गुवाहाटी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पवन खेड़ा की जमानत खारिज, मंत्री पीयूष हजारिका ने उठाए तीखे सवाल
सारांश
Key Takeaways
- गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
- मामला असम CM हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां पर फर्जी पासपोर्ट आरोप लगाने से संबंधित एफआईआर से जुड़ा है।
- मंत्री पीयूष हजारिका ने फैसले का स्वागत कर साजिश में शामिल लोगों, फंडिंग और विदेशी संलिप्तता की जांच मांगी।
- हजारिका ने आरोप लगाया कि चुनाव से 48 घंटे पहले जाली दस्तावेजों से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश हुई।
- असम पुलिस की जांच जारी है; खेड़ा के पास अब सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बचा है।
- कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रही है, जबकि सत्तापक्ष इसे चुनावी कदाचार करार दे रहा है।
गुवाहाटी, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद असम के मंत्री पीयूष हजारिका ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां के खिलाफ कथित रूप से फर्जी पासपोर्ट संबंधी आरोप लगाने से जुड़ी एफआईआर से संबंधित है।
हाईकोर्ट का फैसला और मंत्री की प्रतिक्रिया
मंत्री पीयूष हजारिका ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वे आभारी हैं कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को दर्शाता है।
हजारिका ने आरोप लगाया कि पवन खेड़ा ने जमीन के दस्तावेज और पासपोर्ट इसलिए जाली बनाए ताकि चुनाव परिणामों में हेरफेर किया जा सके और भारत के अन्य स्वतंत्र देशों के साथ संबंधों को नुकसान पहुंचाया जा सके।
मंत्री के तीखे सवाल और जांच की मांग
पीयूष हजारिका ने इस पूरे प्रकरण में तीन अहम सवाल उठाए। पहला — इस कथित साजिश में पवन खेड़ा के अलावा और कौन-कौन शामिल थे और क्या वे स्वयं इसके मास्टरमाइंड थे या किसी बड़ी साजिश का मोहरा मात्र थे?
दूसरा सवाल यह था कि इस कथित अवैध काम के लिए धन किसने उपलब्ध कराया और इसके अतिरिक्त और कौन-कौन से दस्तावेज जाली बनाए गए? तीसरा और सबसे गंभीर सवाल यह था कि क्या इस गैरकानूनी कार्य में सीमा पार से विदेशी तत्वों की भी संलिप्तता थी?
असम पुलिस पर भरोसा और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
हजारिका ने स्पष्ट किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि पवन खेड़ा बिचौलियों के माध्यम से काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि असम पुलिस पूरी तरह कानून के शासन के तहत कार्य करती है। उन्होंने चेतावनी दी कि खेड़ा और इस साजिश में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को कानून के कठोर परिणाम भुगतने होंगे।
कांग्रेस के बचाव पर हजारिका का पलटवार
मंत्री ने कांग्रेस के उन समर्थकों को भी आड़े हाथों लिया जो इस मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नहीं, बल्कि चुनाव से ठीक 48 घंटे पहले पार्टी के आधिकारिक मंच से जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मतदाताओं को प्रभावित करने का है।
गौरतलब है कि यह मामला उस समय सामने आया था जब लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिनिकी भुइयां के खिलाफ पासपोर्ट से जुड़े आरोप लगाए थे। असम पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी।
मामले का व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील इसलिए भी है क्योंकि इसमें एक तरफ सत्तारूढ़ दल के मुख्यमंत्री की पत्नी हैं और दूसरी तरफ विपक्षी दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे चुनावी कदाचार और दस्तावेज जालसाजी का मामला बता रहा है।
अब जब गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है, तो पवन खेड़ा के पास सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का विकल्प बचता है। असम पुलिस की जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।