18 सितंबर 2026
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टाटा संस-ट्रस्ट्स विवाद से टाटा ग्रुप के शेयरों में 8% तक गिरावट, चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति 'गैर-कानूनी' घोषित

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टाटा संस-ट्रस्ट्स विवाद से टाटा ग्रुप के शेयरों में 8% तक गिरावट, चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति 'गैर-कानूनी' घोषित

सारांश

टाटा ट्रस्ट्स ने एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को 'गैर-कानूनी' बताया और पब्लिक लिस्टिंग का विरोध किया — इस एक प्रेस विज्ञप्ति ने टाटा के प्रमुख शेयरों में 8% तक की गिरावट ला दी। 100 साल पुराने कॉर्पोरेट ढाँचे का यह सार्वजनिक टकराव भारत की सबसे बड़ी व्यावसायिक विरासत के भविष्य पर सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

टाटा केमिकल का शेयर 7.78 प्रतिशत टूटकर ₹718.65 पर आया — समूह में सबसे बड़ी गिरावट।
TCS , टाटा मोटर्स , टाटा टेक्नोलॉजीज और टाटा पावर भी लाल निशान में बंद।
टाटा ट्रस्ट्स ने एन.
चंद्रशेखरन की टाटा संस चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्ति को 'गैर-कानूनी' घोषित किया।
नियमों के अनुसार पुनर्नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर्स का बहुमत ज़रूरी; नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया।
शापूरजी पलोनजी ग्रुप ने टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने का प्रस्ताव दिया है।
टाटा कैपिटल , इंडियन होटल्स और वोल्टास जैसे कुछ शेयरों में सीमित तेज़ी बनी रही।

टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच गहराते कॉर्पोरेट विवाद के चलते 18 सितंबर 2026 को शुक्रवार की सुबह समूह के प्रमुख शेयरों में 8 प्रतिशत तक की तीव्र बिकवाली देखने को मिली। टाटा केमिकल, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, टाटा मोटर्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और टाटा पावर सहित कई प्रमुख कंपनियाँ इस दबाव की चपेट में आईं। विवाद की जड़ में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और कंपनी की संभावित पब्लिक लिस्टिंग का मुद्दा है।

शेयर बाज़ार में गिरावट का विवरण

सुबह 9:45 बजे IST पर कारोबार के आँकड़ों के अनुसार, टाटा केमिकल सबसे अधिक 7.78 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹718.65 पर आ गया। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन 3.56 प्रतिशत टूटकर ₹693.70, और टाटा मोटर्स 2.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹305 पर था।

TCS का शेयर 2.73 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹2,130.30 और टाटा टेक्नोलॉजीज 2.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹737.80 पर कारोबार कर रहा था। टाटा पावर 0.99 प्रतिशत कमज़ोर होकर ₹365.35, टाटा एलेक्सी 1.04 प्रतिशत नीचे ₹3,346.70 और तेजस नेटवर्क 0.69 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹520.65 पर था।

हालाँकि, समूह के कुछ शेयरों में सीमित तेज़ी बनी रही — इनमें टाटा कैपिटल, इंडियन होटल्स, वोल्टास, नेल्को और ओरिएंटल होटल्स शामिल हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब टाटा संस ने एन. चंद्रशेखरन को पुनः चेयरमैन नियुक्त किया और संकेत दिया कि वह कंपनी की पब्लिक लिस्टिंग पर विचार कर सकती है। इसी बीच, प्रमुख शेयरधारक शापूरजी पलोनजी ग्रुप ने टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने का प्रस्ताव दिया।

गौरतलब है कि टाटा ट्रस्ट्स लंबे समय से टाटा संस की पब्लिक लिस्टिंग के विरोध में रहा है और समूह के 100 वर्ष से अधिक पुराने संरचनात्मक ढाँचे को अक्षुण्ण रखने के पक्ष में है। यह विवाद टाटा समूह के दो प्रमुख स्तंभों — ट्रस्ट्स और ऑपरेटिंग होल्डिंग कंपनी — के बीच एक दुर्लभ सार्वजनिक टकराव का रूप ले चुका है।

