पीयूष गोयल का लक्ष्य: भारत सालाना 1 करोड़ मेडिकल टूरिस्ट आकर्षित करे, पेश की 5-सूत्रीय योजना
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 7 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत हेल्थ ग्लोबल एक्सपो 2026 के उद्घाटन समारोह 'संजीवनी 2026' को संबोधित करते हुए भारत के चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्त्वाकांक्षी पाँच-सूत्रीय कार्य योजना प्रस्तुत की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा की तलाश में आने वाले 1 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को सालाना आकर्षित करने का लक्ष्य रखना चाहिए।
मुख्य घोषणाएँ और पाँच-सूत्रीय ढाँचा
गोयल ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं के प्रमुख वैश्विक प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने के लिए उच्चतम गुणवत्ता मानकों को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने पाँच प्राथमिकताएँ गिनाईं जो इस लक्ष्य को साकार करने की नींव बनेंगी।
पहली प्राथमिकता के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य सेवा कार्यबल के प्रशिक्षण और प्रमाणन पर बल दिया। उनके अनुसार, देखभालकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कुशल बनाना और प्रमाणित करना इस पूरे इकोसिस्टम की बुनियाद है।
हील इन इंडिया और नैतिक उपचार पैकेज
दूसरे बिंदु में गोयल ने अधिकाधिक अस्पतालों को 'हील इन इंडिया' गेटवे से जोड़ने और पारदर्शी व ईमानदार उपचार पैकेज तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अस्पतालों को नैतिक आचरण का कड़ाई से पालन करना होगा — "एक भी गलत कार्रवाई भारत की सद्भावना, व्यवसाय और विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा सकती है।"
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्वास्थ्य पर्यटन बाज़ार में थाईलैंड, सिंगापुर और तुर्की जैसे देश भारत से कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। ऐसे में पारदर्शिता और नैतिकता को ब्रांड-मूल्य के रूप में स्थापित करना रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
टेलीमेडिसिन और कैशलेस भुगतान की भूमिका
तीसरे बिंदु में मंत्री ने बीमाकर्ताओं और स्वास्थ्य-तकनीक कंपनियों से ऐसे उत्पाद और प्लेटफॉर्म विकसित करने का आग्रह किया जो रोगी की यात्रा को सहज बनाएँ। उन्होंने कैशलेस भुगतान और समय पर प्रतिपूर्ति की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया। साथ ही, टेलीकंसल्टेशन और टेलीमेडिसिन को चिकित्सा पर्यटन यात्रा के प्रारंभिक चरण के रूप में बड़े पैमाने पर अपनाने का सुझाव दिया।
NABH मानकों पर अनिवार्य अनुपालन
चौथे बिंदु में गोयल ने वैश्विक स्तर पर प्रदर्शनियाँ और प्रस्तुतियाँ आयोजित करने और अंतरराष्ट्रीय अस्पतालों के साथ सुविधाप्रदाताओं को जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABH) द्वारा सक्षम, सत्यापित और पैनलबद्ध अस्पतालों को ही विदेशी रोगियों के उपचार की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि "NABH को बिना किसी समझौते के उच्चतम मानकों को बनाए रखना होगा।"
टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तार और आगे की राह
पाँचवें और अंतिम बिंदु में गोयल ने राज्य सरकारों से अस्पतालों और कल्याण केंद्रों में गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने, अपने नेटवर्क का विस्तार करने और वैश्विक स्तर पर उनका विपणन करने का आग्रह किया। उन्होंने विशेष रूप से महानगरों से आगे टियर-2 और टियर-3 शहरों तक चिकित्सा पर्यटन के विस्तार की वकालत की, जिससे रोज़गार, अवसर और बुनियादी ढाँचे का सृजन हो सके और देश के घरेलू रोगियों के लिए भी स्वास्थ्य सेवा का स्तर ऊँचा उठे।
गौरतलब है कि भारत पहले से ही वैश्विक चिकित्सा पर्यटन सूचकांक में शीर्ष देशों में गिना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता की असमानता और जागरूकता की कमी अभी भी बड़ी बाधाएँ हैं। यदि यह पाँच-सूत्रीय योजना धरातल पर उतरती है, तो भारत के स्वास्थ्य पर्यटन क्षेत्र में आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल सकते हैं।