चंद्रशेखरन के इस्तीफे से टाटा ग्रुप का ₹68,119 करोड़ मार्केट कैप स्वाहा, TCS सबसे बड़ा शिकार
सारांश
मुख्य बातें
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की घोषणा के बाद बुधवार, 12 अगस्त को टाटा ग्रुप की सभी सूचीबद्ध कंपनियों में भारी बिकवाली का दौर चला, जिससे समूह का संयुक्त बाजार पूंजीकरण ₹68,119 करोड़ घटकर ₹26.32 लाख करोड़ रह गया — जो पिछले सत्र में करीब ₹27 लाख करोड़ था। यह एक ही दिन में टाटा ग्रुप की वैल्यूएशन के लिए हाल के वर्षों का सबसे बड़ा एकल-दिवसीय झटका माना जा रहा है।
TCS की सबसे बड़ी मार
मार्केट वैल्यू में गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने झेला। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी के शेयर 4.79% की गिरावट के साथ ₹2,323.30 प्रति शेयर पर बंद हुए, जिससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण अकेले ₹42,440 करोड़ घटकर ₹8.40 लाख करोड़ रह गया।
दूसरा सबसे बड़ा नुकसान टाइटन को हुआ, जिसके शेयरों में करीब 2% की गिरावट से कंपनी का मार्केट कैप ₹9,304 करोड़ घट गया। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का बाजार पूंजीकरण ₹4,898 करोड़ और टाटा स्टील का ₹4,745 करोड़ कम हुआ।
अन्य कंपनियों पर असर
टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की मार्केट वैल्यू में ₹3,098 करोड़ की कमी आई। टाटा पावर और इंडियन होटल्स को क्रमशः ₹1,598 करोड़ और ₹1,566 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा टाटा कम्युनिकेशंस में ₹812 करोड़, ट्रेंट में ₹907 करोड़, टाटा एलेक्सी में ₹606 करोड़, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में ₹508 करोड़ और तेजस नेटवर्क्स में ₹265 करोड़ की गिरावट दर्ज की गई। टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र) का बाजार पूंजीकरण भी नीचे आया।
कुछ शेयरों में बढ़त भी
हालाँकि, समूह की सभी कंपनियाँ लाल निशान में नहीं रहीं। टाटा मोटर्स की मार्केट वैल्यू में ₹1,786 करोड़ का इजाफा हुआ, जबकि टाटा कैपिटल को ₹700 करोड़ का फायदा मिला। टाटा केमिकल्स और वोल्टास में भी मामूली बढ़त रही — इनकी मार्केट वैल्यू में क्रमशः ₹167 करोड़ और ₹66 करोड़ की वृद्धि हुई।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
यह बिकवाली उस खबर के बाद आई जब बोर्ड के एक सदस्य ने चेयरमैन के रूप में चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया, जिसके बाद उन्होंने कार्यकाल विस्तार न लेने का निर्णय किया। चंद्रशेखरन के अनुसार, इस मामले को लेकर लंबे समय से बनी अनिश्चितता के कारण बोर्ड के लिए उत्तराधिकार योजना पर आगे बढ़ना अनिवार्य हो गया था।
एक आधिकारिक बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि उन्होंने टाटा ग्रुप में अपने पेशेवर करियर के चार दशक पूरे कर लिए हैं और टाटा संस के चेयरमैन के रूप में करीब दस साल के कार्यकाल को उन्होंने एक सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी बताया। गौरतलब है कि टाटा ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन हमेशा बाजार के लिए संवेदनशील घटना रही है — यह ऐसे समय में आया है जब समूह की कई कंपनियाँ वैश्विक विस्तार के बीच प्रतिस्पर्धी दबाव झेल रही हैं।
आगे क्या होगा
अब बाजार और निवेशकों की नजर टाटा संस के उत्तराधिकार की योजना पर टिकी है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक नए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक समूह के शेयरों में अस्थिरता बनी रह सकती है। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए टाटा ग्रुप की बुनियादी मजबूती बरकरार है, लेकिन नेतृत्व की अनिश्चितता निकट भविष्य में धारणा को प्रभावित करती रहेगी।