9 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीयूष गोयल का लक्ष्य: भारत सालाना 1 करोड़ मेडिकल टूरिस्ट आकर्षित करे, पेश की 5-सूत्रीय योजना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीयूष गोयल का लक्ष्य: भारत सालाना 1 करोड़ मेडिकल टूरिस्ट आकर्षित करे, पेश की 5-सूत्रीय योजना

सारांश

पीयूष गोयल ने भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सेवा का प्रवेश द्वार बनाने का संकल्प लिया — सालाना 1 करोड़ मेडिकल टूरिस्ट का लक्ष्य, NABH अनुपालन की अनिवार्यता, और टेलीमेडिसिन से लेकर टियर-3 शहरों तक का विस्तार। यह महज़ घोषणा नहीं, बल्कि भारत के स्वास्थ्य पर्यटन इकोसिस्टम को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 7 सितंबर 2026 को भारत हेल्थ ग्लोबल एक्सपो 2026 में भारत के चिकित्सा पर्यटन के लिए 5-सूत्रीय कार्य योजना पेश की।
भारत को सालाना 1 करोड़ गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा पर्यटक आकर्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
केवल NABH द्वारा सत्यापित और पैनलबद्ध अस्पतालों को विदेशी रोगियों के उपचार की अनुमति देने का प्रस्ताव।
'हील इन इंडिया' गेटवे से अधिकाधिक अस्पतालों को जोड़ने और पारदर्शी उपचार पैकेज लागू करने पर ज़ोर।
टेलीकंसल्टेशन और कैशलेस भुगतान को चिकित्सा पर्यटन यात्रा के प्रारंभिक चरण में शामिल करने का सुझाव।
चिकित्सा पर्यटन को महानगरों से आगे टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तारित करने का आह्वान।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 7 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत हेल्थ ग्लोबल एक्सपो 2026 के उद्घाटन समारोह 'संजीवनी 2026' को संबोधित करते हुए भारत के चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्त्वाकांक्षी पाँच-सूत्रीय कार्य योजना प्रस्तुत की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा की तलाश में आने वाले 1 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को सालाना आकर्षित करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

मुख्य घोषणाएँ और पाँच-सूत्रीय ढाँचा

गोयल ने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और कल्याण सेवाओं के प्रमुख वैश्विक प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित करने के लिए उच्चतम गुणवत्ता मानकों को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने पाँच प्राथमिकताएँ गिनाईं जो इस लक्ष्य को साकार करने की नींव बनेंगी।

पहली प्राथमिकता के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य सेवा कार्यबल के प्रशिक्षण और प्रमाणन पर बल दिया। उनके अनुसार, देखभालकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कुशल बनाना और प्रमाणित करना इस पूरे इकोसिस्टम की बुनियाद है।

हील इन इंडिया और नैतिक उपचार पैकेज

दूसरे बिंदु में गोयल ने अधिकाधिक अस्पतालों को 'हील इन इंडिया' गेटवे से जोड़ने और पारदर्शी व ईमानदार उपचार पैकेज तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अस्पतालों को नैतिक आचरण का कड़ाई से पालन करना होगा — "एक भी गलत कार्रवाई भारत की सद्भावना, व्यवसाय और विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा सकती है।"

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्वास्थ्य पर्यटन बाज़ार में थाईलैंड, सिंगापुर और तुर्की जैसे देश भारत से कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। ऐसे में पारदर्शिता और नैतिकता को ब्रांड-मूल्य के रूप में स्थापित करना रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

टेलीमेडिसिन और कैशलेस भुगतान की भूमिका

तीसरे बिंदु में मंत्री ने बीमाकर्ताओं और स्वास्थ्य-तकनीक कंपनियों से ऐसे उत्पाद और प्लेटफॉर्म विकसित करने का आग्रह किया जो रोगी की यात्रा को सहज बनाएँ। उन्होंने कैशलेस भुगतान और समय पर प्रतिपूर्ति की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया। साथ ही, टेलीकंसल्टेशन और टेलीमेडिसिन को चिकित्सा पर्यटन यात्रा के प्रारंभिक चरण के रूप में बड़े पैमाने पर अपनाने का सुझाव दिया।

NABH मानकों पर अनिवार्य अनुपालन

चौथे बिंदु में गोयल ने वैश्विक स्तर पर प्रदर्शनियाँ और प्रस्तुतियाँ आयोजित करने और अंतरराष्ट्रीय अस्पतालों के साथ सुविधाप्रदाताओं को जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABH) द्वारा सक्षम, सत्यापित और पैनलबद्ध अस्पतालों को ही विदेशी रोगियों के उपचार की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि "NABH को बिना किसी समझौते के उच्चतम मानकों को बनाए रखना होगा।"

टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तार और आगे की राह

पाँचवें और अंतिम बिंदु में गोयल ने राज्य सरकारों से अस्पतालों और कल्याण केंद्रों में गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने, अपने नेटवर्क का विस्तार करने और वैश्विक स्तर पर उनका विपणन करने का आग्रह किया। उन्होंने विशेष रूप से महानगरों से आगे टियर-2 और टियर-3 शहरों तक चिकित्सा पर्यटन के विस्तार की वकालत की, जिससे रोज़गार, अवसर और बुनियादी ढाँचे का सृजन हो सके और देश के घरेलू रोगियों के लिए भी स्वास्थ्य सेवा का स्तर ऊँचा उठे।

गौरतलब है कि भारत पहले से ही वैश्विक चिकित्सा पर्यटन सूचकांक में शीर्ष देशों में गिना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता की असमानता और जागरूकता की कमी अभी भी बड़ी बाधाएँ हैं। यदि यह पाँच-सूत्रीय योजना धरातल पर उतरती है, तो भारत के स्वास्थ्य पर्यटन क्षेत्र में आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन की है — विशेषकर तब जब NABH प्रत्यायन की प्रक्रिया स्वयं वर्षों से धीमी और असमान रही है। टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तार की बात सुनने में आकर्षक लगती है, परंतु वहाँ बुनियादी ढाँचे और प्रशिक्षित जनशक्ति की भारी कमी है जिसे रातोंरात दूर नहीं किया जा सकता। नैतिक आचरण पर ज़ोर देना सही दिशा है, लेकिन इसके लिए एक स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र और पारदर्शी दंड प्रावधान की आवश्यकता होगी जो अभी तक घोषणाओं में नदारद है। बिना ठोस समयसीमा और जवाबदेही ढाँचे के, यह पाँच-सूत्रीय योजना नीतिगत इरादे का बयान बनकर रह सकती है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल की 5-सूत्रीय चिकित्सा पर्यटन योजना क्या है?
यह योजना 7 सितंबर 2026 को भारत हेल्थ ग्लोबल एक्सपो में पेश की गई, जिसमें कार्यबल प्रशिक्षण, NABH अनुपालन, हील इन इंडिया गेटवे विस्तार, टेलीमेडिसिन एकीकरण और टियर-2 व टियर-3 शहरों तक चिकित्सा पर्यटन के प्रसार को शामिल किया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य भारत को सालाना 1 करोड़ अंतरराष्ट्रीय मेडिकल टूरिस्ट आकर्षित करने योग्य बनाना है।
भारत में मेडिकल टूरिज्म के लिए NABH प्रत्यायन क्यों ज़रूरी है?
गोयल ने स्पष्ट किया कि केवल NABH द्वारा सत्यापित और पैनलबद्ध अस्पतालों को ही विदेशी रोगियों के उपचार की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। NABH (राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड) भारत में अस्पतालों की गुणवत्ता का प्रमुख नियामक निकाय है।
'हील इन इंडिया' गेटवे क्या है?
'हील इन इंडिया' गेटवे भारत सरकार की एक पहल है जो अंतरराष्ट्रीय रोगियों को भारतीय अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से जोड़ती है। गोयल ने अधिकाधिक अस्पतालों को इस गेटवे से जोड़ने और पारदर्शी उपचार पैकेज सामने लाने का आह्वान किया।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में मेडिकल टूरिज्म विस्तार से क्या फायदा होगा?
इससे छोटे शहरों में रोज़गार, बुनियादी ढाँचे और स्वास्थ्य सेवाओं का विकास होगा और चिकित्सा पर्यटन का बोझ केवल महानगरों पर नहीं रहेगा। साथ ही, घरेलू रोगियों के लिए भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
भारत में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने में टेलीमेडिसिन की क्या भूमिका होगी?
गोयल ने सुझाव दिया कि टेलीकंसल्टेशन और टेलीमेडिसिन को चिकित्सा पर्यटन यात्रा के प्रारंभिक चरण के रूप में बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, ताकि विदेशी रोगी भारत आने से पहले ही भारतीय विशेषज्ञों से परामर्श ले सकें। इससे रोगी की यात्रा सहज होगी और भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की वैश्विक पहुँच बढ़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले