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परमेश्वर का दर्द: 40 साल की राजनीति, तीन बार मुख्यमंत्री पद से चूके — 'राजनीतिक फैसले कई कारकों पर निर्भर'

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परमेश्वर का दर्द: 40 साल की राजनीति, तीन बार मुख्यमंत्री पद से चूके — 'राजनीतिक फैसले कई कारकों पर निर्भर'

सारांश

40 साल की राजनीति, पार्टी अध्यक्ष से उपमुख्यमंत्री तक का सफर — लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी तीन बार हाथ से फिसली। जी. परमेश्वर का यह दर्द अब सार्वजनिक हो गया है और कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी दरारों को एक बार फिर उजागर करता है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर ने 8 जून को तुमकुरु में तीन बार मुख्यमंत्री पद से वंचित रहने पर निराशा व्यक्त की।
2013 में विधानसभा चुनाव हारने के कारण पहला अवसर गया; उनके अनुसार उनकी हार से सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने।
2018 में केवल 30 विधायकों वाली जेडी(एस) के साथ गठबंधन में एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने, परमेश्वर चूके।
2023 में कांग्रेस सरकार गठन के समय तीसरी बार प्रयास किया, किंतु उपमुख्यमंत्री की भूमिका मिली।
सूत्रों के अनुसार परमेश्वर करीबी सहयोगियों के सामने भावुक होकर रो पड़े।
राजनीति में 40 वर्ष पूरे; पार्टी अध्यक्ष सहित कई अहम पदों पर रहे, लेकिन मुख्यमंत्री पद कभी नहीं मिला।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 8 जून को तुमकुरु में सिद्धार्थ कॉलेज के कर्मचारियों से बातचीत के दौरान खुलकर स्वीकार किया कि तीन अलग-अलग अवसरों पर मुख्यमंत्री पद से वंचित रहना उनके लिए गहरी निराशा का विषय रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस चर्चा के दौरान वे भावुक हो गए और करीबी सहयोगियों के सामने फूट-फूटकर रो पड़े।

तीन बार चूके मुख्यमंत्री की कुर्सी

परमेश्वर ने बताया कि 2013 के विधानसभा चुनाव में उनकी हार ने पहला अवसर छीन लिया। उनके अनुसार, 'मेरी हार के कारण सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने।' गौरतलब है कि उस समय सिद्धारमैया पर परमेश्वर की हार सुनिश्चित कराने के आरोप लगे थे, जिन्हें सिद्धारमैया ने सिरे से नकारा था।

2018 में दूसरा मौका तब हाथ से निकला जब कांग्रेस को अधिक सीटें मिलने के बावजूद केवल 30 विधायकों वाली जनता दल (सेक्युलर) ने गठबंधन सरकार बनाई और एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने। परमेश्वर ने कहा, 'मैं मुख्यमंत्री बन सकता था, लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से मुझे यह पद नहीं दिया गया।'

हाल ही में 2023 में कांग्रेस सरकार के गठन के समय तीसरा अवसर आया, जब डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे। परमेश्वर ने बताया कि उन्होंने इस बार प्रयास किया और उन्हें पूरा भरोसा था, किंतु अंततः उन्हें उपमुख्यमंत्री की भूमिका सौंपी गई।

हाई कमान से माँगी थी अनुमति

परमेश्वर ने यह भी खुलासा किया कि एक समय उन्होंने पार्टी के हाई कमान से कहा था कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए विचार नहीं किया जा रहा, तो उन्हें पद से मुक्त किया जाए — क्योंकि उन पर अन्य जिम्मेदारियाँ भी हैं। यह बयान कांग्रेस के भीतर उनकी स्थिति और आंतरिक तनाव को उजागर करता है।

राजनीति में संयोग से आना

परमेश्वर ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत को याद करते हुए कहा कि राजनीति कभी उनकी योजना नहीं थी। उन्होंने बताया, 'जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनकर हमारे परिसर में आए, तो मुझे उनसे मिलने का अवसर मिला और धीरे-धीरे मैं पार्टी में शामिल हो गया।' तब से अब तक उन्होंने राजनीति में लगभग 40 वर्ष पूरे किए हैं और पार्टी अध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं।

जिम्मेदारी और अनुशासन पर जोर

निराशा जाहिर करने के साथ-साथ परमेश्वर ने कहा कि राजनीतिक पद के साथ जिम्मेदारी और अनुशासन आता है। उन्होंने कहा, 'हम अपनी मर्जी से व्यवहार नहीं कर सकते। जनता हमें देख रही है।' उन्होंने अपने सहयोगियों को भी आगाह किया कि लोग उनकी हर गतिविधि पर नजर रखते हैं।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान की चर्चाएँ थमी नहीं हैं। परमेश्वर का यह सार्वजनिक बयान पार्टी के भीतर दबी हुई असंतुष्टि को सतह पर लाता है — और यह संकेत देता है कि 40 वर्षों के राजनीतिक अनुभव के बावजूद उनकी महत्वाकांक्षाएँ अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपने दलित नेताओं को प्रतीकात्मक पदों से आगे ले जाने के लिए तैयार है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी. परमेश्वर को तीन बार मुख्यमंत्री पद क्यों नहीं मिला?
परमेश्वर के अनुसार, 2013 में विधानसभा चुनाव हारने से पहला मौका गया, 2018 में जेडी(एस) के साथ गठबंधन की राजनीतिक परिस्थितियों ने दूसरा अवसर छीना, और 2023 में पार्टी के आंतरिक निर्णय के चलते उन्हें उपमुख्यमंत्री की भूमिका दी गई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फैसले कई कारकों पर निर्भर करते हैं।
2013 में सिद्धारमैया पर परमेश्वर की हार सुनिश्चित कराने के आरोप क्या थे?
कथित तौर पर सिद्धारमैया पर मुख्यमंत्री पद पाने के लिए 2013 के चुनाव में परमेश्वर की हार सुनिश्चित कराने के आरोप लगे थे। हालाँकि, सिद्धारमैया ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से नकारते हुए कहा था कि परमेश्वर की हार में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
2018 में कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री कैसे बने?
2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को अधिक सीटें मिलने के बावजूद, केवल 30 विधायकों वाली जनता दल (सेक्युलर) ने कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार बनाई और एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने। परमेश्वर के अनुसार वे इस पद के दावेदार थे, किंतु राजनीतिक समीकरणों ने उन्हें वंचित किया।
परमेश्वर ने हाई कमान से पद छोड़ने की अनुमति क्यों माँगी थी?
परमेश्वर ने बताया कि जब उन्हें लगा कि मुख्यमंत्री पद पर उनके नाम पर विचार नहीं हो रहा, तो उन्होंने पार्टी हाई कमान से कहा कि उन्हें अन्य जिम्मेदारियाँ हैं और यदि वे इस पद के लिए विचार में नहीं हैं, तो उन्हें मुक्त किया जाए।
परमेश्वर कर्नाटक की राजनीति में कितने समय से सक्रिय हैं?
जी. परमेश्वर ने राजनीति में लगभग 40 वर्ष पूरे किए हैं। वे कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजनीति में उनका प्रवेश संयोगवश हुआ, जब राजीव गांधी के साथ मुलाकात ने उनकी दिशा बदल दी।
राष्ट्र प्रेस
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