पीयूष गोयल ने स्विट्जरलैंड में हेलेन बुडलिंगर से की मुलाकात, फार्मा-बायोटेक निवेश और रिसर्च सहयोग पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार, 12 जून को स्विट्जरलैंड दौरे के पहले दिन इकोनॉमिक अफेयर्स की स्टेट सेक्रेटरी हेलेन बुडलिंगर आर्टिएडा के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में भारत के तेज़ी से बढ़ते हेल्थकेयर और लाइफ साइंस सेक्टर में स्विस फार्मास्युटिकल व बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए निवेश के नए अवसरों और रिसर्च-इनोवेशन सहयोग को मज़बूत करने पर केंद्रित चर्चा हुई।
बैठक में क्या हुआ
बैठक की सह-अध्यक्षता गोयल और बुडलिंगर आर्टिएडा ने संयुक्त रूप से की। इसमें स्विट्जरलैंड की प्रमुख फार्मास्युटिकल और बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, "बैठक में बातचीत का मुख्य फोकस रिसर्च और इनोवेशन में सहयोग को मज़बूत करने, और साथ ही भारत के तेज़ी से बढ़ते हेल्थकेयर और लाइफ साइंस सेक्टर में स्विस फार्मा कंपनियों के लिए निवेश के नए मौकों पर था।"
भारत-ईएफटीए टीईपीए की पृष्ठभूमि
यह दौरा भारत–ईएफटीए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (टीईपीए) के क्रियान्वयन को गति देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। भारत और ईएफटीए के चार सदस्य-राष्ट्रों — स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिक्टेनस्टीन और आइसलैंड — ने मार्च 2024 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो अक्टूबर 2025 में प्रभावी हुआ। यह समझौता दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है।
दौरे का कार्यक्रम और प्रतिनिधिमंडल
गोयल 12-13 जून को स्विट्जरलैंड में हैं। ज्यूरिख में वे स्विस कंपनियों और निवेशकों से भी मुलाकात करेंगे, जहाँ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ाने के अवसरों पर विचार-विमर्श होगा। उनके साथ उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी हैं।
वाणिज्य मंत्रालय की प्रतिक्रिया
वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि यह दौरा स्विट्जरलैंड और अन्य ईएफटीए देशों के साथ भारत की आर्थिक भागीदारी को दिए गए महत्व को रेखांकित करता है। मंत्रालय के अनुसार, टीईपीए के लागू होने के बाद यह पहली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक है, जो समझौते के क्रियान्वयन में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है।
आगे की दिशा
फार्मा और बायोटेक क्षेत्र में भारत-स्विट्जरलैंड सहयोग की यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका को और विस्तार देने की कोशिश कर रहा है। ज्यूरिख में होने वाली अगली बैठकों के नतीजे यह तय करेंगे कि टीईपीए के तहत निवेश प्रतिबद्धताएँ किस रूप में आकार लेती हैं।