पीयूष गोयल का ऐलान: भारत को वैश्विक फार्मा इनोवेशन हब बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 28 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और इनोवेशन-केंद्रित बनाने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। साथ ही, सरकार का उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक तक किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना भी है।
आईपीए प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए जानकारी दी कि उन्होंने इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व IPA के अध्यक्ष डॉ. शारविल पटेल ने किया। बैठक में सरकार और उद्योग के बीच सहयोग की नई संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
R&D और क्लीनिकल रिसर्च पर फोकस
बैठक के दौरान अनुसंधान एवं विकास (R&D), क्लीनिकल रिसर्च और उन्नत उपचार पद्धतियों में निवेश आकर्षित कर भारत के फार्मा इनोवेशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के अवसरों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। गोयल ने दोहराया कि मोदी सरकार फार्मा उद्योग के लिए एक ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जहाँ नवाचार और किफायती दवाएँ — दोनों साथ-साथ फल-फूल सकें।
भारतीय फार्मा की वैश्विक भूमिका
गौरतलब है कि भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग विश्व के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है और वैश्विक बाज़ारों में सस्ती जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति में इसकी निर्णायक भूमिका है। सरकार घरेलू विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए इस क्षेत्र में कई पहल पहले से लागू कर चुकी है।
फार्मा सेक्टर में रिकॉर्ड M&A गतिविधि
एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में भारत के फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र में 13.9 अरब डॉलर मूल्य के 65 सौदे दर्ज किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, एक भारतीय फार्मा कंपनी द्वारा किए गए 11.8 अरब डॉलर के सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहण को अलग रखने पर भी कुल सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 12 प्रतिशत बढ़ा।
विलय एवं अधिग्रहण (M&A) गतिविधियों में भी उल्लेखनीय तेज़ी देखी गई — इस अवधि में 13.2 अरब डॉलर मूल्य के 35 M&A सौदे संपन्न हुए। लेनदेन की संख्या तिमाही-दर-तिमाही 17 प्रतिशत बढ़ी और कुल सौदों का मूल्य अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। विदेशों में किए गए अधिग्रहण का कुल M&A मूल्य में 96 प्रतिशत योगदान रहा।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक फार्मा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सरकार और उद्योग के बीच इस तरह की सक्रिय भागीदारी भारत को वैश्विक फार्मा इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।