15 जुलाई 2026
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लॉर्ड्स टेस्ट में 270 रन से जीत: स्नेह राणा बोलीं — राष्ट्रगान और ऐतिहासिक जीत हमेशा याद रहेगी

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लॉर्ड्स टेस्ट में 270 रन से जीत: स्नेह राणा बोलीं — राष्ट्रगान और ऐतिहासिक जीत हमेशा याद रहेगी

सारांश

लॉर्ड्स के पहले महिला टेस्ट में भारत की 270 रन की जीत सिर्फ स्कोरकार्ड नहीं — यह एक पीढ़ी का संकल्प था। स्नेह राणा के शब्दों में, राष्ट्रगान से लेकर सोफी एक्लेस्टोन के आखिरी विकेट तक, हर पल इतिहास बन गया। सचिन तेंदुलकर का 'भूखे और विनम्र रहो' का संदेश इस नए युग का मंत्र है।

मुख्य बातें

भारतीय महिला टीम ने लॉर्ड्स में इंग्लैंड को 270 रन से हराकर पहले महिला टेस्ट में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
स्नेह राणा ने दूसरी पारी में चार विकेट लिए और सोफी एक्लेस्टोन को आउट कर जीत सुनिश्चित की।
युवा तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने लॉर्ड्स डेब्यू पर पाँच विकेट लेकर ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज कराया।
यास्तिका भाटिया ने एसीएल चोट से वापसी के बाद लॉर्ड्स में शतक जड़कर ऑनर्स बोर्ड पर जगह बनाई।
मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने मैच से पहले ड्रेसिंग रूम में टीम को इतिहास रचने के लिए प्रेरित किया।
सचिन तेंदुलकर चौथे दिन लॉर्ड्स पहुँचे और खिलाड़ियों को संदेश दिया — 'हमेशा भूखे रहो और विनम्र रहो।'

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑफ-स्पिनर स्नेह राणा के लिए लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ 270 रन की ऐतिहासिक टेस्ट जीत महज एक मैच की सफलता नहीं — यह भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने वाला वह पल है जिसे वह और उनकी पूरी टीम जीवनभर नहीं भूलेगी। 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में स्नेह ने इस जीत के हर भावुक पहलू को साझा किया।

इतिहास रचने की मानसिकता

स्नेह राणा ने बताया कि जैसे ही टीम को पता चला कि लॉर्ड्स पहली बार किसी महिला टेस्ट मैच की मेजबानी करेगा, तभी से खिलाड़ियों के मन में कुछ असाधारण करने का संकल्प जड़ें जमाने लगा था। उन्होंने कहा, 'हमारी सोच थी कि अगर हम यहाँ जीत गए तो भारत का नाम हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो जाएगा। यही बात हमें लगातार प्रेरित करती रही।' यह ऐसे समय में आया जब भारतीय महिला क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान और मज़बूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

लॉन्ग रूम से मैदान तक — भावुक कर देने वाला सफर

स्नेह के मुताबिक, लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित मैदान पर पहली बार सफेद जर्सी पहनकर लॉन्ग रूम से मैदान तक चलना और मशहूर लॉर्ड्स बालकनी के सामने राष्ट्रगान गाना उनके करियर के सबसे भावुक क्षणों में से एक था। गौरतलब है कि यह वही मैदान है जहाँ क्रिकेट का इतिहास सदियों से लिखा जाता रहा है। लेकिन उनके अनुसार, उससे भी बड़ा पल तब आया जब चौथे दिन भारत ने इंग्लैंड को हराकर लॉर्ड्स के पहले महिला टेस्ट में जीत दर्ज की — एक ऐसा कीर्तिमान जो इतिहास की किताबों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

मुख्य कोच अमोल मजूमदार की प्रेरणा

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे मुख्य कोच अमोल मजूमदार की भूमिका को स्नेह ने विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मैच से पहले ड्रेसिंग रूम में कोच ने टीम से कहा था कि यह सिर्फ एक टेस्ट मैच नहीं, बल्कि इतिहास लिखने का मौका है। मजूमदार ने खिलाड़ियों को याद दिलाया कि लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर बहुत कम क्रिकेटरों के नाम दर्ज हैं और यह अवसर अमर हो सकता है। कोच के इन शब्दों ने पूरी टीम में एक अलग किस्म का जोश भर दिया।

स्नेह का निर्णायक विकेट और क्रांति गौड़ की तारीफ

मैच के निर्णायक क्षण को याद करते हुए स्नेह ने बताया कि पूरी टीम इंग्लैंड के आखिरी विकेट का लंबे समय से इंतज़ार कर रही थी। जब उन्होंने सोफी एक्लेस्टोन को आउट कर भारत की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की, तो वह पल उनके करियर का सबसे यादगार लम्हा बन गया। दूसरी पारी में चार विकेट लेकर उन्होंने जीत में अहम योगदान दिया।

स्नेह ने युवा तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ की भी खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि क्रांति ने अपने पहले ही लॉर्ड्स टेस्ट में पाँच विकेट लेकर इतिहास रच दिया। स्नेह ने उस कैच का भी ज़िक्र किया जिसमें पहले उनसे मौका छूटा, लेकिन शेफाली वर्मा ने शानदार डाइव लगाकर कैच पूरा किया और क्रांति का पाँचवाँ विकेट सुनिश्चित किया — एक ऐसा पल जो तीनों खिलाड़ियों के लिए हमेशा यादगार रहेगा।

यास्तिका भाटिया का शतक और सचिन तेंदुलकर का आशीर्वाद

विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया की शतकीय पारी ने पूरी टीम को भावुक कर दिया। स्नेह ने बताया कि पिछले वर्ष एकदिवसीय विश्व कप से पहले लगी एसीएल चोट के कारण यास्तिका को बेहद कठिन दौर से गुज़रना पड़ा था। उन्होंने वापसी के लिए अथक मेहनत की और लॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित मैदान पर शतक लगाकर अपने संघर्ष को शानदार उपलब्धि में बदल दिया। जब यास्तिका का नाम ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज हुआ, तो पूरा ड्रेसिंग रूम भावुक हो उठा। क्रांति गौड़ और यास्तिका भाटिया — दोनों भारतीय खिलाड़ियों के नाम लॉर्ड्स के पहले महिला टेस्ट के ऑनर्स बोर्ड पर हमेशा के लिए दर्ज हो गए।

इस ऐतिहासिक जीत की खुशी तब और बढ़ गई जब चौथे दिन महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर टीम से मिलने लॉर्ड्स पहुँचे। स्नेह ने बताया कि उनकी मौजूदगी पूरी टीम के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं थी। सचिन ने खिलाड़ियों को एक ही संदेश दिया — 'हमेशा भूखे रहो और विनम्र रहो।' यह संदेश भारतीय महिला क्रिकेट की आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वर्षों की अनदेखी और सीमित संसाधनों के बावजूद बनाई गई मानसिक मज़बूती का परिणाम है। यास्तिका भाटिया की एसीएल चोट से वापसी और क्रांति गौड़ का डेब्यू पर पाँच विकेट — ये महज व्यक्तिगत उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट की गहरी होती बेंच स्ट्रेंथ का प्रमाण हैं। असली सवाल यह है कि क्या BCCI इस ऐतिहासिक पल को महिला टेस्ट क्रिकेट के विस्तार में निवेश के अवसर के रूप में देखेगा, या यह जीत भी सिर्फ सुर्खियों तक सिमट कर रह जाएगी।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम ने इंग्लैंड को कितने रन से हराया?
भारतीय महिला टीम ने लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर इंग्लैंड को 270 रन से हराया। यह लॉर्ड्स में खेले गए पहले महिला टेस्ट मैच में भारत की ऐतिहासिक जीत थी।
स्नेह राणा ने लॉर्ड्स टेस्ट में कितने विकेट लिए?
स्नेह राणा ने दूसरी पारी में चार विकेट लिए और इंग्लैंड की सोफी एक्लेस्टोन को आउट कर भारत की जीत सुनिश्चित की। यह विकेट उनके करियर के सबसे यादगार पलों में से एक बन गया।
क्रांति गौड़ ने लॉर्ड्स टेस्ट में क्या उपलब्धि हासिल की?
युवा तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने अपने पहले ही लॉर्ड्स टेस्ट में पाँच विकेट लेकर ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज कराया। शेफाली वर्मा ने शानदार डाइव लगाकर उनका पाँचवाँ विकेट पूरा किया।
यास्तिका भाटिया के लिए लॉर्ड्स शतक इतना खास क्यों था?
यास्तिका भाटिया ने पिछले वर्ष एकदिवसीय विश्व कप से पहले एसीएल चोट के बाद कठिन पुनर्वास से वापसी की थी। लॉर्ड्स में शतक लगाकर उन्होंने ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराया, जिससे पूरा ड्रेसिंग रूम भावुक हो गया।
सचिन तेंदुलकर ने भारतीय महिला टीम को क्या संदेश दिया?
सचिन तेंदुलकर चौथे दिन लॉर्ड्स पहुँचे और टीम से मिले। उन्होंने खिलाड़ियों को एक ही संदेश दिया — 'हमेशा भूखे रहो और विनम्र रहो।'
राष्ट्र प्रेस
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