15 जुलाई 2026
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भारत-ईयू एफटीए पर पीयूष गोयल और शेफकोविच की ब्रसेल्स में समीक्षा बैठक, व्यापार-निवेश विस्तार पर सहमति

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भारत-ईयू एफटीए पर पीयूष गोयल और शेफकोविच की ब्रसेल्स में समीक्षा बैठक, व्यापार-निवेश विस्तार पर सहमति

सारांश

भारत-ईयू एफटीए की राह में एक और अहम पड़ाव — पीयूष गोयल ने ब्रसेल्स में शेफकोविच समेत कई यूरोपीय नेताओं से मुलाकात कर व्यापार, निवेश, क्रिटिकल टेक और नेट-जीरो लक्ष्यों पर साझा प्रतिबद्धता दोहराई। जनवरी 2026 में मोदी-वॉन डेर लेयेन के ऐलान के बाद यह वार्ता निर्णायक दौर में है।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल ने 15 जुलाई 2026 को ब्रसेल्स में EU के मारोस शेफकोविच से मिलकर भारत-ईयू एफटीए की प्रगति की समीक्षा की।
व्यापार, निवेश, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और रेजिलिएंट सप्लाई चेन में सहयोग के नए अवसरों पर सहमति बनी।
जनवरी 2026 में PM मोदी और EU अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के संयुक्त ऐलान के बाद एफटीए वार्ता में तेज़ी आई है।
गोयल ने यूरोपीय संसद की INTA समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लैंगे और बेल्जियम के उपप्रधानमंत्री डेविड क्लैरिनवाल से भी बैठक की।
EU के जलवायु आयुक्त वॉप्के हूकस्ट्रा से मुलाकात में ग्रीन हाइड्रोजन , नवीकरणीय ऊर्जा और नेट-जीरो लक्ष्यों पर सहयोग की रूपरेखा तय हुई।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 15 जुलाई 2026 को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (EU) के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस शेफकोविच से मुलाकात की और भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की प्रगति का आकलन किया। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और मज़बूत आपूर्ति शृंखलाओं में सहयोग के नए अवसरों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया।

बैठक की मुख्य बातें

गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि इस बैठक में क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और रेजिलिएंट सप्लाई चेन को केंद्र में रखते हुए द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाई देने पर सहमति बनी। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय संघ एफटीए को अंतिम रूप देने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले मार्च 2026 में कैमरून में आयोजित विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के दौरान भी गोयल और शेफकोविच की मुलाकात हुई थी, जिसमें एफटीए को अंतिम रूप देने पर प्रगति की समीक्षा की गई थी।

एफटीए की पृष्ठभूमि

भारत-ईयू एफटीए की प्रक्रिया को जनवरी 2026 में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा किए गए संयुक्त ऐलान के बाद नई गति मिली। यह समझौता दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को संरचनात्मक रूप से मज़बूत करने का लक्ष्य रखता है।

यूरोपीय संसद और बेल्जियम से चर्चा

ब्रसेल्स दौरे के दौरान गोयल ने यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति (INTA) के अध्यक्ष बर्न्ड लैंगे से भी मुलाकात की। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत-ईयू एफटीए से दोनों पक्षों के कारोबार, उद्योगों और आम नागरिकों को मिलने वाले व्यापक अवसरों पर चर्चा की। गोयल ने लैंगे को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।

इसके अतिरिक्त, गोयल ने बेल्जियम के उपप्रधानमंत्री एवं रोज़गार, अर्थव्यवस्था और कृषि मंत्री डेविड क्लैरिनवाल से बैठक की, जिसमें व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स और कार्यबल गतिशीलता (वर्कफोर्स मोबिलिटी) में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ।

जलवायु और स्वच्छ विकास पर सहयोग

गोयल ने यूरोपीय संघ के जलवायु, नेट-जीरो और स्वच्छ विकास आयुक्त वॉप्के हूकस्ट्रा से भी मुलाकात की। इस बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, नवाचार, निवेश और मज़बूत वैल्यू चेन के क्षेत्रों में सहयोग पर विशेष ज़ोर दिया गया, ताकि दोनों पक्ष अपने साझा नेट-जीरो लक्ष्यों की दिशा में मिलकर आगे बढ़ सकें।

आगे की राह

ब्रसेल्स में हुई इन बैठकों से स्पष्ट है कि भारत और यूरोपीय संघ एफटीए को केवल व्यापारिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में आकार देने की कोशिश कर रहे हैं — जिसमें हरित अर्थव्यवस्था और तकनीकी आत्मनिर्भरता दोनों शामिल हैं। आने वाले महीनों में वार्ता की गति और दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति यह तय करेगी कि यह समझौता कब तक मूर्त रूप लेता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अंतिम हस्ताक्षर की तारीख अब भी अनिश्चित है। जनवरी 2026 में मोदी-वॉन डेर लेयेन के ऐलान ने राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत दिया, मगर असली परीक्षा तब होगी जब कृषि, डेटा संरक्षण और कार्बन सीमा शुल्क जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दोनों पक्ष सहमति बनाएँ। ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल टेक को एजेंडे में शामिल करना रणनीतिक रूप से सही है, लेकिन यह वार्ता की जटिलता भी बढ़ाता है। बिना स्पष्ट समयसीमा के, यह दौर भी पिछले दौरों जैसा 'काम जारी है' का संदेश देता दिखता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईयू एफटीए क्या है और यह कहाँ तक पहुँचा है?
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को संरचनात्मक रूप देने की बहुप्रतीक्षित पहल है। जनवरी 2026 में PM मोदी और EU अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन के संयुक्त ऐलान के बाद वार्ता में तेज़ी आई है और 15 जुलाई 2026 को ब्रसेल्स में गोयल-शेफकोविच बैठक इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है।
पीयूष गोयल की ब्रसेल्स यात्रा में किन-किन नेताओं से मुलाकात हुई?
गोयल ने EU के व्यापार आयुक्त मारोस शेफकोविच, यूरोपीय संसद की INTA समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लैंगे, EU के जलवायु आयुक्त वॉप्के हूकस्ट्रा और बेल्जियम के उपप्रधानमंत्री डेविड क्लैरिनवाल से बैठकें कीं। इन सभी बैठकों में भारत-ईयू एफटीए और द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
भारत-ईयू एफटीए में जलवायु और ऊर्जा को क्यों शामिल किया जा रहा है?
दोनों पक्षों ने साझा नेट-जीरो लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ प्रौद्योगिकी को वार्ता के एजेंडे में शामिल किया है। यह इसलिए अहम है क्योंकि EU का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मेकेनिज़म (CBAM) भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकता है, और हरित सहयोग इस जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
WTO के MC14 सम्मेलन में भारत-ईयू एफटीए पर क्या हुआ था?
मार्च 2026 में कैमरून में आयोजित WTO के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के दौरान भी गोयल और शेफकोविच की मुलाकात हुई थी। उस बैठक में दोनों पक्षों ने एफटीए को अंतिम रूप देने की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा की थी, जो 15 जुलाई की बैठक से पहले की महत्वपूर्ण कड़ी थी।
भारत और बेल्जियम के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई?
गोयल और बेल्जियम के उपप्रधानमंत्री डेविड क्लैरिनवाल की बैठक में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स और वर्कफोर्स मोबिलिटी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
राष्ट्र प्रेस
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