WCOG 2026: भारत में पहली बार विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सम्मेलन, नड्डा बोले — आयुष्मान भारत से 60 करोड़ लाभान्वित
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (WCOG 2026) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ अब तक 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पहुँच चुका है। भारत में पहली बार आयोजित हो रहे इस चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
सम्मेलन की पृष्ठभूमि और आयोजन
WCOG 2026 का आगाज़ 30 सितंबर को हुआ और यह 3 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस वर्ष सम्मेलन की थीम 'ट्रांसफॉर्मिंग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल हेल्थ, प्रिजर्विंग नेचर' रखी गई है। इसकी संयुक्त मेज़बानी इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (ISG) और वर्ल्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ऑर्गनाइजेशन (WGO) कर रहे हैं। इंडियन नेशनल एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ द लिवर (INASL), क्रोन्स एंड कोलाइटिस फाउंडेशन इंडिया (CCFI), इंडियन पैंक्रियाज क्लब (IPC) और इंडियन न्यूरोगैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड मोटिलिटी एसोसिएशन (INMA) भी सहयोगी संस्थाओं के रूप में शामिल हैं।
सम्मेलन में AIIMS के निदेशक प्रो. निखिल टंडन, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, WGO की अध्यक्ष डॉ. कैरोलिना ओलानो, WCOG की स्थानीय आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. गोविंद मखारिया और ISG के महासचिव डॉ. मैथ्यू फिलिप सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ मौजूद रहे।
आयुष्मान भारत की उपलब्धियाँ
नड्डा ने बताया कि सितंबर 2018 में शुरू की गई आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत अब तक 13 करोड़ से अधिक इलाज किए जा चुके हैं, जिन पर ₹2 लाख करोड़ से अधिक का स्वास्थ्य व्यय हुआ है। इसके अतिरिक्त, आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी योजना के दायरे में लाया गया है।
स्क्रीनिंग और निवारक स्वास्थ्य सेवाएँ
स्वास्थ्य मंत्री ने देशभर में फैले लगभग 1.86 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के नेटवर्क की भूमिका को रेखांकित किया, जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ जन-जन तक पहुँचाने में सहायक हैं। उन्होंने बताया कि 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मुँह, स्तन तथा सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग की जा रही है।
उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, अब तक हाई ब्लड प्रेशर के लिए 42 करोड़ से अधिक, डायबिटीज के लिए 42 करोड़, ओरल कैंसर के लिए 36 करोड़, ब्रेस्ट कैंसर के लिए 17 करोड़ और सर्वाइकल कैंसर के लिए 9 करोड़ से अधिक स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य और दवाओं की उपलब्धता
नड्डा ने बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार संस्थागत प्रसव 2015-16 में 79 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 90 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि 1990 से 2023 के बीच भारत में मातृ मृत्यु में 86 प्रतिशत, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु में 79 प्रतिशत और नवजात मृत्यु में 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
सस्ती दवाओं की उपलब्धता के संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का उल्लेख किया। उनके अनुसार देशभर में 20,149 से अधिक जन औषधि केंद्र कम कीमत पर जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे लोगों ने सामूहिक रूप से लगभग ₹45 हजार करोड़ की बचत की है। यह भी उल्लेखनीय है कि कुल स्वास्थ्य खर्च में आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च की हिस्सेदारी 2014-15 में 62 प्रतिशत से घटकर 2021-22 में 43.4 प्रतिशत रह गई है।
विशेषज्ञों की भूमिका और आगे की राह
नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में मिली उपलब्धियों के बावजूद नई चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर शोध और नवाचार ज़रूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में कार्यरत डॉक्टर और शोधकर्ता पेट तथा लीवर की बीमारियों और प्रमुख संक्रमणों से निपटने के लिए नए समाधान विकसित करेंगे। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और रोगी देखभाल में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाली प्रतिष्ठित हस्तियों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी प्रदान किए। सम्मेलन में वैज्ञानिक सत्र, व्याख्यान, कार्यशालाएँ, लाइव डेमॉन्स्ट्रेशन और शोध प्रस्तुतियाँ 3 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेंगी।