केरल बजट में भविष्य का कोई खाका नहीं: पिनराई विजयन का वी.डी. सतीशन पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने 19 जून 2026 को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के पहले बजट को 'दिशाहीन' करार देते हुए कड़ी आलोचना की। विजयन ने कहा कि इस बजट में केरल के भविष्य की कोई स्पष्ट रूपरेखा नहीं है और सरकार द्वारा वित्तीय संकट का जो दावा किया जा रहा है, वह एक राजनीतिक आख्यान से अधिक कुछ नहीं।
वित्तीय संकट का दावा: राजनीतिक नैरेटिव या हकीकत?
विजयन ने कहा कि श्वेत पत्र और बजट भाषण के ज़रिए राज्य को गंभीर आर्थिक संकट में दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन बजट के गहन अध्ययन के बाद यह स्पष्ट नहीं होता कि वास्तव में ऐसी कोई विकट स्थिति है। उन्होंने कहा, 'वित्तीय संकट की कहानी राजनीतिक उद्देश्य से गढ़ी गई है।' आलोचकों का कहना है कि सत्ता में आते ही संकट का हवाला देना नई सरकारों की पुरानी रणनीति है।
कृषि और पारंपरिक उद्योगों की अनदेखी
पूर्व मुख्यमंत्री विजयन ने आरोप लगाया कि बजट में कृषि और पारंपरिक उद्योगों के लिए आवंटन में कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने किसानों को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की थीं, परंतु नए बजट में किसानों के हित में कोई ठोस पहल दिखाई नहीं देती। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका सीधा प्रतिकूल असर राज्य के किसानों पर पड़ेगा।
निजीकरण की आशंका: समुद्री नीति से लेकर स्वास्थ्य तक
विजयन ने बजट में खनन, समुद्री विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र की पहलों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनके अनुसार, प्रस्तावित समुद्री नीति समुद्री संसाधनों को निजी हितों के हवाले करने का प्रयास है और मत्स्य उप-योजना से मछुआरों के बजाय निजी कंपनियों को लाभ मिलने की आशंका है। इसी क्रम में उन्होंने लैंड बैंक प्रस्ताव और प्रस्तावित केरल हेल्थ एंड लाइफ साइंस सिटी पर भी सवाल उठाए — यह कहते हुए कि सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे को मजबूत करने की बजाय कॉरपोरेट भागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है।
केआईआईएफबी और थिंक टैंक पर विवाद
विजयन ने केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) के पुनर्गठन प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि इस संस्था ने राज्य के बुनियादी ढाँचे के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है और इसके योगदान को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। प्रस्तावित थिंक टैंक के गठन पर भी उन्होंने सवाल उठाया — उनका कहना था कि जिस तरह केंद्र ने योजना आयोग को समाप्त किया, उसी तरह केरल में भी नियोजन संस्थाओं को कमज़ोर किया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य नियोजन बोर्ड की भूमिका पहले से ही सीमित होती जा रही है।
विपक्ष का निष्कर्ष: बजट पुरानी योजनाओं का नया आवरण
विजयन ने आरोप लगाया कि बजट में घोषित कई योजनाएं दरअसल पुरानी योजनाओं को नए नाम से पेश करना मात्र है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में वी.डी. सतीशन जिन मुद्दों को उठाते थे, मुख्यमंत्री बनने के बाद वे बजट में कहीं नज़र नहीं आए। विजयन ने अंत में चेतावनी दी कि इस बजट की नीतियाँ कल्याणकारी प्राथमिकताओं को कमज़ोर करेंगी और राज्य को निजी क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर बना देंगी — जो भविष्य में केरल के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।