बिहार विधानसभा में सम्राट चौधरी सरकार ने ध्वनिमत से जीता विश्वास मत, NDA के 201 विधायकों का समर्थन

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बिहार विधानसभा में सम्राट चौधरी सरकार ने ध्वनिमत से जीता विश्वास मत, NDA के 201 विधायकों का समर्थन

सारांश

बिहार में सम्राट चौधरी सरकार ने 24 अप्रैल को विधानसभा के विशेष सत्र में ध्वनिमत से विश्वास मत जीत लिया। NDA ने 201 विधायकों का समर्थन दिखाया, जबकि बहुमत के लिए सिर्फ 122 वोट चाहिए थे। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने प्रस्ताव पारित घोषित किया।

Key Takeaways

  • 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में सम्राट चौधरी सरकार ने ध्वनिमत से विश्वास मत जीता।
  • NDA ने 201 विधायकों के समर्थन का दावा किया, जबकि बहुमत के लिए केवल 122 वोट आवश्यक थे।
  • विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने विश्वास प्रस्ताव पारित होने की आधिकारिक घोषणा की।
  • नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी फिलहाल 29 विभागों का प्रभार संभाल रहे हैं; मंत्रिमंडल विस्तार अभी बाकी है।
  • नवंबर 2025 के बिहार चुनाव में NDA ने 202 सीटें जीती थीं, जो राज्य में उसकी मज़बूत स्थिति दर्शाता है।

पटना, 24 अप्रैलबिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में ध्वनिमत से विश्वास मत हासिल कर लिया। विश्वास प्रस्ताव पर हुई बहस के बाद सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी रहा और विपक्ष संख्या बल में कमज़ोर साबित हुआ। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने औपचारिक रूप से प्रस्ताव पारित होने की घोषणा की।

विश्वास मत का पूरा घटनाक्रम

243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में बहुमत के लिए 122 वोटों की आवश्यकता थी। NDA ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए 201 विधायकों के समर्थन का दावा पेश किया, जो बहुमत के आंकड़े से कहीं अधिक था। इसी कारण मतदान की औपचारिकता की आवश्यकता नहीं पड़ी और ध्वनिमत से ही प्रस्ताव पारित हो गया।

सदन में सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार आगमन हुआ, जहाँ उनका फूलों के गुलदस्ते से भव्य स्वागत किया गया। यह उनके राजनीतिक सफर का एक ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है।

सरकार गठन की पृष्ठभूमि

JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी के नेतृत्व में NDA की नई सरकार का गठन हुआ।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, किसी भी नए मुख्यमंत्री को सत्ता की वैधता सिद्ध करने के लिए विधानसभा में बहुमत साबित करना अनिवार्य होता है। इसी उद्देश्य से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में NDA ने 202 विधायकों के साथ प्रचंड बहुमत प्राप्त किया था। बाद में नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने पर उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया, जिससे यह संख्या 201 रह गई।

मंत्रिमंडल में विभागों का वितरण

नई सरकार के गठन के साथ ही मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी वर्तमान में सामान्य प्रशासन, गृह, कैबिनेट सचिवालय, सतर्कता और चुनाव सहित कुल 29 विभागों का प्रभार संभाल रहे हैं।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को जल संसाधन और संसदीय कार्य सहित 10 विभाग सौंपे गए हैं। वहीं, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ऊर्जा और योजना एवं विकास सहित 8 विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार अभी शेष है, जिसकी तैयारियाँ चल रही हैं।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह विश्वास मत बिहार की राजनीति में NDA की मज़बूती का प्रमाण है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद जो राजनीतिक रिक्तता उत्पन्न हुई थी, उसे सम्राट चौधरी ने सफलतापूर्वक भरा है। विपक्ष की कमज़ोर स्थिति यह भी दर्शाती है कि महागठबंधन अभी तक एकजुट विकल्प प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं हो पाया है।

आलोचकों का कहना है कि 29 विभागों का एकमात्र मुख्यमंत्री के पास केंद्रित होना प्रशासनिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकार किस दिशा में आगे बढ़ती है। आने वाले हफ्तों में बिहार मंत्रिमंडल विस्तार और नई सरकार की पहली नीतिगत घोषणाओं पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

Point of View

बल्कि बिहार की सत्ता-संरचना में एक नए अध्याय की शुरुआत है। नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेता की छाया से बाहर निकलकर एक नया चेहरा राज्य की बागडोर संभाल रहा है — यह NDA के लिए जोखिम भी है और अवसर भी। 29 विभागों का एकाधिकार दर्शाता है कि सत्ता का केंद्रीकरण अभी जारी है, मंत्रिमंडल विस्तार में देरी इसी का संकेत है। विपक्ष की निष्प्रभावी उपस्थिति यह भी बताती है कि बिहार में जवाबदेही का तंत्र कमज़ोर पड़ रहा है, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

बिहार में सम्राट चौधरी सरकार ने विश्वास मत कब और कैसे हासिल किया?
सम्राट चौधरी सरकार ने 24 अप्रैल 2026 को बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में ध्वनिमत से विश्वास मत हासिल किया। NDA ने 201 विधायकों के समर्थन का दावा पेश किया, जबकि बहुमत के लिए केवल 122 वोट आवश्यक थे।
सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री कब बने?
सम्राट चौधरी 15 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री बने। नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद NDA ने सम्राट चौधरी को नया नेता चुना।
बिहार में NDA के पास कितने विधायक हैं?
नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में NDA ने 202 विधायकों के साथ बहुमत हासिल किया था। नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद विधानसभा से इस्तीफे के कारण यह संख्या 201 रह गई।
सम्राट चौधरी के पास कौन-कौन से विभाग हैं?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी वर्तमान में सामान्य प्रशासन, गृह, कैबिनेट सचिवालय, सतर्कता और चुनाव सहित कुल 29 विभागों का प्रभार संभाल रहे हैं। बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार अभी होना बाकी है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री कौन हैं और उनके पास कौन से विभाग हैं?
बिहार में दो उपमुख्यमंत्री हैं — विजय कुमार चौधरी, जिनके पास जल संसाधन और संसदीय कार्य सहित 10 विभाग हैं, और बिजेंद्र प्रसाद यादव, जो ऊर्जा और योजना एवं विकास सहित 8 विभागों के प्रभारी हैं।
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