केरल का कर्ज संकट: 100 दिन बाद भी सतीशन सरकार का उधार ₹1.92 लाख करोड़ पर
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व में केरल सरकार को 26 अगस्त 2026 को 100 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन राज्य की कर्ज निर्भरता में अभी तक कोई ठोस बदलाव नहीं आया है। सत्ता संभालते ही सरकार ने श्वेत पत्र जारी कर केरल की कुल देनदारियाँ ₹5.07 लाख करोड़ घोषित की थीं — और अब उसी सरकार का पहला बजट ₹1.92 लाख करोड़ के नए कर्ज पर टिका है।
श्वेत पत्र और विरासत की चुनौती
सरकार परिवर्तन के तुरंत बाद प्रस्तुत श्वेत पत्र में स्पष्ट किया गया कि पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार ने राज्य पर भारी वित्तीय बोझ छोड़ा है। राज्य की आय का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और अन्य अपरिहार्य खर्चों में खप जाता है, जिससे विकास कार्यों के लिए नगण्य गुंजाइश बचती है।
विपक्ष में रहते हुए सतीशन ने बार-बार तर्क दिया था कि केरल केवल दैनिक खर्च चलाने के लिए कर्ज नहीं ले सकता। अब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर उनके सामने वही सवाल है।
बजट में कर्ज की स्थिति
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में केरल ने लगभग ₹1.92 लाख करोड़ का कुल उधार लेने की योजना बनाई है। पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान में यह आँकड़ा लगभग ₹1.70 लाख करोड़ था — यानी उधार में वृद्धि हुई है, कमी नहीं।
हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि केवल उधार की संख्या से पूरी तस्वीर नहीं बनती। असली कसौटी यह है कि क्या सरकार अपनी आय में पर्याप्त वृद्धि कर भविष्य में कर्ज की आवश्यकता को घटा सकती है।
राजस्व वृद्धि का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
वित्त मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री सतीशन ने इस वित्तीय वर्ष में अपना कर राजस्व 18 प्रतिशत बढ़ाकर ₹99,002 करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। सरकार को जीएसटी, पंजीकरण शुल्क, उत्पाद शुल्क और अन्य करों से अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद है।
इसके अलावा, कर बकाया की वसूली, संपत्ति के अवमूल्यन से निपटने और कर संग्रह प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। लेकिन ये अभी तक लक्ष्य और उपाय ही हैं — पहले 100 दिनों में वास्तविक राजस्व संग्रह के आँकड़े अभी सामने नहीं आए हैं।
KIIFB की समीक्षा
श्वेत पत्र में तीखी आलोचना का केंद्र रही अवसंरचना वित्तपोषण एजेंसी केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) के भविष्य की जाँच के लिए एक समिति गठित की गई है। समिति को इसकी वित्तीय संरचना की समीक्षा कर सुधारों का सुझाव देने को कहा गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब KIIFB पर पहले से ही भारी देनदारियों के आरोप हैं, जो राज्य के कुल वित्तीय बोझ में योगदान देती हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि 100 दिन किसी भी सरकार की नीतिगत दिशा की प्रारंभिक झलक भर होते हैं। सतीशन सरकार ने समस्याओं की पहचान की है, श्वेत पत्र से विश्लेषण किया है और बजट में समाधान का वादा किया है।
आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा कि क्या राजस्व वृद्धि के लक्ष्य पूरे होते हैं, खर्च पर नियंत्रण संभव है, और केरल की दशकों पुरानी कर्ज निर्भरता में वास्तविक कमी आती है।