केरल BJP फंड घोटाला: CM वीडी सतीशन बोले — अब तक कोई शिकायत नहीं मिली, मिलने पर होगी जाँच
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने बुधवार, 15 जुलाई को स्पष्ट किया कि कथित भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनावी फंड दुरुपयोग मामले में राज्य सरकार को अब तक कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर उचित जाँच और कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री का बयान
तिरुवनंतपुरम में कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में सतीशन ने कहा, 'राज्य सरकार या उसके किसी विभाग को इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो उसकी जाँच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।' यह बयान ऐसे समय आया है जब केरल BJP के चुनावी खर्च में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
ऑडियो क्लिप से उठे सवाल
हाल के दिनों में कुछ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई हैं, जिनमें चुनाव प्रचार सामग्री की खरीद से जुड़े मामलों में पार्टी पदाधिकारियों को कमीशन दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इस सप्ताह सामने आई एक नई ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर एक कंपनी प्रतिनिधि यह दावा करता हुआ सुनाई देता है कि झंडे और बैनरों का पूरा भुगतान होने से पहले ही एक BJP नेता को ₹31 लाख का भुगतान किया गया था। प्रतिनिधि ने यह भी आरोप लगाया कि समझौते के तहत बकाया ₹4.65 लाख की राशि वसूलने के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन संबंधित लोगों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
आरोपों का दायरा
इससे पहले भी आरोप लगाए गए थे कि BJP के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मुफ्त में उपलब्ध कराए गए चुनावी झंडों और बैनरों को स्थानीय स्तर पर बेच दिया गया। साथ ही, चुनाव प्रचार सामग्री के ठेके कथित तौर पर कुछ पसंदीदा निजी कंपनियों को अधिक दरों पर दिए गए और बदले में कमीशन लिया गया। इसके अलावा, चुनाव प्रचार के दौरान तिरुवनंतपुरम के एक लग्जरी होटल में पार्टी फंड से बड़ी संख्या में कमरे बुक कराने को लेकर भी अलग आरोप लगाए गए हैं।
BJP के भीतर असंतोष
इन आरोपों को लेकर केरल BJP के कुछ नेताओं ने भी राज्य नेतृत्व की आलोचना की है। असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि कई जिलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के दावों के बावजूद पार्टी नेतृत्व इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या होगा
केरल BJP नेतृत्व जल्द ही इन आरोपों की आंतरिक समीक्षा कर सकता है। राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि औपचारिक शिकायत दर्ज होने पर ही प्रशासनिक कार्रवाई संभव होगी — यह देखना बाकी है कि क्या कोई पक्ष आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने का साहस दिखाता है।