मोगा पुनर्वास केंद्र से 31 मरीज फरार: DC सागर सेतिया ने गठित की तीन सदस्यीय जांच कमेटी
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के मोगा जिले के जनर स्थित एक पुनर्वास केंद्र से 31 मरीजों के फरार होने की घटना ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया ने गुरुवार, 22 मई को मामले की जांच के लिए तत्काल तीन सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी का गठन किया और कमेटी को 22 मई तक अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
घटनाक्रम: कब और कैसे हुई फरारी
बुधवार देर शाम जनर स्थित पुनर्वास केंद्र से एकाएक 31 मरीज फरार हो गए। डिप्टी मेडिकल कमिश्नर से ईमेल के ज़रिए प्राप्त जानकारी के अनुसार, फरार हुए मरीजों में से आठ को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64-ए के तहत केंद्र में भर्ती कराया गया था। यह धारा नशे के आदी व्यक्तियों को स्वैच्छिक उपचार का अवसर देती है, जिससे इन मरीजों की निगरानी की ज़िम्मेदारी और अधिक संवेदनशील हो जाती है।
घटना को सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक माना जा रहा है। यह ऐसे समय में सामने आई है जब पंजाब में नशामुक्ति केंद्रों की निगरानी और प्रबंधन को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
जांच कमेटी का गठन और दायरा
कमेटी में अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (सामान्य), पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) और डिप्टी मेडिकल कमिश्नर को शामिल किया गया है। कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वह घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की गहन पड़ताल करे — यह पता लगाए कि मरीज किस तरह केंद्र से बाहर निकले और सुरक्षा व्यवस्था में कहाँ कमी रही।
प्रशासन ने कमेटी से यह भी अपेक्षा की है कि वह भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सिफारिशें प्रस्तुत करे, ताकि पुनर्वास केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
डिप्टी कमिश्नर सागर सेतिया ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि यह घटना संबंधित अधिकारियों की लापरवाही और सुरक्षा में कमी की ओर इशारा करती है। जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसी चूक रोकना — दोनों इस जांच के केंद्र में हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल पुलिस फरार मरीजों की तलाश में जुटी है। जांच कमेटी की रिपोर्ट 22 मई तक जिला प्रशासन को मिलने की उम्मीद है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय की जाएगी। गौरतलब है कि एनडीपीएस एक्ट के तहत भर्ती मरीजों की फरारी कानूनी दृष्टि से भी संवेदनशील मामला है।