलाने के मौसम के आगमन से पहले यह सुधार कितना टिकाऊ रहता है, यही असली परीक्षा होगी।