कर्नाटक नेतृत्व संकट: सिद्धारमैया इंदिरा भवन पहुंचे, 'अगले सीएम' पर शिवकुमार की मुस्कान से अटकलें तेज़
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मंगलवार, 27 मई 2025 की सुबह नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन पहुंचे, जहाँ कांग्रेस हाईकमान के साथ निर्णायक बैठक होनी है। इसी बीच उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से जब मीडिया ने पूछा कि क्या वे कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे, तो उन्होंने सीधा जवाब देने की बजाय मुस्कुराकर टाल दिया — जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें और तेज़ हो गईं।
बैठक का एजेंडा और मुख्य भागीदार
सिद्धारमैया इंदिरा भवन में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला से मुलाकात करेंगे। इसके बाद राहुल गांधी के साथ भी एक अलग बैठक निर्धारित है। पार्टी हाईकमान के बुलावे पर दोनों शीर्ष नेता — सिद्धारमैया और शिवकुमार — सोमवार देर रात दिल्ली पहुंचे थे।
नाश्ते की मेज़ पर मंत्रियों का जमावड़ा
इंदिरा भवन रवाना होने से पहले सिद्धारमैया ने कर्नाटक भवन में मंत्रियों जी. परमेश्वर, सतीश जारकीहोली, एच.सी. महादेवप्पा, बैरथी सुरेश, के.जे. जॉर्ज और एम.बी. पाटिल के साथ नाश्ता किया। इस अनौपचारिक बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेता बी.के. हरिप्रसाद और कानूनी सलाहकार पोनन्ना भी मौजूद रहे।
मंत्रियों की प्रतिक्रिया: भ्रम स्वीकार, फैसला हाईकमान पर
पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा, 'पिछले छह महीनों से पार्टी में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, लेकिन हमें भरोसा है कि यह जल्द खत्म हो जाएगी। हमें हाईकमान की ओर से कोई बुलावा नहीं आया है — हम मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ यहाँ आए हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'अगर नेतृत्व का मामला सुलझ जाता है, तो बाकी चीजें अपने आप ठीक हो जाएंगी। पूरी पार्टी हाईकमान के फैसले का पालन करेगी।'
ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज ने पार्टी के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी से परहेज़ करते हुए कहा, 'जहाँ तक मुझे जानकारी है, पार्टी में कोई भ्रम नहीं है। हर कोई दिल्ली आता है, क्योंकि यह सत्ता का केंद्र है।' वहीं एम.बी. पाटिल — जिन्हें सिद्धारमैया के करीबी माना जाता है — ने बैठक के नतीजों या नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर कुछ भी कहने से इनकार किया।
कांग्रेस एमएलसी बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही, 'हालाँकि अब मामला अंतिम चरण में पहुँच गया है।' यह बयान विरोधाभासी तरीके से अटकलों को हवा देता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और दाँव
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार को अपने कार्यकाल के मध्य में नेतृत्व संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच खींचतान सार्वजनिक रूप से सामने आई थी। तब हाईकमान ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाकर समझौता कराया था। अब यह सवाल फिर केंद्र में है कि क्या पार्टी 'रोटेशन' फॉर्मूले पर अमल करेगी।
आगे क्या होगा
सभी की नज़रें अब उस बैठक पर टिकी हैं जिसमें हाईकमान, सिद्धारमैया और शिवकुमार तीनों एक साथ बैठेंगे। केपीसीसी अध्यक्ष पद का मुद्दा भी एजेंडे में हो सकता है, हालाँकि जारकीहोली ने इस पर अनिश्चितता जताई। बैठक के नतीजे कर्नाटक की राजनीति की दिशा तय करेंगे — और कांग्रेस के 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी गहरा असर डाल सकते हैं।