कर्नाटक नेतृत्व विवाद: गृह मंत्री परमेश्वर बोले — फैसला हाईकमान का, सार्वजनिक बयानबाजी से नहीं बदलेगा कुछ
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने 21 मई 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राज्य की कांग्रेस सरकार में कथित नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भी निर्णय केवल पार्टी हाईकमान के अधिकार क्षेत्र में है और मीडिया में बयानबाजी से कुछ हासिल नहीं होगा। साथ ही उन्होंने पलटवार करते हुए पूछा कि नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा आखिर उठाया किसने है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री पद पर अपने पुराने दावे को लेकर पूछे गए सवाल पर परमेश्वर ने कहा, 'मैं चुप नहीं हूँ। क्या आप चाहते हैं कि मैं हर जगह इस मुद्दे पर बयान दूँ? पार्टी में एक हाईकमान है और वही उचित समय पर तय करेगा कि चीजें किस तरह आगे बढ़ेंगी।' उन्होंने आगे जोड़ा कि मीडिया में बयान देकर पार्टी में कोई पद हासिल नहीं किया जा सकता।
परमेश्वर ने यह भी कहा, 'मुख्यमंत्री को बदलना है या जारी रखना है, इस पर यहाँ चर्चा करने से कुछ नहीं बदलेगा। अंतिम निर्णय हाईकमान ही लेगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच कार्यकाल-साझाकरण को लेकर अटकलें लगातार बनी हुई हैं।
सिद्दारमैया के कार्यकाल पर परमेश्वर का रुख
परमेश्वर ने दावा किया कि उनकी जानकारी के अनुसार सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री बनाए जाने के समय उनके कार्यकाल की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई थी। उन्होंने कहा, 'जहाँ तक मुझे पता है, सिद्दारमैया के लिए कोई तय कार्यकाल नहीं रखा गया था। हाईकमान या पार्टी महासचिवों ने हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।'
गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद से ही यह सवाल उठता रहा है कि क्या मुख्यमंत्री पद सिद्दारमैया और शिवकुमार के बीच साझा किया जाएगा। परमेश्वर के ताज़ा बयान से यह संकेत मिलता है कि ऐसी कोई औपचारिक व्यवस्था कम से कम उनके स्तर तक नहीं पहुँची।
शिवकुमार और राजन्ना के बयानों पर प्रतिक्रिया
जब परमेश्वर से यह पूछा गया कि कांग्रेस हाईकमान को नेतृत्व विवाद पर स्पष्टता देनी चाहिए, तो उन्होंने कहा, 'अगर कोई सवाल होगा तो वे स्पष्ट करेंगे। जब ऐसा कोई सवाल ही नहीं है तो स्पष्टीकरण क्यों दिया जाए? नेतृत्व परिवर्तन का सवाल किसने उठाया है?'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन की कोई माँग नहीं की है। कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री के.एन. राजन्ना द्वारा परमेश्वर को संभावित मुख्यमंत्री बताए जाने पर उन्होंने कहा कि यह बयान सद्भावना में दिया गया था, क्योंकि दोनों एक ही जिले — तुमकुरु — से हैं और साथ पढ़े हैं।
तुमकुरु-बेंगलुरु जोड़ने के प्रस्ताव का बचाव
परमेश्वर ने निवेश आकर्षित करने के लिए तुमकुरु को बेंगलुरु से जोड़ने के अपने सुझाव का भी बचाव किया और स्पष्ट किया कि वह जिले का नाम बदलने की बात नहीं कर रहे। उन्होंने कहा, 'तुमकुरु शहर की बेंगलुरु से नजदीकी को देखते हुए अगर बेंगलुरु का नाम उससे जोड़ा जाए तो निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।' उन्होंने नोएडा और दिल्ली के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि पड़ोसी शहरों को विकास के लिए जोड़ना एक वैश्विक प्रचलन है।
परमेश्वर ने बताया कि तुमकुरु में 20,000 एकड़ में औद्योगिक हब विकसित किया जा रहा है, जिसके दो चरण पूरे हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि इसे एशिया का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बताया जा रहा है। जापानी टाउनशिप के लिए भूमि आवंटन, फूड पार्क और नौ इंजीनियरिंग तथा तीन मेडिकल कॉलेजों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ के लाखों छात्रों को रोजगार के अवसरों की सख्त जरूरत है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर इस विकास अवधारणा को न समझ पाने का आरोप भी लगाया।
आगे क्या
कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व की यह अनिश्चितता तब तक बनी रहने की संभावना है जब तक हाईकमान कोई औपचारिक संकेत नहीं देता। परमेश्वर के बयान से यह तो स्पष्ट है कि वह सार्वजनिक दबाव की राजनीति से परहेज करते हैं, लेकिन उनकी चुप्पी को खुद एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी पढ़ा जा रहा है।