13 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश शुरू, टाटा ट्रस्ट्स ने चयन समिति गठित करने का लिया फैसला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश शुरू, टाटा ट्रस्ट्स ने चयन समिति गठित करने का लिया फैसला

सारांश

टाटा समूह में सत्ता परिवर्तन की उलटी गिनती शुरू हो गई है। एन. चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में पद छोड़ने के ऐलान के एक दिन बाद टाटा ट्रस्ट्स ने चयन समिति गठित करने का फैसला किया — जो भारत के सबसे बड़े कारोबारी साम्राज्य की अगली पारी की नींव रखेगी।

मुख्य बातें

टाटा ट्रस्ट्स ने 13 अगस्त 2026 को टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया।
चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं लेंगे।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट दोनों ने कार्यकाल विस्तार की सिफारिश की थी, लेकिन 24 फरवरी 2026 को बोर्ड में एक निदेशक के विरोध के बाद सर्वसम्मति नहीं बन सकी।
चंद्रशेखरन 1987 से टाटा समूह से जुड़े हैं और जनवरी 2017 से चेयरमैन पद पर हैं।
चयन समिति का गठन जल्द होगा, ताकि नेतृत्व हस्तांतरण सुव्यवस्थित और व्यवधान-मुक्त रहे।

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन द्वारा फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पुनर्नियुक्ति न लेने की घोषणा के ठीक एक दिन बाद, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने 13 अगस्त 2026 को उत्तराधिकारी चयन हेतु एक समर्पित समिति गठित करने का निर्णय लिया।

चयन समिति का गठन

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के न्यासियों ने एक प्रस्ताव पारित कर चयन समिति बनाने का संकल्प लिया है। यह समिति टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के प्रावधानों के अनुरूप अगले चेयरमैन के नाम की सिफारिश करेगी।

ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि चयन समिति का गठन जल्द से जल्द किया जाएगा, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सुव्यवस्थित, समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। इसका प्राथमिक उद्देश्य समूह की होल्डिंग कंपनी में बिना किसी व्यवधान के सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित करना है।

चंद्रशेखरन के फैसले की पृष्ठभूमि

एन. चंद्रशेखरन ने जनवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद ग्रहण किया था। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक रह चुके थे। उन्होंने 1987 में TCS में एक प्रशिक्षु के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी और करीब 40 वर्षों की सेवा के बाद शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचे।

उल्लेखनीय है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट — दोनों ने सर्वसम्मति से चंद्रशेखरन का कार्यकाल अगले पाँच वर्षों के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी। इस प्रस्ताव को टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड का भी समर्थन मिला था।

हालाँकि, 24 फरवरी 2026 को बोर्ड के समक्ष रखे गए इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति नहीं मिल सकी, क्योंकि एक निदेशक ने इसका समर्थन करने से इनकार कर दिया। इसके बाद से नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं।

चंद्रशेखरन की विरासत

चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने डिजिटल, प्रौद्योगिकी, विमानन, उपभोक्ता व्यवसाय, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक विस्तार जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की। एयर इंडिया का अधिग्रहण और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का विस्तार उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में गिने जाते हैं।

चंद्रशेखरन ने स्वयं कहा था कि टाटा संस इस समय कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं पर कार्यरत है और निवेशकों तथा हितधारकों के लिए फरवरी 2027 के बाद के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता होना आवश्यक है। SDTT ने उनके इस निर्णय का सम्मान करते हुए उनके योगदान की सराहना की।

आगे क्या होगा

अब चयन समिति के गठन के बाद उद्योग जगत और निवेशकों की नज़र संभावित उत्तराधिकारियों के नामों पर होगी। नया चेयरमैन भारत के सबसे बड़े और प्रभावशाली कारोबारी समूहों में से एक की अगली विकास यात्रा का नेतृत्व करेगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हो रहा है जब टाटा समूह वैश्विक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बदलाव के बीच कई बड़े दाँव लगा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक रणनीतिक मोड़ है — ऐसे समय में जब समूह एयर इंडिया के पुनरुद्धार, सेमीकंडक्टर निवेश और EV क्षेत्र में एक साथ कई बड़े दाँव खेल रहा है। 24 फरवरी 2026 को बोर्ड में एक निदेशक का विरोध और उसके बाद की अनिश्चितता बताती है कि टाटा संस के शीर्ष पर आंतरिक सहमति उतनी सहज नहीं है जितनी बाहर से दिखती है। असली सवाल यह है कि क्या चयन समिति एक ऐसा नेता चुन पाएगी जो न केवल चंद्रशेखरन की विरासत को आगे ले जाए, बल्कि इन जटिल परियोजनाओं को भी सँभाल सके — और वह भी बिना किसी संक्रमणकालीन अनिश्चितता के।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाटा ट्रस्ट्स ने चयन समिति क्यों बनाई है?
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन द्वारा फरवरी 2027 में पद छोड़ने की घोषणा के बाद, टाटा ट्रस्ट्स ने अगले चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए यह समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुरूप नाम की सिफारिश करेगी।
एन. चंद्रशेखरन टाटा संस का पद कब छोड़ेंगे?
एन. चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद पद छोड़ देंगे और पुनर्नियुक्ति नहीं लेंगे। उन्होंने जनवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था।
चंद्रशेखरन का कार्यकाल विस्तार क्यों नहीं हुआ?
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट दोनों ने कार्यकाल विस्तार की सिफारिश की थी, और नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी व बोर्ड का भी समर्थन था। लेकिन 24 फरवरी 2026 को एक निदेशक के विरोध के कारण प्रस्ताव को सर्वसम्मति नहीं मिल सकी, जिसके बाद चंद्रशेखरन ने स्वयं पद न बढ़ाने का फैसला किया।
टाटा संस के अगले चेयरमैन की चयन प्रक्रिया कैसे होगी?
टाटा ट्रस्ट्स द्वारा गठित चयन समिति टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुरूप अगले चेयरमैन के नाम की सिफारिश करेगी। समिति का गठन जल्द से जल्द किए जाने की बात कही गई है, ताकि नेतृत्व हस्तांतरण बिना किसी व्यवधान के हो सके।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या रहीं?
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने डिजिटल, प्रौद्योगिकी, विमानन, उपभोक्ता व्यवसाय, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति की। एयर इंडिया का अधिग्रहण और सेमीकंडक्टर व EV क्षेत्र में निवेश उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण पहलों में शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 19 घंटे पहले
  2. कल
  3. कल
  4. कल
  5. कल
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले