सुप्रीम कोर्ट में जाएगी कांग्रेस! पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत खारिज, जयराम रमेश ने किया बड़ा ऐलान

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सुप्रीम कोर्ट में जाएगी कांग्रेस! पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत खारिज, जयराम रमेश ने किया बड़ा ऐलान

सारांश

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। असम CM हिमंता की पत्नी रिनिकी भुइयां द्वारा दर्ज FIR के इस मामले में कांग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी। जयराम रमेश ने पार्टी की पूर्ण एकजुटता का ऐलान किया।

Key Takeaways

  • 24 अप्रैल 2025 को गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
  • कांग्रेस अब इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी — जयराम रमेश ने किया ऐलान।
  • मामला असम CM हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां द्वारा दर्ज FIR से जुड़ा है।
  • न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया की पीठ ने 21 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखा था।
  • सुप्रीम कोर्ट पहले ही 15 अप्रैल को तेलंगाना HC की अंतरिम राहत पर रोक लगा चुका है।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा को गुवाहाटी उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। 24 अप्रैल को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने स्पष्ट किया है कि पार्टी पवन खेड़ा के साथ पूरी तरह एकजुट है।

मामले की पृष्ठभूमि: क्या है पूरा विवाद?

पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर एक से अधिक पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था। इस बयान के बाद रिनिकी भुइयां ने पवन खेड़ा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई। गिरफ्तारी से संरक्षण पाने के लिए खेड़ा ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।

असम पुलिस के अनुसार इस मामले में केवल मानहानि नहीं, बल्कि धोखाधड़ी, जालसाजी और दस्तावेजों की कथित हेराफेरी जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं, जिनके लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक बताई गई।

जयराम रमेश का बयान: पार्टी की एकजुटता

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपने मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ पूरी तरह एकजुटता से खड़ी है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा रही है।"

उन्होंने आगे कहा, "हमें विश्वास है कि धमकी, डरा-धमकाकर और उत्पीड़न की राजनीति पर न्याय की विजय होगी।" यह बयान स्पष्ट करता है कि कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रही है।

हाईकोर्ट में क्या हुई बहस?

गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया की एकल-न्यायाधीश पीठ ने 21 अप्रैल को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और 24 अप्रैल को यह फैसला सुनाया।

खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और आगामी चुनावों को देखते हुए निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि खेड़ा के फरार होने का कोई जोखिम नहीं है और हिरासत में पूछताछ अनावश्यक है।

वरिष्ठ वकील कमल नयन चौधरी ने भी आरोपों को "जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण" बताया और कहा कि इनका निपटारा निजी शिकायत के जरिए संभव है, न कि आपराधिक मुकदमे से।

दूसरी ओर, असम के एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने कहा कि मामला महज मानहानि तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार इसमें स्वामित्व विलेखों की हेराफेरी जैसे संगीन आरोप हैं, जिनकी जांच के लिए हिरासत जरूरी है।

सर्वोच्च न्यायालय में पहले भी मिल चुका है झटका

इस मामले की कानूनी यात्रा काफी जटिल रही है। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल को पवन खेड़ा को एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दी थी। लेकिन असम पुलिस के चुनौती देने पर सर्वोच्च न्यायालय ने 15 अप्रैल को इस राहत पर रोक लगा दी।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा की रोक हटाने की अर्जी और अंतरिम सुरक्षा बढ़ाने की मांग — दोनों को खारिज कर दिया। अब गुवाहाटी हाईकोर्ट के ताजे फैसले के बाद कांग्रेस एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने जा रही है।

राजनीतिक संदर्भ: विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई का बढ़ता पैटर्न?

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में विपक्षी नेताओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाइयों की संख्या बढ़ रही है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा शासित राज्यों में सरकारी तंत्र का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि असम सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज करती है।

गौरतलब है कि पवन खेड़ा पहले भी विवादों में रहे हैं — 2023 में उन्हें एक अन्य मामले में विमान से उतारकर हिरासत में लिया गया था, जिसे कांग्रेस ने तब भी "राजनीतिक प्रतिशोध" करार दिया था। यह दूसरी बार है जब उनके खिलाफ इस स्तर की कानूनी कार्रवाई हो रही है।

अब सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हैं, जहां कांग्रेस जल्द ही नई याचिका दाखिल करेगी। इस मामले का फैसला न केवल पवन खेड़ा की स्वतंत्रता, बल्कि राजनीतिक अभिव्यक्ति की सीमाओं को भी परिभाषित कर सकता है।

Point of View

जो नागरिक स्वतंत्रता का अंतिम संरक्षक माना जाता है, पहले ही खेड़ा की अंतरिम राहत ठुकरा चुका है। कांग्रेस 'राजनीतिक प्रतिशोध' का आरोप लगाती है, लेकिन असम सरकार के अनुसार मामले में जालसाजी जैसे गंभीर अपराध हैं — इन दोनों दावों की निष्पक्ष जांच ही असली परीक्षा होगी। लोकतंत्र में बोलने की आजादी और कानून के दुरुपयोग के बीच की यह महीन रेखा अब सर्वोच्च न्यायालय को खींचनी होगी।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत क्यों खारिज हुई?
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने 24 अप्रैल को पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। असम सरकार ने तर्क दिया कि मामले में मानहानि के अलावा धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप हैं, जिनकी जांच के लिए हिरासत आवश्यक है।
पवन खेड़ा पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां पर एक से अधिक पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था। इस पर रिनिकी ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई, जिसमें मानहानि के साथ-साथ जालसाजी और दस्तावेज हेराफेरी के आरोप भी शामिल हैं।
कांग्रेस अब क्या करेगी?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने घोषणा की है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। पार्टी पवन खेड़ा के साथ पूरी एकजुटता का इजहार कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले में क्या फैसला दिया था?
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम राहत पर रोक लगा दी थी। इसके बाद खेड़ा की रोक हटाने और अंतरिम सुरक्षा की मांग भी सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी थी।
क्या पवन खेड़ा पहले भी किसी कानूनी विवाद में रहे हैं?
हां, 2023 में पवन खेड़ा को एक अन्य मामले में उड़ान के दौरान विमान से उतारकर हिरासत में लिया गया था। कांग्रेस ने उस समय भी इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था।
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