दिल्ली का AQI 2026 में 8 वर्षों के निचले स्तर पर, जनवरी-मई औसत 211 दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है — वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मई 2026 के दौरान दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 211 रहा, जो कोविड-प्रभावित वर्ष 2020 को छोड़कर पिछले आठ वर्षों में सबसे कम है। यह आंकड़ा राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की एक सकारात्मक झलक प्रस्तुत करता है।
मुख्य आंकड़े: वर्षवार तुलना
CAQM द्वारा अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2026 का जनवरी-मई औसत AQI 211 रहा। तुलना के लिए — 2025 में यह 214, 2024 में 231, 2023 में 213, 2022 में 238, 2021 में 235, 2019 में 237 और 2018 में 243 था। कोविड वर्ष 2020 में असाधारण लॉकडाउन परिस्थितियों के कारण यह आंकड़ा 181 तक पहुँचा था, जिसे इस तुलना से अलग रखा गया है।
मई 2026 की हवा: दूसरा सबसे साफ महीना
केवल पाँच महीनों के औसत में ही नहीं, बल्कि मई 2026 में भी दिल्ली की हवा अपेक्षाकृत स्वच्छ रही। आयोग के अनुसार, मई 2026 का औसत AQI 157 दर्ज किया गया — 2020 और 2021 (जब यह 144 था) को छोड़कर यह पिछले आठ वर्षों में दूसरा सबसे निम्न स्तर है। मई 2025 में AQI 170, मई 2024 में 223, मई 2023 में 171, मई 2022 में 212, मई 2019 में 221 और मई 2018 में 217 था।
साफ दिनों की संख्या में भी बढ़ोतरी
2026 के पहले पाँच महीनों में दिल्ली में 75 दिन 'गुड टू मॉडरेट' श्रेणी के AQI वाले रहे। यह आंकड़ा 2025 में 70 दिन, 2024 में 75 दिन, 2023 में 74 दिन, 2022 में महज 37 दिन, 2021 में 59 दिन, 2019 में 59 दिन और 2018 में 44 दिन था। कोविड वर्ष 2020 में लॉकडाउन के कारण यह संख्या 98 दिन तक पहुँची थी। गौरतलब है कि 2022 की तुलना में 2026 में साफ दिनों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।
प्रयासों का असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में वाहन प्रदूषण, पराली दहन और औद्योगिक उत्सर्जन पर लगाम कसने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं। CAQM के आंकड़े संकेत देते हैं कि नियामक हस्तक्षेप और मौसम अनुकूलता के संयोजन से राजधानी की वायु गुणवत्ता में क्रमिक सुधार हो रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि AQI 211 अभी भी 'खराब' श्रेणी में आता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए सुधार की गति को और तेज करना आवश्यक है। आने वाले मानसून के महीनों में AQI में और गिरावट की संभावना है, लेकिन अक्टूबर-नवंबर की पराली सीजन असली परीक्षा होगी।