ट्रस्ट्स ने पुनर्नियुक्ति को 'गैर-कानूनी' बताया

टाटा ट्रस्ट्स की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में एन. चंद्रशेखरन की टाटा संस के चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्ति को 'गैर-कानूनी' करार दिया गया है। विज्ञप्ति के अनुसार, नियमों के तहत चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर्स के बहुमत का समर्थन आवश्यक है।

विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया कि टाटा संस का बोर्ड कानूनी रूप से तब तक चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए बैठक नहीं बुला सकता जब तक टाटा ट्रस्ट्स के दोनों नॉमिनी डायरेक्टर्स उपस्थित न हों, और उनकी अनुपस्थिति में कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं किया जा सकता। ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसके आधार पर ट्रस्ट्स ने पुनर्नियुक्ति को निराधार घोषित किया है।

निवेशकों पर असर और आगे का रास्ता

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बाज़ार पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं के दबाव में है। टाटा ग्रुप देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों में से एक है और इसके शेयरों में यह व्यापक बिकवाली निवेशकों की संस्थागत स्थिरता को लेकर चिंता को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद जब तक कानूनी या बोर्ड स्तर पर नहीं सुलझता, तब तक शेयरों में अस्थिरता बनी रह सकती है।

टाटा संस की ओर से अभी तक ट्रस्ट्स के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। अगले कुछ दिनों में बोर्ड बैठक या कानूनी कार्यवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि टाटा संस के भावी स्वरूप — सूचीबद्ध कंपनी बनाम पारिवारिक ट्रस्ट-संचालित ढाँचा — पर एक मौलिक मतभेद की अभिव्यक्ति है। शापूरजी पलोनजी ग्रुप की हिस्सेदारी बिक्री की पेशकश इस समीकरण को और जटिल बनाती है। बाज़ार की यह प्रतिक्रिया बताती है कि निवेशक संस्थागत अनिश्चितता को उतनी ही गंभीरता से लेते हैं जितनी वित्तीय चूक को — और जब तक यह विवाद कानूनी स्पष्टता नहीं पा लेता, टाटा के शेयरों पर दबाव बना रहेगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच विवाद क्या है?
टाटा संस ने एन. चंद्रशेखरन को पुनः चेयरमैन नियुक्त किया और पब्लिक लिस्टिंग पर विचार का संकेत दिया, जिसे टाटा ट्रस्ट्स ने अस्वीकार किया। ट्रस्ट्स ने इस पुनर्नियुक्ति को 'गैर-कानूनी' बताते हुए कहा कि उनके नॉमिनी डायरेक्टर्स की सहमति के बिना यह प्रस्ताव अमान्य है।
टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को गैर-कानूनी क्यों कहा?
ट्रस्ट्स के अनुसार नियमों के तहत चेयरमैन की नियुक्ति के लिए उनके नॉमिनी डायरेक्टर्स का बहुमत आवश्यक है। नॉमिनी डायरेक्टर नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया, इसलिए ट्रस्ट्स ने इस पुनर्नियुक्ति को निराधार और गैर-कानूनी घोषित किया।
18 सितंबर को कौन-से टाटा शेयर सबसे ज़्यादा गिरे?
टाटा केमिकल सबसे अधिक 7.78 प्रतिशत गिरकर ₹718.65 पर आया। इसके अलावा TCS 2.73 प्रतिशत, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन 3.56 प्रतिशत, टाटा मोटर्स 2.96 प्रतिशत और टाटा टेक्नोलॉजीज 2.76 प्रतिशत की गिरावट में थे।
शापूरजी पलोनजी ग्रुप की इस विवाद में क्या भूमिका है?
शापूरजी पलोनजी ग्रुप टाटा संस में एक प्रमुख शेयरधारक है, जिसने टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव पब्लिक लिस्टिंग की चर्चा के साथ मिलकर समूह के भविष्य के स्वामित्व ढाँचे को लेकर अनिश्चितता बढ़ा रहा है।
क्या टाटा संस की पब्लिक लिस्टिंग होगी?
टाटा संस ने पब्लिक लिस्टिंग पर विचार का संकेत दिया है, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स ने स्पष्ट रूप से इसका विरोध किया है। ट्रस्ट्स ने कहा है कि समूह के 100 वर्ष से अधिक पुराने ढाँचे को बनाए रखा जाना चाहिए, और वे पब्लिक लिस्टिंग के लिए सहमत नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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