पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने खारिज की सुखपाल खैरा की अवमानना याचिका, ₹6 लाख का जुर्माना

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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने खारिज की सुखपाल खैरा की अवमानना याचिका, ₹6 लाख का जुर्माना

सारांश

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा की अवमानना याचिका खारिज कर ₹6 लाख का जुर्माना ठोका। अदालत ने कहा — पंचायती रास्ते से अतिक्रमण हटाना वैध कार्रवाई थी, न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं चलेगा।

मुख्य बातें

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा की अवमानना याचिका 21 मई को खारिज की।
अदालत ने खैरा पर ₹6 लाख का जुर्माना लगाया और न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ी फटकार दी।
विवादित जमीन ग्राम पंचायत रामगढ़ का सार्वजनिक रास्ता है; प्रशासन की अतिक्रमण-हटाओ कार्रवाई को अदालत ने वैध माना।
खैरा ने आरोप लगाया था कि बिना नोटिस दीवार और गेट ध्वस्त किए गए, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है — कोर्ट ने यह तर्क नहीं माना।
AAP नेता बलतेज पन्नू ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि खैरा के आरोपों का जवाब अदालत ने दे दिया है।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा की अवमानना याचिका को 21 मई को खारिज करते हुए उन पर ₹6 लाख का जुर्माना लगाया। अदालत ने माना कि खैरा ने पंचायती जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई को न्यायिक अवमानना का रूप देने का प्रयास किया, जो न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद खैरा के पैतृक गाँव रामगढ़ में ग्राम पंचायत की सार्वजनिक जमीन से जुड़ा था। प्रशासन ने उस जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी, जिसे रिकॉर्ड में सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज किया गया है।

खैरा ने याचिका में आरोप लगाया था कि प्रशासन ने बिना नोटिस दिए उनकी पैतृक संपत्ति की दीवार और गेट के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। इसके विपरीत, राज्य सरकार का पक्ष था कि हटाया गया हिस्सा ग्राम पंचायत रामगढ़ की सार्वजनिक सड़क पर अवैध अतिक्रमण था।

अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि पंचायती रास्ते का हिस्सा है और उस पर कोई निजी दावा नहीं किया जा सकता। अदालत ने खैरा को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि अवमानना याचिका के माध्यम से एक वैध प्रशासनिक कार्रवाई को रोकने का प्रयास किया गया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में जमीन को सार्वजनिक रास्ता दर्ज होने के बावजूद न्यायिक प्रक्रिया का इस तरह उपयोग न्यायालय के समय और संसाधनों का अपव्यय है। इसी आधार पर याचिका खारिज करने के साथ ₹6 लाख का जुर्माना भी लगाया गया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

हाई कोर्ट के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। AAP के वरिष्ठ नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि सुखपाल सिंह खैरा लगातार विवादित बयान देते रहते हैं और उनके सभी आरोपों का जवाब अदालत ने दे दिया है।

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में कांग्रेस और AAP के बीच राजनीतिक तनातनी चल रही है और विपक्षी दल एक-दूसरे पर लगातार हमलावर हैं।

खैरा पर कानूनी और राजनीतिक असर

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने और भारी जुर्माना लगाए जाने को सुखपाल सिंह खैरा के लिए गंभीर कानूनी और राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि खैरा पंजाब में कांग्रेस के मुखर नेताओं में गिने जाते हैं और यह फैसला उनकी साख पर असर डाल सकता है।

आगे यह देखना होगा कि खैरा इस फैसले को उच्चतर न्यायालय में चुनौती देते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर तब जब रिकॉर्ड में जमीन सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज हो। पंजाब की राजनीति में जहाँ भूमि-विवाद अक्सर सत्ता और प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमते हैं, वहाँ यह फैसला विपक्षी नेताओं के लिए एक नज़ीर बन सकता है। असली सवाल यह है कि क्या खैरा इसे उच्चतर अदालत में चुनौती देंगे, या यह कानूनी पराजय उनके राजनीतिक आख्यान को भी प्रभावित करेगी।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुखपाल सिंह खैरा की अवमानना याचिका क्यों खारिज हुई?
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने माना कि विवादित जमीन ग्राम पंचायत रामगढ़ का सार्वजनिक रास्ता है और प्रशासन की अतिक्रमण-हटाओ कार्रवाई पूरी तरह वैध थी। अदालत ने कहा कि खैरा ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए एक सामान्य प्रशासनिक कदम को अवमानना का रूप देने की कोशिश की।
हाई कोर्ट ने खैरा पर कितना जुर्माना लगाया और क्यों?
हाई कोर्ट ने सुखपाल सिंह खैरा पर ₹6 लाख का जुर्माना लगाया। अदालत ने यह जुर्माना न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग और अदालत के समय व संसाधनों के अपव्यय के आधार पर लगाया।
इस विवाद में जमीन किसकी थी?
रिकॉर्ड के अनुसार विवादित जमीन ग्राम पंचायत रामगढ़ की सार्वजनिक सड़क का हिस्सा है। खैरा ने इसे अपनी पैतृक संपत्ति बताया था, लेकिन राज्य सरकार और अदालत दोनों ने इसे अवैध अतिक्रमण माना।
AAP ने इस फैसले पर क्या कहा?
AAP के वरिष्ठ नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि सुखपाल सिंह खैरा लगातार विवादित बयान देते रहते हैं और उनके सभी आरोपों का जवाब अदालत ने दे दिया है। AAP ने इस फैसले को खैरा के लिए करारा जवाब बताया।
क्या सुखपाल खैरा इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं?
कानूनी विकल्प के रूप में खैरा इस फैसले को उच्चतर न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं, हालाँकि अभी तक उनकी ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। यह फैसला उनके लिए कानूनी और राजनीतिक — दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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