टाटा संस चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का बड़ा फैसला: फरवरी 2027 के बाद नहीं लेंगे दोबारा नियुक्ति
सारांश
मुख्य बातें
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त 2026 को घोषणा की कि वे 20 फरवरी 2027 को अपना वर्तमान कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति के लिए अपना नाम प्रस्तुत नहीं करेंगे। टाटा समूह के साथ 40 वर्षों का सफर पूरा कर चुके चंद्रशेखरन ने बोर्ड को इस निर्णय से अवगत करा दिया है और उत्तराधिकार प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का अनुरोध किया है। यह घोषणा टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से ठीक पहले सामने आई है।
चंद्रशेखरन का बयान और भावनात्मक विदाई
चंद्रशेखरन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "मैंने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 वर्ष पूरे किए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान के विकास में योगदान देने का अवसर मेरे लिए अत्यंत संतोषजनक रहा है। पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान और एक गहरी जिम्मेदारी रही है।" उन्होंने बयान के अंत में सभी हितधारकों का आभार व्यक्त करते हुए "सादर, चंद्रा" से हस्ताक्षर किए।
पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव और बोर्ड में मतभेद
चंद्रशेखरन ने बताया कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को अगले पाँच वर्षों के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया था। इस सिफारिश को टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी समर्थन दिया था, और 24 फरवरी 2026 को इसे बोर्ड के समक्ष रखा गया था।
हालाँकि, चंद्रशेखरन के अनुसार, "यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया।" सर्वसम्मति न बन पाने के कारण उन्होंने निर्णय को स्थगित कर दिया था। उस बोर्ड बैठक को अब छह महीने बीत चुके हैं और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।
संगठन की स्थिरता को प्राथमिकता
चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया कि टाटा संस एक विशाल संस्थान है और समूह की कई रणनीतिक परियोजनाएँ इस समय महत्वपूर्ण चरण में हैं। उन्होंने कहा कि फरवरी 2027 के बाद नए नेतृत्व की स्पष्टता न केवल संगठन के लिए, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए भी आवश्यक है। इसीलिए उन्होंने बोर्ड से अनुरोध किया है कि उत्तराधिकार पर जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए।
चंद्रशेखरन का टाटा समूह में सफर
एन. चंद्रशेखरन 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे। 2009 में उन्हें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया गया, जहाँ उन्होंने कंपनी को वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। इसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया।
समूह की चुनौतियाँ और आगे का रास्ता
गौरतलब है कि पिछले एक वर्ष के दौरान टाटा समूह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है — एयर इंडिया से जुड़े नियामकीय विवाद, TCS पर मूल्य निर्धारण का दबाव और जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले जैसी घटनाएँ समूह को प्रभावित करती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं — 2016 में तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के दौरान भी दोनों संस्थाएँ चर्चा में रही थीं। अब चंद्रशेखरन के इस फैसले के बाद निवेशकों, कर्मचारियों और उद्योग जगत की नज़रें टाटा संस के अगले चेयरमैन की नियुक्ति पर टिकी हैं।