टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश शुरू, टाटा ट्रस्ट्स ने चयन समिति गठित करने का लिया फैसला
सारांश
मुख्य बातें
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन द्वारा फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पुनर्नियुक्ति न लेने की घोषणा के ठीक एक दिन बाद, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने 13 अगस्त 2026 को उत्तराधिकारी चयन हेतु एक समर्पित समिति गठित करने का निर्णय लिया।
चयन समिति का गठन
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के न्यासियों ने एक प्रस्ताव पारित कर चयन समिति बनाने का संकल्प लिया है। यह समिति टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के प्रावधानों के अनुरूप अगले चेयरमैन के नाम की सिफारिश करेगी।
ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि चयन समिति का गठन जल्द से जल्द किया जाएगा, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सुव्यवस्थित, समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। इसका प्राथमिक उद्देश्य समूह की होल्डिंग कंपनी में बिना किसी व्यवधान के सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित करना है।
चंद्रशेखरन के फैसले की पृष्ठभूमि
एन. चंद्रशेखरन ने जनवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद ग्रहण किया था। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक रह चुके थे। उन्होंने 1987 में TCS में एक प्रशिक्षु के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी और करीब 40 वर्षों की सेवा के बाद शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचे।
उल्लेखनीय है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट — दोनों ने सर्वसम्मति से चंद्रशेखरन का कार्यकाल अगले पाँच वर्षों के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी। इस प्रस्ताव को टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड का भी समर्थन मिला था।
हालाँकि, 24 फरवरी 2026 को बोर्ड के समक्ष रखे गए इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति नहीं मिल सकी, क्योंकि एक निदेशक ने इसका समर्थन करने से इनकार कर दिया। इसके बाद से नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं।
चंद्रशेखरन की विरासत
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने डिजिटल, प्रौद्योगिकी, विमानन, उपभोक्ता व्यवसाय, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक विस्तार जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की। एयर इंडिया का अधिग्रहण और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का विस्तार उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में गिने जाते हैं।
चंद्रशेखरन ने स्वयं कहा था कि टाटा संस इस समय कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं पर कार्यरत है और निवेशकों तथा हितधारकों के लिए फरवरी 2027 के बाद के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता होना आवश्यक है। SDTT ने उनके इस निर्णय का सम्मान करते हुए उनके योगदान की सराहना की।
आगे क्या होगा
अब चयन समिति के गठन के बाद उद्योग जगत और निवेशकों की नज़र संभावित उत्तराधिकारियों के नामों पर होगी। नया चेयरमैन भारत के सबसे बड़े और प्रभावशाली कारोबारी समूहों में से एक की अगली विकास यात्रा का नेतृत्व करेगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हो रहा है जब टाटा समूह वैश्विक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बदलाव के बीच कई बड़े दाँव लगा रहा है।