केरल CM सतीशन का बजट बचाव: ₹5 लाख करोड़ के कर्ज में निजी निवेश ही एकमात्र रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 19 जून 2026 को तिरुवनंतपुरम में अपना पहला बजट पेश करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए निजी निवेश को प्राथमिकता देने की सरकार की नीति का कड़ा बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रणनीति रोजगार सृजन, आर्थिक विकास और कल्याणकारी योजनाओं के वित्तपोषण की एक सुविचारित नीति का अभिन्न हिस्सा है।
विपक्ष की आलोचना का जवाब
विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने बजट पर आरोप लगाया था कि इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में निजी पूँजी को बढ़ावा देना है। सतीशन ने इस आलोचना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने अपना दृष्टिकोण कभी नहीं छुपाया — यही विजन चुनाव से पहले जनता के सामने रखा गया था।
उन्होंने कहा, 'केरल में निजी निवेश अनिवार्य है। इसके जरिए हम रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं, अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर सकते हैं और उससे होने वाली अतिरिक्त आय का उपयोग समाज के कमजोर वर्गों की सहायता के लिए कर सकते हैं।'
केरल की वित्तीय स्थिति: आँकड़ों की जुबानी
सतीशन ने बताया कि केरल पर ₹87,000 करोड़ की अस्थायी देनदारियाँ और कुल ₹5 लाख करोड़ का कर्ज है। इस वित्तीय दबाव में राज्य नए विकास परियोजनाओं के लिए पूरी तरह सार्वजनिक क्षेत्र पर निर्भर नहीं रह सकता।
उन्होंने कहा, 'आज हम ऐसी स्थिति में हैं कि हमारे पास पाँच पैसे भी नहीं हैं। फिर भी विपक्ष चाहता है कि हम पुराने ढर्रे पर ही चलते रहें। हम सत्ता में इसलिए नहीं आए। हमने चुनाव से पहले लोगों से साफ कहा था कि हमारा लक्ष्य केरल को 25 साल आगे ले जाना है, न कि 25 साल पीछे।'
प्रतिस्पर्धी राज्यों से तुलना
मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि ये राज्य निवेशकों को आकर्षित करने में आगे हैं और केरल इस होड़ से बाहर नहीं रह सकता। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विकसित करने के लिए निजी भागीदारी अपरिहार्य है।
उन्होंने कहा कि राज्य के पास अपने संसाधनों से विझिनजम से कासरगोड तक माल पहुँचाने की वित्तीय क्षमता नहीं है, इसलिए सरकार निजी निवेश लाकर प्रतिस्पर्धा पैदा करेगी और बार्ज तथा जहाज-आधारित लॉजिस्टिक्स विकसित करेगी।
निजीकरण के आरोपों का खंडन
सतीशन ने यह भी स्पष्ट किया कि बजट में कहीं भी 'निजीकरण' शब्द का उल्लेख नहीं है और उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि वे दस्तावेज में इसका कोई संदर्भ दिखाएँ। उन्होंने कहा कि न केएसआरटीसी का और न वॉटर अथॉरिटी का निजीकरण किया गया है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने सरकारी संस्थानों में बढ़ते संविदा नियुक्तियों के चलन पर भी चिंता जताई, जिसके कारण राज्य के इंजीनियरिंग स्नातकों को उचित अवसर नहीं मिल पाते और वे पलायन करने पर मजबूर होते हैं।
जवाबदेही और परफॉर्मेंस ऑडिट
सतीशन ने बजट घोषणाओं की समयबद्ध निगरानी के लिए एक परफॉर्मेंस ऑडिट प्रणाली की भी घोषणा की। तकनीक के माध्यम से हर तीन महीने में परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा होगी और विकास कार्यों से जुड़े अधिकारियों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा। यह कदम केरल में बजट घोषणाओं और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की पुरानी खाई को पाटने का प्रयास है।