26 अगस्त 2026
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सिद्दारमैया का डिप्टी सीएम वाला बयान: कर्नाटक कांग्रेस में नई हलचल, राजनीतिक पुनर्सक्रियता की अटकलें तेज

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सिद्दारमैया का डिप्टी सीएम वाला बयान: कर्नाटक कांग्रेस में नई हलचल, राजनीतिक पुनर्सक्रियता की अटकलें तेज

सारांश

एक सेमिनार में सिद्दारमैया का एक सवाल — 'परमेश्वर को डिप्टी सीएम किसने बनाया?' — कर्नाटक कांग्रेस में बड़ी बहस बन गया है। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद लो-प्रोफाइल रहे सिद्दारमैया की यह टिप्पणी उनकी राजनीतिक पुनर्सक्रियता का संकेत मानी जा रही है, जो शिवकुमार के लिए असहजी बढ़ा सकती है।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बेंगलुरु में एक आंतरिक आरक्षण सेमिनार में जी.
परमेश्वर को एकमात्र डिप्टी सीएम बनाए जाने के फैसले पर सवाल उठाया।
सिद्दारमैया ने बताया कि शुरुआत में चार से पाँच उप-मुख्यमंत्री पद बनाने की योजना थी।
श्रोताओं ने माना कि परमेश्वर को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला सिद्दारमैया की पहल पर हुआ था।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों के मंच से राजनीतिक सक्रियता बढ़ा सकते हैं।
सिद्दारमैया के पुत्र यतींद्र सिद्दारमैया वर्तमान में शहरी विकास विभाग के मंत्री हैं।
यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार के लिए राजनीतिक असहजी पैदा कर सकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के एक सेमिनार में दिए गए बयान ने कर्नाटक की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। 26 अगस्त को उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से फैला, जिसमें वह जी. परमेश्वर को एकमात्र उप-मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले का संदर्भ देते हुए पूछ रहे हैं कि यह निर्णय किसने लिया था। राजनीतिक विश्लेषक इस बयान को कांग्रेस में सिद्दारमैया की नए सिरे से सक्रियता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार को बेंगलुरु में आंतरिक आरक्षण विषय पर आयोजित एक सेमिनार में सिद्दारमैया बोल रहे थे। इसी दौरान एक श्रोता ने कर्नाटक में अब तक किसी अनुसूचित जाति के नेता के मुख्यमंत्री न बनने का मुद्दा उठाया और उनसे इस पर आंदोलन शुरू करने की माँग की।

सिद्दारमैया ने इस माँग को यह कहते हुए टाल दिया कि वह अकेले यह काम नहीं कर सकते। जब एक श्रोता ने कहा कि पार्टी में उनकी स्थिति हाईकमान जैसी है, तो उन्होंने इसे खारिज करते हुए कहा, 'लोग सिर्फ बातें कर रहे हैं।'

विवाद की जड़: डिप्टी सीएम का सवाल

बातचीत के दौरान सिद्दारमैया ने एक अहम सवाल दागा — 'जी. परमेश्वर को डिप्टी मुख्यमंत्री का पद किसने दिलाया?' श्रोताओं ने जवाब दिया कि यह सिद्दारमैया की ही पहल थी। इसके बाद उन्होंने याद दिलाया कि शुरुआत में चार से पाँच उप-मुख्यमंत्री पद बनाने की योजना थी, और पूछा कि केवल परमेश्वर को ही यह पद देने पर जोर किसने दिया। श्रोताओं ने एक बार फिर उनका नाम लिया, जिस पर तालियाँ गूँज उठीं।

गौरतलब है कि परमेश्वर राज्य के प्रमुख दलित नेताओं में से एक हैं। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में अपना नाम न चुने जाने पर उन्होंने नाराज़गी जताई थी, हालाँकि उन्होंने पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करने की बात भी कही थी।

सिद्दारमैया की राजनीतिक पुनर्सक्रियता की अटकलें

मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सिद्दारमैया काफी हद तक लो-प्रोफाइल रहे हैं। लेकिन इस सेमिनार में उनके बयान के बाद पार्टी के अंदरूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया आने वाले दिनों में अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों को केंद्र में रखकर एक सामाजिक-राजनीतिक मंच के ज़रिए अपनी सक्रियता बढ़ा सकते हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि सिद्दारमैया के पुत्र यतींद्र सिद्दारमैया को वर्तमान मंत्रिमंडल में शहरी विकास विभाग सौंपा गया है, जो परिवार की राजनीतिक उपस्थिति को रेखांकित करता है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार पर असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्दारमैया की बढ़ती सक्रियता मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर अंदरूनी समीकरण पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं। कथित तौर पर दोनों नेताओं के बीच सत्ता-साझेदारी की व्यवस्था को लेकर तनाव पहले भी सामने आता रहा है।

आगे क्या

फिलहाल सिद्दारमैया की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन सेमिनार में उनके संकेत और पार्टी सूत्रों की बातें मिलकर यह तस्वीर बनाती हैं कि कर्नाटक कांग्रेस में आने वाले हफ्तों में नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सोचा-समझा राजनीतिक संदेश लगता है। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद जिस तरह वह लो-प्रोफाइल रहे और अब दलित-पिछड़ा वर्ग के मंच पर वापस आ रहे हैं, यह कांग्रेस के भीतर शक्ति-संतुलन को नए सिरे से परखने की कोशिश है। असली सवाल यह है कि क्या यह सक्रियता शिवकुमार के नेतृत्व को चुनौती देने की दिशा में है, या महज़ अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने का प्रयास — और कर्नाटक कांग्रेस का जवाब इस पर बहुत कुछ तय करेगा।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्दारमैया ने डिप्टी सीएम पद पर क्या बयान दिया?
सिद्दारमैया ने एक सेमिनार में कहा कि शुरुआत में चार से पाँच उप-मुख्यमंत्री पद बनाने की योजना थी, लेकिन केवल जी. परमेश्वर को ही यह पद दिया गया। उन्होंने सवाल पूछा कि यह फैसला किसने लिया, जिस पर श्रोताओं ने उनका नाम लिया।
जी. परमेश्वर कर्नाटक में किस भूमिका में हैं?
जी. परमेश्वर कर्नाटक के प्रमुख दलित नेताओं में से एक हैं और वर्तमान में राज्य के उप-मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम न चुने जाने पर उन्होंने नाराज़गी जताई थी, लेकिन पार्टी हाईकमान के फैसले को स्वीकार किया था।
क्या सिद्दारमैया कर्नाटक कांग्रेस में फिर से सक्रिय होने वाले हैं?
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों को केंद्र में रखकर एक सामाजिक-राजनीतिक मंच के ज़रिए अपनी सक्रियता बढ़ा सकते हैं। हालाँकि उनकी ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
सिद्दारमैया की सक्रियता से मुख्यमंत्री शिवकुमार पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्दारमैया की बढ़ती सक्रियता मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर अंदरूनी समीकरण पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।
यतींद्र सिद्दारमैया कौन हैं और उनकी क्या भूमिका है?
यतींद्र सिद्दारमैया, सिद्दारमैया के पुत्र हैं और वर्तमान कर्नाटक मंत्रिमंडल में शहरी विकास विभाग के मंत्री हैं। उनकी मंत्रिमंडल में उपस्थिति सिद्दारमैया परिवार की राजनीतिक सक्रियता को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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