आयुष निर्यात: भारत समग्र स्वास्थ्य सेवा का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर — डॉ. अनुराग शर्मा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 1 जुलाई 2026 को आयोजित एक उच्चस्तरीय सरकारी-उद्योग विचार-विमर्श सत्र में आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष और सांसद डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि भारत समग्र स्वास्थ्य सेवा के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की मजबूत स्थिति में है। वाणिज्य भवन में आयोजित इस सत्र में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने आयुष क्षेत्र में भारत के वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ करने के लिए रोडमैप पर मंथन किया।
सत्र का उद्देश्य और भागीदारी
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के सहयोग से यह सत्र आयोजित किया। इसका विषय था — 'पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत के वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ बनाना: आयुष क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता, निर्यात और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।' सत्र में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ निर्यातक, निर्माता, लघु एवं मध्यम उद्यम, स्टार्टअप, शोधकर्ता, उद्योग संघ और राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मुख्य वक्ताओं के विचार
डॉ. अनुराग शर्मा ने अपने विशेष संबोधन में पारंपरिक चिकित्सा की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूत करने के लिए सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया।
वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि उद्देश्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय आयुष ब्रांडों का निर्माण करना है। उन्होंने भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौतों के नेटवर्क से उत्पन्न अवसरों का उल्लेख करते हुए उद्योग जगत को नवाचार, ब्रांडिंग, मूल्यवर्धन और गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने आयुष चिह्न और आयुर्वेद आहार जैसी प्रमुख पहलों के कार्यान्वयन में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपस्थिति को बेहतर बनाना अनिवार्य है।
चर्चा के प्रमुख विषय
विचार-विमर्श सत्र में WHO-GMP अनुपालन, आयुष गुणवत्ता चिह्न, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, चिकित्सा मूल्य यात्रा, निर्यात सुगमता उपाय और नियामक व बाजार पहुंच संबंधी चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में वैश्विक रुचि तेजी से बढ़ रही है।
सत्र का समापन एक संवादात्मक खुली चर्चा के साथ हुआ, जिसमें निर्यातकों, निर्माताओं, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स ने बाजार पहुंच में सुधार, नियामकीय सुगमता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर व्यावहारिक सुझाव साझा किए।
आगे की राह
इस सत्र से प्राप्त सिफारिशें भविष्य की नीतिगत पहलों और निर्यात प्रोत्साहन प्रयासों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। वाणिज्य विभाग, आयुष मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के संयुक्त प्रयासों से 'ब्रांड इंडिया आयुष' को वैश्विक पारंपरिक स्वास्थ्य इकोसिस्टम में और मजबूत करने की योजना है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानक-निर्धारण निकायों के सहयोग से भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के प्रयास भी जारी हैं।