पीयूष गोयल 12-13 जून को स्विट्जरलैंड दौरे पर, टीईपीए क्रियान्वयन और भारत-EFTA साझेदारी पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 12-13 जून को स्विट्जरलैंड के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे, जहाँ वे भारत–यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुए व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते (टीईपीए) के क्रियान्वयन और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को गहरा करने के उपायों पर विमर्श करेंगे। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 11 जून को यह जानकारी दी।
दौरे का कार्यक्रम और मुलाकातें
12 जून को गोयल बर्न में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन और आर्थिक मामलों की राज्य सचिव हेलेन बडलिगर आर्टिएडा से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वे स्विस फार्मास्यूटिकल उद्योग के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत करेंगे। ज्यूरिख में स्विस कंपनियों और निवेशकों से मुलाकात कर द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के नए अवसरों का अन्वेषण किया जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, गोयल के साथ उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस यात्रा में शामिल होंगे।
टीईपीए की पृष्ठभूमि
भारत और EFTA सदस्य-राष्ट्रों — स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिक्टेनस्टीन और आइसलैंड — ने मार्च 2024 में टीईपीए पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता अक्टूबर 2025 में प्रभावी हुआ। यह व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढाँचा प्रदान करता है।
गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब टीईपीए के प्रभावी होने के बाद पहली बार उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय संवाद हो रहा है — जिससे परिचालन संबंधी शुरुआती चुनौतियों को दूर करना और समझौते को ज़मीन पर उतारना इस यात्रा का केंद्रीय एजेंडा बनता है।
चर्चा के प्रमुख बिंदु
मंत्रालय के मुताबिक, वार्ता का फोकस टीईपीए के क्रियान्वयन, समझौते से उत्पन्न परिचालन मुद्दों के समाधान, और द्विपक्षीय व्यापार, निवेश व संस्थागत सहयोग को बढ़ाने पर रहेगा। स्विस फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के साथ विशेष बातचीत यह संकेत देती है कि स्वास्थ्य और दवा उद्योग में सहयोग इस दौरे की प्राथमिकताओं में शामिल है।
आगे की राह
यह दौरा भारत-स्विट्जरलैंड के दीर्घकालीन आर्थिक साझेदारी को और मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। EFTA देशों के साथ बढ़ते व्यापारिक संबंध भारत की वैश्विक आर्थिक कूटनीति का हिस्सा हैं, और टीईपीए के सफल क्रियान्वयन से दोनों पक्षों के निवेशकों और उद्योग जगत को स्थिर नीतिगत वातावरण मिलने की उम्मीद है।