भारत-स्विट्जरलैंड TEPA के तहत आर्थिक सहयोग गहरा करने की प्रतिबद्धता, पीयूष गोयल ने राष्ट्रपति परमेलिन से की बैठक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 12 जून 2026 को पुष्टि की कि भारत और स्विट्जरलैंड ने अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने का संकल्प दोहराया है। यह प्रतिबद्धता भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के ढाँचे के अंतर्गत आर्थिक जुड़ाव और रणनीतिक सहयोग को नई ऊँचाई देने पर केंद्रित है।
उच्चस्तरीय बैठक का विवरण
गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाय परमेलिन के साथ उनकी एक अत्यंत सार्थक बैठक हुई। उन्होंने लिखा कि इस चर्चा में दोनों देशों के बीच मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी की पुष्टि हुई, जिसमें TEPA के तहत आर्थिक जुड़ाव और सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने की साझा प्रतिबद्धता शामिल है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपने व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार करने की रणनीति पर निरंतर काम कर रहा है।
TEPA का महत्त्व और निवेश प्रतिबद्धता
गोयल ने TEPA को भारत और स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन तथा आइसलैंड सहित EFTA सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और नवाचार-आधारित सहयोग का एक प्रमुख ढाँचा बताया है। इस समझौते के अंतर्गत EFTA देशों ने 15 वर्षों की अवधि में भारत में $100 अरब का निवेश करने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित करने में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई है। गौरतलब है कि भारत वर्तमान में इस समझौते के कार्यान्वयन के दूसरे वर्ष में है और निवेश परियोजनाओं पर चर्चाएँ सक्रिय रूप से आगे बढ़ रही हैं।
भारत की व्यापक FTA रणनीति
इस सप्ताह की शुरुआत में गोयल ने स्पष्ट किया था कि भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वैश्विक जुड़ाव बढ़ाने, पूँजी आकर्षित करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने, गुणवत्ता मानकों को उन्नत करने और रोज़गार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। यह दृष्टिकोण भारत की दीर्घकालिक आर्थिक विकास रणनीति का अभिन्न हिस्सा है।
आगे की राह
TEPA के दूसरे कार्यान्वयन वर्ष में निवेश परियोजनाओं पर सक्रिय वार्ता जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश प्रतिबद्धताएँ किस गति से ज़मीन पर उतरती हैं और रोज़गार सृजन के लक्ष्य कितने सत्यापन-योग्य तरीके से पूरे होते हैं। भारत-स्विट्जरलैंड के बीच यह उच्चस्तरीय संवाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने का संकेत देता है।